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दिल्ली/NCR

‘चीनी संसद जैसी बन जाएगी लोकसभा’: नए संसद भवन के डिजाइन पर बोले शशि थरूर, दूरी और ध्रुवीकरण का कराया अहसास

नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने नए संसद भवन की वास्तुकला और माहौल पर तीखी टिप्पणी करते हुए इसे एक ‘बेजान कॉन्फ्रेंस सेंटर’ करार दिया है।

वरिष्ठ पत्रकार और लेखिका शोभना के. नायर की पुस्तक ‘हाउसिंग द रिपब्लिक: ए बायोग्राफी ऑफ द इंडियन पार्लियामेंट’ के विमोचन समारोह में बोलते हुए उन्होंने कहा कि नए भवन में पुरानी संसद जैसा भावनात्मक जुड़ाव और अपनापन महसूस नहीं होता। थरूर के अनुसार, विशालकाय संरचना, अत्यधिक ऊंची छतें और पंखे के आकार का नया लेआउट सदस्यों के बीच आपसी दूरी पैदा करता है, जो आज की राजनीति में बढ़ते ध्रुवीकरण का प्रतीक नजर आता है। उन्होंने तर्क दिया कि राष्ट्रीय राजधानी में बदलाव की इच्छा तो रही है, लेकिन हर बदलाव सकारात्मक या जरूरी नहीं होता।

🗣️ ‘सेंट्रल हॉल की कमी से खत्म हुआ आपसी संवाद और मेलजोल’

संसदीय परंपरा और आपसी बातचीत के माहौल पर थरूर ने गंभीर चिंता जताई:

  • संवाद की कमी: थरूर ने कहा कि नई इमारत में अनौपचारिक बातचीत और विचार-विमर्श को बढ़ावा देने वाले माहौल का पूरी तरह अभाव है।

  • सेंट्रल हॉल का न होना: पुरानी संसद के सेंट्रल हॉल की महत्ता बताते हुए उन्होंने कहा कि वह एक ऐसा मंच था जहां सत्तापक्ष, विपक्ष, पूर्व सांसद, वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक पर्यवेक्षक अनौपचारिक रूप से बैठकर चर्चा करते थे।

  • पार्टियों में दूरी: सेंट्रल हॉल न होने के कारण विभिन्न दलों के नेताओं के बीच आपसी सहयोग, सौहार्द और व्यक्तिगत मेलजोल की परंपरा लगभग समाप्त हो गई है, जो वर्तमान संसदीय व्यवस्था का चिंताजनक पहलू है।

⚠️ लोकसभा में 850 सांसदों के प्रस्ताव पर कड़ी चेतावनी: ‘चीनी संसद जैसा बन जाएगा सदन’

लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 तक करने की चर्चाओं पर कांग्रेस सांसद ने कड़ा रुख अपनाया:

  • सार्थक बहस का अंत: थरूर ने आगाह किया कि भले ही नए लोकसभा हॉल में 850 सांसदों के बैठने की भौतिक जगह उपलब्ध हो, लेकिन इतनी बड़ी संख्या से गुणवत्तापूर्ण संसदीय चर्चा और गंभीर विचार-विमर्श की भावना खत्म हो जाएगी।

  • चीन की संसद से तुलना: उन्होंने तीखा कटाक्ष करते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या होने पर सांसद केवल ‘अजनबियों का झुंड’ बनकर रह जाएंगे, जो चीन की पीपुल्स कंसल्टेटिव कांग्रेस की तरह मात्र एक औपचारिकता निभाते हुए शीर्ष नेता की घोषणाओं पर मेज थपथपाने और तालियां बजाने तक सीमित हो जाएंगे।

  • संसदीय उद्देश्य: उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि यही लक्ष्य है, तो यह उस लोकतांत्रिक और जीवंत संसदीय प्रणाली की मूल भावना के बिल्कुल विपरीत है, जिसे भारत ने दशकों से अपनाया है।

👍 बैठने की खुली जगह और आधुनिक सुविधाओं की सराहना भी की

आलोचना के साथ-साथ शशि थरूर ने नए भवन में सांसदों के लिए उपलब्ध कुछ व्यावहारिक सुधारों की प्रशंसा भी की:

  • खत्म हुई तंग बैठने की समस्या: थरूर ने स्वीकार किया कि पुरानी इमारत की तुलना में नए भवन में बैठने की व्यवस्था काफी खुली और सुगम है।

  • सफर में आसानी: पुरानी संसद में सांसदों को सिकुड़कर बैठना पड़ता था और गलियारे तक जाने के लिए अन्य सदस्यों के घुटनों से टकराते हुए निकलना पड़ता था, उस पुरानी व्यावहारिक असुविधा से नए भवन में पूरी तरह मुक्ति मिल गई है।

🏗️ सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट और नए संसद भवन की पृष्ठभूमि

परियोजना से जुड़े प्रमुख तथ्य:

  • उद्घाटन: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2023 में नए संसद भवन का भव्य उद्घाटन किया था।

  • विरासत का नवीनीकरण: यह नई इमारत केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास प्रोजेक्ट का मुख्य हिस्सा है, जिसे ब्रिटिश और औपनिवेशिक दौर की पुरानी प्रशासनिक इमारतों की जगह आधुनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार किया गया है।

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