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मध्यप्रदेश

Ujjain Simhastha 2028: विकास कार्यों के लिए सीएम मोहन यादव ने खुद तोड़ा अपना पैतृक मकान, कहा- जनहित सर्वोपरि

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के मुद्दे को लेकर मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट आ गई है और सत्ताधारी भाजपा तथा विपक्षी दल कांग्रेस के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने रविवार को भोपाल स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में एक महत्वपूर्ण पत्रकार-वार्ता को संबोधित करते हुए कांग्रेस पार्टी पर एसआईआर प्रक्रिया को लेकर जनता के बीच जानबूझकर भ्रम फैलाने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नियमानुसार दावे-आपत्तियां आमंत्रित करना और पूरी मतदाता सूची का पुनरीक्षण करना चुनाव प्रक्रिया का एक बेहद सामान्य और नियमित हिस्सा है।

🔍 चुनाव आयोग के अधिकारों पर सवाल उठाने को लेकर कांग्रेस पर साधा निशाना

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने आगे कहा कि एसआईआर के तहत विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया में दावे और आपत्तियां मंगाने का पूर्ण अधिकार स्वतंत्र चुनाव आयोग के पास सुरक्षित है। उन्होंने कांग्रेस पार्टी और उनके शीर्ष नेता राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि वे बिना किसी ठोस आधार के चुनाव आयोग की पारदर्शी प्रक्रिया पर लगातार सवालिया निशान खड़े कर रहे हैं। खंडेलवाल ने कहा कि कांग्रेस पार्टी की ओर से इस मामले में जितने भी निराधार आरोप लगाए जा रहे हैं और जिस तरह के बयान दिए जा रहे हैं, वे उसकी कड़े शब्दों में निंदा और आलोचना करते हैं।

🏛️ मुख्यमंत्री बोले- लोकतंत्र को संभालने की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं, बल्कि नेता प्रतिपक्ष की भी है

इस पूरे विवाद में तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि देश के स्वस्थ लोकतंत्र को संभालने और उसकी गरिमा बनाए रखने की जिम्मेदारी अकेले सरकार की नहीं होती, बल्कि उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी प्रतिपक्ष के नेता की भी होती है। मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी से मांग की कि उन्हें चुनाव आयोग के खिलाफ दिए गए अपने अमर्यादित बयानों को लेकर बिना शर्त सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।

🛑 28 सितंबर को निर्वाचन आयोग के घेराव का ऐलान, सीएम ने बताया अस्वीकार्य

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कड़े तेवर दिखाते हुए कहा कि संवैधानिक संस्था यानी चुनाव आयोग पर बार-बार सवाल उठाना और प्रदेश की जनता को भ्रमित करने का कुत्सित प्रयास करना पूरी तरह से अस्वीकार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय जनता पार्टी पूरी मजबूती के साथ चुनाव आयोग के साथ खड़ी है। उल्लेखनीय है कि एसआईआर के विरोध में कांग्रेस पार्टी ने मध्य प्रदेशभर में बड़े पैमाने पर आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया है और आगामी 28 सितंबर को राज्य निर्वाचन आयोग के मुख्य कार्यालय का घेराव करने की बड़ी घोषणा भी की है।

📜 आपातकाल और इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले का जिक्र कर कांग्रेस पर बोला बड़ा हमला

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान इतिहास के पन्नों को पलटते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट के पुराने ऐतिहासिक फैसले और देश के काले दौर यानी आपातकाल का भी खुलकर जिक्र किया। उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर लोकतांत्रिक संस्थाओं और संविधान की धज्जियां उड़ाने का आरोप लगाते हुए कहा कि देश का लोकतंत्र सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग और लोकसभा जैसी स्वतंत्र संवैधानिक संस्थाओं के मजबूत होने से ही जीवित रहता है। मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी से आत्ममूल्यांकन करने की नसीहत देते हुए उनका इस्तीफा तक मांग लिया और दोहराया कि चुनाव आयोग जैसी संस्था पर अनर्गल सवाल उठाने के लिए उन्हें देश से माफी मांगनी ही चाहिए।

🏡 उज्जैन में सिंहस्थ तैयारियों के तहत पैतृक मकान हटाने पर बोले सीएम- ‘प्रदेश के विकास कार्यों के लिए यह बहुत जरूरी है’

दूसरी ओर, उज्जैन में आगामी ‘सिंहस्थ-2028’ के भव्य आयोजन की तैयारियों के सिलसिले में चल रहे सड़क चौड़ीकरण अभियान की जद में आए अपने खुद के पैतृक मकान को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एक बड़ा और प्रेरणादायक बयान दिया है। उन्होंने कहा कि महाकाल लोक के निर्माण के बाद से उज्जैन में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई है, जिसे देखते हुए सिंहस्थ के मद्देनजर शहर का सुनियोजित विकास कार्य बेहद जरूरी है। इस सड़क चौड़ीकरण की चल रही कार्रवाई में मुख्यमंत्री का खुद का पैतृक मकान भी आ रहा है और उन्होंने किसी भी वीआईपी छूट के बिना स्वयं अपने हाथों से उस मकान के हिस्से को हटाने की प्रक्रिया शुरू करवा दी है।

❤️ बचपन की यादों से जुड़ा है घर, लेकिन जनहित और विकास कार्यों को दी पहली प्राथमिकता

मुख्यमंत्री ने भावुक होते हुए कहा कि यह वही उनका अपना पैतृक मकान है, जहां उनका पूरा बचपन बीता है और परिवार के कई महत्वपूर्ण पारिवारिक आयोजन व सुख-दुख के पल गुजरे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस घर से उनका गहरा भावनात्मक जुड़ाव होने के बावजूद, प्रदेश के मुखिया के दायित्व का निर्वहन करते हुए उनके लिए जनहित और विकास कार्यों को सबसे पहले प्राथमिकता देना जरूरी है। उनके अनुसार, उज्जैन शहर में सुगम यातायात और सड़क चौड़ीकरण के लिए कई अन्य निर्माण कार्यों के साथ उनके घर का हिस्सा भी हटाया जा रहा है, ताकि आने वाले सिंहस्थ पर्व में देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े।

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