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मध्यप्रदेश

जबलपुर: रिपेयरिंग के दौरान भरभराकर गिरा 50 साल पुराना जर्जर मकान; मजदूरों को पहले ही हो गया था अंदेशा, सुरक्षित बाहर निकले

जबलपुर (मध्य प्रदेश): जबलपुर शहर के व्यस्ततम मछरहाई इलाके में बुधवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब करीब 50 साल पुराना एक दो मंजिला मकान देखते ही देखते ताश के पत्तों की तरह ढह गया।

गनीमत यह रही कि जिस समय यह भीषण हादसा हुआ, उस समय मकान के अंदर कोई भी मौजूद नहीं था। हादसे से महज कुछ मिनट पहले ही मकान में रिपेयरिंग का काम कर रहे 7 मजदूर सुरक्षित बाहर निकल आए थे। मजदूरों को पहले ही इमारत के अति-जर्जर होने और अचानक गिरने का अंदेशा हो गया था, जिससे एक बड़ा हादसा होने से टल गया।

🏗️ यतीश जैन का था खाली मकान, रिपेयरिंग के दौरान मजदूरों को हुआ था कमजोर होने का अहसास

घटनास्थल पर मौजूद स्थानीय निवासी संजय जैन ने बताया, “यह मकान यतीश जैन का बताया जा रहा है। कुछ दिनों पूर्व यतीश जैन का निधन हो गया था, जिसके बाद से यह मकान पूरी तरह से खाली पड़ा हुआ था। उनके परिजनों/रिश्तेदारों की ओर से मकान में मरम्मत (Repairing) का काम कराया जा रहा था।”

स्थानीय लोगों के अनुसार यह मकान दो तरफ सड़कों से घिरा था और नीचे व्यावसायिक दुकानें थीं। भवन बेहद पुराना होने के कारण इसकी नींव और ढांचा काफी कमजोर हो चुका था। काम के दौरान ही वहां लगे मजदूरों को इस बात का आभास हो गया था कि इमारत का टिकना मुश्किल है।

👷 “ऐसा लग रहा था कि कभी भी गिर जाएगा”: मजदूर दौलतराम ने बयां किया आंखों देखा खौफनाक मंजर

मकान में मरम्मत का काम कर रहे मजदूर दौलतराम ने बताया, “काम करते समय इमारत की स्थिति देखकर हमें साफ लग रहा था कि यह कभी भी गिर सकती है। इसी अंदेशे के चलते सभी मजदूरों ने बिना देरी किए समय रहते मकान से बाहर निकलने का समझदारी भरा फैसला लिया। जिस वक्त मकान गिरा, उससे कुछ समय पहले तक हम 7 मजदूर अंदर काम कर रहे थे। ईश्वर की कृपा से सभी मजदूर पूरी तरह सुरक्षित हैं और किसी को कोई चोट नहीं आई है।”

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची। प्रधान आरक्षक राजेंद्र सिलावट ने बताया कि मकान गिरते समय अंदर कोई भी व्यक्ति मौजूद नहीं था। हादसे के तुरंत बाद नगर निगम और बिजली कंपनी को सूचना दी गई, क्योंकि मकान गिरने से आसपास के बिजली के केबल और तार टूट गए थे। करंट फैलने की आशंका को देखते हुए क्षेत्र में तुरंत सुरक्षा घेरा (Barricade) बना दिया गया।

🏛️ कमानिया और आसपास के पुराने इलाकों में लगातार गिर रहीं जर्जर इमारतें

जबलपुर शहर में भले ही इस समय मूसलाधार बारिश नहीं हो रही है, लेकिन कमानिया और उसके आसपास के ऐतिहासिक इलाकों में पुरानी जर्जर इमारतों के अचानक ढहने का सिलसिला लगातार जारी है।

मछरहाई में दो मंजिला मकान गिरने से कुछ समय पहले कमानिया गेट के ठीक सामने स्थित एक 5 मंजिला इमारत भी भरभराकर गिर चुकी है। इसके अलावा दो दिन पहले ही कोतवाली थाने के समीप एक अन्य पुरानी इमारत धराशायी हो गई थी। राहत की बात यह है कि इन सभी हादसों में अब तक कोई जनहानि नहीं हुई है।

⚠️ 100 साल से ज्यादा पुरानी हैं कई इमारतें, सुरक्षा मानकों के बिना सटी बनी हैं दुकानें

कमानिया और आसपास का क्षेत्र जबलपुर के सबसे प्राचीन व्यावसायिक और रिहायशी इलाकों में शुमार है। इस इलाके में कई इमारतें 100 वर्ष से भी अधिक पुरानी बताई जाती हैं।

इन भवनों का निर्माण उस कालखंड में हुआ था जब आधुनिक निर्माण तकनीक, पिलर सिस्टम और सुरक्षा मानकों का उपयोग नहीं होता था। इस क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या यह है कि अधिकांश पुरानी इमारतें एक-दूसरे से पूरी तरह सटी हुई हैं। ऐसे में किसी भी एक भवन के कमजोर होने या ढहने की स्थिति में आसपास के अन्य मकानों और दुकानों पर भी गंभीर खतरा मंडराने लगता है।

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