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छत्तीसगढ़

School Books Distribution Delay: जांजगीर में अशासकीय विद्यालय संचालक संघ की मांग; मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन

जांजगीर-चांपा: छत्तीसगढ़ राज्य अशासकीय विद्यालय संचालक संघ ने पाठ्य पुस्तक निगम के अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संघ ने जांजगीर-चांपा में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन कर आरोप लगाया कि समय पर पुस्तकें न मिलने के कारण स्कूलों में शिक्षा का स्तर गिर रहा है। संचालकों ने चेतावनी दी है कि यदि सत्र शुरू होते ही किताबें नहीं मिलीं, तो राजधानी रायपुर में उग्र आंदोलन किया जाएगा।

📉 पुस्तक वितरण में देरी से बिगड़ रहा शैक्षणिक सत्र

संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति शुरू हो चुकी है, लेकिन पाठ्य पुस्तकों के अभाव में पढ़ाई अधर में लटकी हुई है। इससे न केवल बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है, बल्कि शिक्षकों के लिए भी निर्धारित समय में कोर्स पूरा करना एक बड़ी चुनौती बन गया है। पिछले वर्षों के अनुभव बताते हैं कि डिपो से पहले शासकीय स्कूलों को प्राथमिकता दी जाती है और अशासकीय स्कूलों को किताबें बहुत देर से मिलती हैं, जो कि भेदभावपूर्ण है।

⚖️ क्या है संघ की मांग?

अशासकीय विद्यालय संचालक संघ के अध्यक्ष मनोज पाण्डेय और उपाध्यक्ष नरेंद्र पाण्डेय ने बताया कि पिछली बार निगम के अधिकारियों ने राज्य सरकार के आदेशों की अनदेखी की, जिसके कारण आधा सत्र बीतने के बाद भी किताबें नहीं मिलीं। इस वर्ष वैसी लापरवाही न हो, इसके लिए समय रहते मांग की जा रही है। संघ ने मांग की है कि:

  • शासकीय और अशासकीय स्कूलों में समान रूप से समय पर पुस्तकें वितरित हों।

  • पाठ्य पुस्तक निगम के दोषी अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई हो।

  • शैक्षणिक सत्र शुरू होते ही पुस्तकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

📋 प्रशासन का आश्वासन

धरना स्थल पर पहुंचे जांजगीर के तहसीलदार राजकुमार मरावी ने आंदोलनकारियों से ज्ञापन लिया। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मांग पत्र को कलेक्टर के माध्यम से राज्य सरकार तक पहुंचाया जाएगा। गौर करने वाली बात यह है कि बोर्ड परीक्षाओं में जिले के निजी स्कूलों के छात्र मेरिट सूची में अपना स्थान बनाकर जिले का मान बढ़ाते हैं, ऐसे में समय पर पुस्तकें न मिलना उनकी प्रतिभा को प्रभावित कर सकता है।

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