छत्तीसगढ़: उग्रवाद प्रभावित दंतेवाड़ा में बन रहे आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए टाउनशिप

रायपुर। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में पुलिस आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए विशेष रूप से एक टाउनशिप विकसित कर रही है जहां उन्हें बेहतर जीवन जीने के लिए उनकी सुरक्षा के साथ-साथ कुशल प्रशिक्षण के लिए आवास प्रदान किया जाएगा। एक अधिकारी ने गुरुवार को कहा कि यह देश में अपनी तरह की पहली पहल है और कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले कुछ नक्सली भी टाउनशिप के निर्माण में शामिल हैं।
राज्य की राजधानी रायपुर से लगभग 400 किलोमीटर दूर स्थित दंतेवाड़ा बस्तर क्षेत्र के सबसे ज्यादा नक्सल प्रभावित जिलों में से एक है और यहां कई घातक माओवादी घटनाएं हुई हैं। उग्रवादियों को हिंसा छोड़ने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए जिला पुलिस ने आत्मसमर्पण और पुनर्वास अभियान ‘लोन वरातु’ (जिसे स्थानीय गोंडी बोली में आपके घर/गांव में वापसी कहा जाता है) के हिस्से के रूप में आत्मसमर्पण करने वालों की सुरक्षा के मद्देनजर टाउनशिप परियोजना शुरू की है। इनमें वो कैडर जो सबसे ज्यादा माओवादी प्रभावित इलाकों से ताल्लुक रखते हैं।
दंतेवाड़ा के पुलिस अधीक्षक अभिषेक पल्लव ने पीटीआई को बताया, ‘देश में पहली बार आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए इस तरह की बस्ती बन रही है। हम अगले साल 26 जनवरी को इसका उद्घाटन करने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि दंतेवाड़ा में पुलिस लाइन के सामने 39 एकड़ में विकसित की जा रही इस टाउनशिप में एक मनोरंजन केंद्र, योगा सहित जिम की जगह, प्राथमिक विद्यालय, प्राथमिक स्वास्थ्य के अलावा 108 एक बीएचके (बेडरूम-हाउस-रसोई) अपार्टमेंट होंगे।
इससे पहेल एसपी पल्लव ने बताया था कि अभियान के तहत, 381 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है जिसमें से 101 इनामी माओवादी थे। एसपी ने आगे कहा, ‘इनमें से 150 माओवादी ऐसे थे जो अपने गांव में रहने में खतरा महसूस कर रहे थे। इन आत्मसमर्पित माओवादियों के लिए देश का पहला टाउनशिप दंतेवाड़ा में बनाया जा रहा है। यहां 20 अलग-अलग चीजों की दुकान खोली जाएंगी और इन्हें ट्रेनिंग भी दी जाएगी।’






