कोरिया के दो बेटों ने रचा इतिहास: नेपाल में भारत को 10 साल बाद दिलाया फुटबॉल का गोल्ड मेडल, मंगलेश बने बेस्ट स्ट्राइकर

कोरिया (छत्तीसगढ़): छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के सुदूर ग्रामीण अंचल स्थित भैसवार गांव के दो साधारण परिवारों के प्रतिभावान युवाओं ने अंतरराष्ट्रीय खेल पटल पर देश का नाम रोशन किया है।
गांव के मंगलेश कुमार साहू और परमेश्वर सिंह ने नेपाल में आयोजित 11वीं इंडो-नेपाल इंटरनेशनल फुटबॉल प्रतियोगिता (Indo-Nepal International Football Championship) में अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन के बल पर भारत को स्वर्ण पदक (Gold Medal) दिलाने में निर्णायक भूमिका निभाई। उल्लेखनीय है कि भारतीय टीम ने इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में पूरे 10 वर्षों के लंबे अंतराल के पश्चात यह ऐतिहासिक स्वर्ण पदक अपने नाम किया है।
⚽ मंगलेश साहू ने दागा पहला गोल और बने टूर्नामेंट के “बेस्ट स्ट्राइकर”, अब थाईलैंड प्रतियोगिता पर नजर
भारतीय टीम के राइट स्ट्राइकर (Right Striker) मंगलेश कुमार साहू ने प्रतियोगिता के खिताबी मुकाबले में भारत की ओर से पहला गोल दागकर टीम को शुरुआती और मजबूत बढ़त दिलाई।
संपूर्ण टूर्नामेंट में उनके आक्रामक खेल और बेहतरीन तालमेल के लिए उन्हें “बेस्ट स्ट्राइकर” के खिताब से नवाजा गया। मंगलेश ने अपनी सफलता पर कहा, “बचपन से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने का सपना था। गरीब परिवार से होने के बावजूद मैंने कभी हिम्मत नहीं हारी। परिजनों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के सहयोग से पहले जिला, फिर संभाग व राज्य स्तर पर खेला और अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के लिए गोल्ड जीता है। हमारा अगला लक्ष्य थाईलैंड में होने वाली प्रतियोगिता में देश का परचम लहराना है।”
🧤 परमेश्वर सिंह बने जीत की अभेद्य दीवार, टूर्नामेंट में मिला “बेस्ट गोलकीपर” का पुरस्कार
भारतीय टीम के मुख्य गोलकीपर परमेश्वर सिंह ने पूरे टूर्नामेंट के दौरान विपक्षी टीमों के कई सीधे गोल रोककर उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
अत्यधिक दबाव वाले मुकाबलों में उनके द्वारा किए गए शानदार और साहसिक बचावों (Saves) ने भारत की जीत सुनिश्चित की। पूरे टूर्नामेंट में सबसे कम गोल खाने और अद्वितीय प्रदर्शन के लिए उन्हें आधिकारिक तौर पर “बेस्ट गोलकीपर” के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
🏞️ भैसवार गांव की मिट्टी से अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम तक का सफर, आर्थिक तंगी को चटाई धूल
दोनों खिलाड़ी अत्यंत साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखते हैं।
भैसवार गांव की पथरीली मिट्टी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव वाले मैदान में अभ्यास कर दोनों ने अपने खेल को निखारा। आर्थिक अभाव और तंगी कई बार उनके खेल के आड़े आई, किंतु दोनों ने हार नहीं मानी। परिजनों, ग्रामीणों और स्थानीय खेल प्रेमियों के सहयोग से निरंतर कड़ी मेहनत करते हुए आखिरकार उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी क्षमता और प्रतिभा का लोहा मनवा दिया।
🎉 नेपाल से जीत कर लौटे बेटों का भैसवार गांव में ढोल-नगाड़ों के साथ हुआ भव्य स्वागत
नेपाल में तिरंगा लहराकर स्वदेश लौटे मंगलेश साहू और परमेश्वर सिंह का भैसवार गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों, आतिशबाजी और पुष्पमालाओं के साथ जोरदार नागरिक अभिनंदन किया।
ग्रामीण संदीप साहू ने कहा कि ग्राम पंचायत और पूरे गांव के सहयोग से दोनों खेलने गए थे और देश को गौरवान्वित किया। वहीं बीजेपी नेता प्रकाश राजवाड़े ने कहा कि दोनों प्रतिभावान खिलाड़ियों को आगे भी हर संभव आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। गांव में उत्सव जैसा माहौल बना हुआ है और हर कोई अपने इन होनहार बेटों की उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहा है।






