Delhi High Court Notice: कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान दर्ज FIR पर दिल्ली HC का नोटिस, पत्रकारों की याचिका पर 17 नवंबर को होगी सुनवाई

दिल्ली: देश की राजधानी नई दिल्ली के भीतर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आगामी 3 अक्टूबर को आयोजित किए गए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान दो पत्रकारों के विरुद्ध दर्ज की गई एफआईआर (FIR) के हाई-प्रोफाइल मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए दिल्ली पुलिस को आधिकारिक रूप से नोटिस जारी किया है। यह विवादास्पद एफआईआर सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) विवेक भगत की लिखित शिकायत के आधार पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम यानी एससी/एसटी एक्ट के तहत दर्ज की गई थी, जिसमें पत्रकारों पर ड्यूटी के दौरान कथित तौर पर जातिसूचक टिप्पणियां करने का गंभीर आरोप लगाया गया है।
जांच पर रोक लगाने से अदालत का इनकार, याचिकाकर्ता पत्रकारों को नहीं मिली अंतरिम राहत
इस पूरे मामले की सुनवाई माननीय न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा की एकल पीठ के समक्ष हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने एसीपी विवेक भगत की शिकायत पर एक महिला पत्रकार और एक अन्य पुरुष पत्रकार के खिलाफ दर्ज किए गए एससी/एसटी एक्ट के मुकदमे की पुलिसिया जांच पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया। हालांकि, याचिकाकर्ता पत्रकारों ने अपनी कानूनी याचिकाओं के माध्यम से उनके खिलाफ दर्ज इस एफआईआर को पूरी तरह से रद्द करने की मांग की है, लेकिन हाईकोर्ट ने फिलहाल इस स्तर पर आपराधिक जांच प्रक्रिया पर कोई भी अंतरिम रोक लगाने या किसी तरह की राहत देने से मना कर दिया है।
कोर्ट ने मांगा दिल्ली पुलिस का जवाब, अब आगामी 17 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस चरण में अदालत केवल औपचारिक रूप से नोटिस जारी कर रही है। दिल्ली पुलिस और संबंधित पक्षों की ओर से अपना जवाब दाखिल किए जाने के बाद ही इस पूरे मामले के कानूनी गुण-दोष के आधार पर आगे की सुनवाई की जाएगी। कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि इस बीच इस आपराधिक मामले की पुलिस जांच अपनी रफ्तार से जारी रहेगी। जिन पत्रकारों की ओर से यह याचिका दायर की गई है, उनमें एक महिला पत्रकार और एक अन्य पुरुष पत्रकार शामिल हैं, जो ‘डिजी न्यूज’ नामक संगठन के संचालन से जुड़े हैं। अदालत ने फिलहाल कोई भी अंतरिम राहत प्रदान किए बिना इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 नवंबर की तारीख तय कर दी है।
क्या है पूरा विवाद? जंतर-मंतर के पास प्रदर्शन के दौरान शुरू हुआ था यह घटनाक्रम
यह पूरा विवाद गत 3 अक्टूबर को जंतर-मंतर तथा बूटा सिंह चौक के आसपास आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान उपजा था। घटना के समय महिला पत्रकार का आरोप था कि जब वह एक प्रदर्शनकारी कार्यकर्ता की पुलिस हिरासत का अपने मोबाइल पर वीडियो बना रही थीं, तब एसीपी विवेक भगत ने उनके साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार और यौन उत्पीड़न किया था। इस घटना के बाद दोनों पक्षों की ओर से आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया था।
एसीपी की शिकायत पर दर्ज हुई थी एफआईआर, वकीलों ने इसे बताया दबाव बनाने की रणनीति
दूसरी तरफ, एसीपी विवेक भगत की आधिकारिक शिकायत पर संसद स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में उक्त महिला पत्रकार और पुरुष पत्रकार के विरुद्ध एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं 221, 356(2) और 3(5) के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया था। उन पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने पुलिस अधिकारी के खिलाफ सार्वजनिक रूप से जातिसूचक टिप्पणियां कर उन्हें अपमानित किया है। वहीं, पत्रकारों की पैरवी कर रहे वकीलों का यह पुख्ता तर्क है कि एसीपी द्वारा दर्ज कराई गई यह एफआईआर केवल महिला पत्रकार को डराने-धमकाने तथा उनके द्वारा पुलिस अधिकारी के खिलाफ दर्ज कराई गई यौन उत्पीड़न की शिकायत (जिसकी जांच वर्तमान में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच कर रही है) को वापस लेने के लिए दबाव बनाने के नापाक मकसद से की गई है।
पुलिस पक्ष सुनने के बाद ही मेरिट पर होगी आगे की सुनवाई
मंगलवार को संपन्न हुई सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा की पीठ ने दिल्ली पुलिस और एसीपी विवेक भगत को नोटिस भेजकर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। अदालत ने जांच रोकने की मांग को खारिज करते हुए यह दोहराया कि पुलिस और प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सुनने के बाद ही इस मामले की सुनवाई इसके वास्तविक गुण-दोष (Merits) के आधार पर आगे बढ़ाई जाएगी।





