मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून मामला: सुप्रीम कोर्ट में रिकॉल अर्जी पर जल्द सुनवाई की मांग, CJI सूर्यकांत करेंगे जांच

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के खिलाफ आई रिकॉल अर्जी पर बुधवार को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत के सामने जल्द सुनवाई की मांग रखी गई। वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण ने सीजेआई की अगुवाई वाली पीठ के सामने इस अर्जी का जिक्र किया। उन्होंने दलील दी कि इस मामले में एक क्यूरेटिव याचिका भी दाखिल की जा चुकी है, लेकिन उनका मानना है कि क्यूरेटिव याचिका से पहले रिकॉल के पहलू पर विचार करना बेहद जरूरी है।
इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि अदालत इस पूरे मामले की जांच करेगी और उसके बाद उचित फैसला लेगी। जानकारी के मुताबिक, रिकॉल की मांग का मुख्य आधार जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा के बेटे सिद्धार्थ शर्मा के निर्वाचन आयोग (ECI) से पेशेवर रूप से जुड़े होने को बनाया गया है। याचिका में दावा किया गया है कि चूंकि सिद्धार्थ शर्मा जुलाई 2024 से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चुनाव आयोग के स्टैंडिंग काउंसल हैं, इसलिए इस तथ्य के मद्देनजर जस्टिस शर्मा को इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग (Recusal) कर लेना चाहिए था।
🔍 क्या है पूरा मामला और स्प्लिट फैसले का विवाद?
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जस्टिस की अलग-अलग राय: याचिकाकर्ता का तर्क है कि जस्टिस शर्मा को अपने बेटे के चुनाव आयोग से जुड़ाव का खुलासा करना चाहिए था ताकि पक्षकार इस आधार पर रिक्यूजल की मांग कर सकें। गौरतलब है कि 23 सितंबर को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की दो सदस्यीय पीठ ने CEC और EC की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर विभाजित (Split) फैसला दिया था।
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संविधान पीठ का सवाल: जहां जस्टिस दीपांकर दत्ता ने मामले को संविधान पीठ के पास भेजने से असहमति जताई थी, वहीं जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा का मानना था कि इस मामले में संविधान की व्याख्या से जुड़े महत्वपूर्ण और गंभीर सवाल शामिल हैं, इसलिए इसे कम से कम पांच जजों की संविधान पीठ के समक्ष सुना जाना चाहिए। दोनों जजों की राय भिन्न होने के बाद फाइल CJI के पास भेजी गई थी।
🏛️ किस कानून से जुड़ा है यह पूरा विवाद?
यह पूरा कानूनी विवाद मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 की संवैधानिक वैधता से जुड़ा हुआ है। इस नए कानून के तहत चुनाव आयुक्तों की चयन समिति से मुख्य न्यायाधीश (CJI) को हटा दिया गया था और उनकी जगह प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री को शामिल किया गया है। वर्तमान चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय मंत्री शामिल होते हैं, जिसे लेकर लगातार कानूनी और राजनीतिक बहस जारी है।





