दिवाली के पावन पर्व पर मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए दक्षिणावर्ती शंख की स्थापना को माना जाता है बेहद शुभ, जीवन में आती है समृद्धि

नई दिल्ली: प्रकाश के महापर्व दिवाली के इस खास अवसर पर देश भर में माता लक्ष्मी और भगवान गणेश का स्वागत करने के लिए तरह-तरह के धार्मिक अनुष्ठान और उपाय किए जाते हैं। कोई घर में चांदी का सिक्का लाता है, तो कोई गोमती चक्र और कौड़ियां स्थापित करता है। हालांकि, बहुत कम लोग यह जानते हैं कि दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजन के समय दक्षिणावर्ती शंख की स्थापना करना अत्यंत फलदायी और शुभ माना जाता है। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, दक्षिणावर्ती शंख का सीधा संबंध माता लक्ष्मी से होता है। इसे घर के पूजा घर में पूरे विधि-विधान के साथ स्थापित करने से घर में सुख, शांति, वैभव और सकारात्मक ऊर्जा का permanent वास होता है। करियर में तरक्की, कारोबार में मुनाफा और उत्तम स्वास्थ्य के लिए इस शंख का पूजन बहुत खास माना जाता है। आइए जानते हैं कि इस शंख का क्या महत्व है और इसे कैसे स्थापित किया जाता है।
आखिर क्यों इतना दुर्लभ और खास माना जाता है दक्षिणावर्ती शंख? समुद्र मंथन से जुड़ा है इसका पौराणिक इतिहास
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दक्षिणावर्ती शंख को माता लक्ष्मी का अत्यंत प्रिय माना गया है। सामान्य शंख का मुख बाईं ओर खुला होता है, जबकि दक्षिणावर्ती शंख का मुख दाईं ओर होता है, जो इसे बेहद दुर्लभ और पवित्र बनाता है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक, शंख की उत्पत्ति समुद्र मंथन के दौरान हुई थी और इसी मंथन से मां लक्ष्मी भी प्रकट हुई थीं, इसलिए शंख को उनका सहोदर (भाई) भी माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के जानकारों का कहना है कि जिस घर या स्थान पर दक्षिणावर्ती शंख की नियमित और श्रद्धापूर्वक पूजा की जाती है, वहाँ कभी भी अन्न और धन की कमी नहीं होती तथा हमेशा बरकत बनी रहती है।
दिवाली की शाम दक्षिणावर्ती शंख स्थापित करने की सही और सरल विधि, ऐसे करें मां लक्ष्मी का पूजन
दीपावली की संध्या पर मां लक्ष्मी और गणेश जी के मुख्य पूजन के दौरान ही दक्षिणावर्ती शंख की स्थापना करना बेहद कल्याणकारी माना जाता है। इसके लिए सबसे पहले शंख को साफ और शुद्ध जल से अच्छी तरह धो लें। इसके बाद अपने पूजा स्थल पर एक साफ लाल या पीला वस्त्र बिछाकर उस पर शंख को आदर सहित स्थापित करें। शंख के ऊपर गंगाजल या शुद्ध जल छिड़कें और फिर उस पर रोली, अक्षत (चावल), चंदन और ताजे पुष्प अर्पित करें। मां लक्ष्मी के समक्ष शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें और शंख को चावल के ढेर या स्वच्छ वस्त्र पर सुशोभित करें।
दक्षिणावर्ती शंख की पूजा के दौरान करें इन विशेष मंत्रों का जाप, मां लक्ष्मी का मिलेगा आशीर्वाद
दिवाली की रात जब आप दक्षिणावर्ती शंख की पूजा कर रहे हों, तो माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए निम्नलिखित वैदिक मंत्रों का उच्चारण करना बहुत लाभकारी माना जाता है:
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ऊँ ह्रीं श्रीं नम: श्रीधरकरस्थाय पयोनिधिजातायं
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लक्ष्मीसहोदराय फलप्रदाय फलप्रदाय
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श्री दक्षिणावर्त्त शंखाय श्रीं ह्रीं नम:.
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ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः। इन दिव्य मंत्रों का सच्चे मन से जाप करने से साधक पर मां लक्ष्मी की असीम कृपा बरसती है और घर-परिवार में धन-धान्य की वृद्धि की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
घर के पूजा स्थल में किस दिशा और स्थान पर रखना चाहिए दक्षिणावर्ती शंख? इन नियमों का रखें खास ध्यान
वास्तु और धार्मिक परंपराओं के अनुसार, दक्षिणावर्ती शंख को हमेशा घर के पूजा घर में किसी पवित्र और स्वच्छ स्थान पर ही स्थापित करना चाहिए। इसे हमेशा लाल या पीले रंग के कपड़े पर रखना ही श्रेष्ठ माना जाता है। शंख को हमेशा साफ-सुथरा रखें और नियमित रूप से पूजा के समय इसका भी ध्यान रखें। ऐसी मान्यता है कि दक्षिणावर्ती शंख के भीतर थोड़े से अक्षत (चावल) या एक चांदी का सिक्का डालकर रखना बहुत शुभ होता है। इसके अलावा, शंख के पास किसी भी प्रकार की गंदगी या अनावश्यक वस्तुएं नहीं रखनी चाहिए और इसे कभी भी ऐसी जगह पर न रखें जहाँ किसी के पैर लगने की संभावना हो। दीपावली की रात की गई यह स्थापना आपके जीवन में ऐश्वर्य और अपार सफलता के द्वार खोल सकती है।





