Karnal Paddy Scam: हरियाणा में धान खरीद घोटाले का भंडाफोड़, यूपी से सस्ता धान लाकर एमएफएमबी पोर्टल पर खपाने की बड़ी साजिश बेनकाब

करनाल: पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश से बेहद कम कीमत पर धान खरीदकर उसे हरियाणा के स्थानीय किसानों के नाम और सरकारी पोर्टल की आड़ में सरकारी खरीद केंद्रों पर खपाने वाले सक्रिय गिरोहों पर प्रशासन का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। इंद्री क्षेत्र में एक आढ़ती के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होने के बाद अब घरौंडा की नई अनाज मंडी में संदिग्ध और अवैध धान की आवक से जुड़ा एक और बड़ा मामला सामने आया है। स्थानीय प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मंडी के भीतर बिना किसी वैध गेट पास के चुपचाप दाखिल हुईं धान से भरी तीन ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को अपने कब्जे में ले लिया है।
मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल के गलत इस्तेमाल की गहरी साजिश
मार्केट कमेटी की तरफ से स्थानीय पुलिस थाने में दर्ज कराई गई आधिकारिक शिकायत में इस बात की गंभीर आशंका जताई गई है कि हरियाणा सरकार के बहुचर्चित ‘मेरी फसल-मेरा ब्योरा’ (MFMB) पोर्टल पर पहले से पंजीकृत स्थानीय किसानों के निजी विवरण और उनके डेटा का अवैध तरीके से दुरुपयोग किया जा रहा था। इस साजिश का मुख्य मकसद उत्तर प्रदेश से लाए गए सस्ते धान को सरकारी ई-खरीद सिस्टम के भीतर वैध धान के रूप में दिखाकर एमएसपी का अनुचित लाभ उठाना था, जिसे प्रशासन ने समय रहते विफल कर दिया है।
मार्केट कमेटी सचिव की शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज
इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए मार्केट कमेटी घरौंडा के सचिव सुनील कुमार ने पुलिस को लिखित शिकायत दी, जिसके आधार पर पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए थाना घरौंडा में सुसंगत धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस ने गांव बल्लाह के रहने वाले ट्रैक्टर चालक कृष्ण और मंडी में स्थित फर्म ‘मैसर्स भीम सिंह संस’ के मुख्य प्रोपराइटर अमित मान को इस धोखाधड़ी में नामजद किया है।
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत हुई कार्रवाई
प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, नामजद किए गए दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) जो कि धोखाधड़ी से जुड़ी है, धारा 336(2) जो दस्तावेजों के फर्जीवाड़े और कूटरचना से संबंधित है, तथा आपराधिक साजिश की धारा 61 के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस अब इस बात की गहनता से जांच कर रही है कि इस अवैध नेटवर्क के पीछे और कौन-कौन लोग शामिल हैं और इस फर्जीवाड़े की जड़ें कहां तक फैली हुई हैं।





