गुजारा भत्ता नहीं देने पर बार-बार जेल भेजना कानूनी रूप से सही नहीं, हाईकोर्ट का फैसला

रांचीः पत्नी और नाबालिग बेटी को गुजारा भत्ता नहीं देने के मामले में पति को लगातार जेल में रखने पर झारखंड हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है. अदालत ने कहा कि गुजारा भत्ता नहीं देने पर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125(3) के तहत एक डिफॉल्ट के लिए अधिकतम एक महीने तक ही जेल में रखा जा सकता है. एक ही बकाया अवधि के लिए बार-बार जेल की सजा देना कानूनी रूप से उचित नहीं है.
हाईकोर्ट ने पति की हिरासत बढ़ाने संबंधी निचली अदालत के आदेश को रद्द करते हुए उसे तत्काल रिहा करने को कहा है. जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने दुमका निवासी दशरथ सिंह की ओर से दायर क्रिमिनल रिवीजन याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया है.
📋 23 बार 30-30 दिनों के लिए बढ़ाई गई थी हिरासत, जानें क्या था पूरा मामला
दरअसल, दशरथ सिंह की पत्नी शंपू कुमारी ने अपनी और नाबालिग बेटी के भरण-पोषण के लिए दुमका फैमिली कोर्ट में आवेदन दिया था. फैमिली कोर्ट ने 31 मार्च 2023 को पति को पत्नी के लिए 5,000 रुपये और बेटी के लिए 3,000 रुपये प्रतिमाह गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया था. यह भुगतान 31 अगस्त 2021 से प्रभावी होना था.
आरोप था कि पति ने गुजारा भत्ता की बकाया राशि का भुगतान नहीं किया. इसके बाद पत्नी ने आदेश के अनुपालन के लिए अदालत का रुख किया. पति को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया और इसके बाद उसकी हिरासत लगातार बढ़ाई जाती रही. याचिका में कहा गया कि फैमिली कोर्ट ने 23 अलग-अलग आदेशों के जरिए हर बार 30 दिनों के लिए हिरासत बढ़ाई, लेकिन पति को बीच में एक दिन के लिए भी रिहा नहीं किया गया.
🏛️ झारखंड हाईकोर्ट की टिप्पणी—जेल भेजने से खत्म नहीं होती बकाया राशि चुकाने की जिम्मेदारी
झारखंड हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि गुजारा भत्ता के आदेश का पालन सुनिश्चित करने के लिए जेल भेजना एक कानूनी उपाय है लेकिन इसकी भी निर्धारित सीमा है. धारा 125(3) के तहत प्रत्येक अलग डिफॉल्ट के लिए अधिकतम एक महीने की कैद दी जा सकती है. एक ही डिफॉल्ट के लिए दूसरी बार जेल की सजा देना कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है.
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जेल की सजा भुगत लेने से गुजारा भत्ता चुकाने की जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती. पत्नी को बकाया राशि की वसूली के लिए कानून के मुताबिक दोबारा आवेदन करने का अधिकार है लेकिन प्रत्येक आवेदन अलग डिफॉल्ट से संबंधित होना चाहिए.
🔓 निचली अदालत का आदेश रद्द, पति को तत्काल रिहा करने का निर्देश
हाईकोर्ट ने पाया कि फैमिली कोर्ट ने लगातार 23 आदेशों के जरिए पति की हिरासत 30-30 दिनों के लिए बढ़ाई थी. अदालत ने 16 अप्रैल 2026 के संबंधित आदेश को निरस्त करते हुए दशरथ सिंह को तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया. इसके साथ ही क्रिमिनल रिवीजन याचिका स्वीकार करते हुए मामले का निपटारा कर दिया.




