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Supreme Court PIL: डिजिटल कंटेंट के लिए रेगुलेटरी सिस्टम की मांग, ‘₹370 की बिरयानी’ विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका

सुप्रीम कोर्ट में दायर एक नई जनहित याचिका (PIL) ने डिजिटल दुनिया में कंटेंट निर्माण और उसके प्रसार को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। वकील विशाल तिवारी द्वारा अनुच्छेद 32 के तहत दायर इस याचिका में मांग की गई है कि स्टैंड-अप कॉमेडी, पॉडकास्ट और लाइव-स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म सहित सभी प्रकार के यूजर-जनरेटेड डिजिटल कंटेंट के लिए एक व्यापक रेगुलेटरी सिस्टम तैयार किया जाए।

🥘 “₹370 की बिरयानी” विवाद ने दी दस्तक

यह याचिका हाल ही में वायरल हुए “₹370 की बिरयानी” विवाद के बाद दायर की गई है। यह विवाद स्टैंड-अप कॉमेडियन प्रणीत मोरे के लाइव शो के दौरान शुरू हुआ था, जहाँ एक दर्शक हिमांशु जांगड़ा ने डेट पर किए गए खर्च को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। याचिका में कहा गया है कि यह घटना इस बात का प्रमाण है कि सोशल मीडिया के एल्गोरिदम कैसे विवादित बयानों को लाखों लोगों तक पहुँचाकर समाज, विशेषकर महिलाओं के सम्मान और सहमति के प्रति लोगों की सोच को प्रभावित करते हैं।

🔍 जवाबदेही और एक्सपर्ट कमेटी की मांग

याचिकाकर्ता का मुख्य तर्क कला या हास्य पर रोक लगाना नहीं, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर फैलाई जाने वाली भ्रामक और अपमानजनक सामग्री के लिए एक ‘जवाबदेही तंत्र’ विकसित करना है। याचिका में केंद्र सरकार से एक एक्सपर्ट कमेटी बनाने की मांग की गई है, जो सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले आपत्तिजनक कंटेंट की जांच कर सके और संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के दायरे में संस्थागत सुरक्षा उपाय सुनिश्चित कर सके।

🌐 डिजिटल युग में संवैधानिक सुरक्षा की जरूरत

याचिका में इस बात पर जोर दिया गया है कि डिजिटल कंटेंट को जिस तरह से बड़े पैमाने पर वायरल किया जाता है, उसके लिए कोई स्पष्ट गाइडलाइन नहीं है। विवादित वीडियो ने देशभर में बहस को जन्म दिया है कि क्या अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर किसी के प्रति अपमानजनक सोच का प्रसार करना उचित है? अब देखना यह होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर क्या रुख अपनाता है और भविष्य में डिजिटल कंटेंट के लिए कोई नया कानून या दिशा-निर्देश तैयार होता है या नहीं।

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