ब्रेकिंग
HCL मलाजखंड और आईआईटी कानपुर की SATHEE पहल ने मलाजखंड में आयोजित किया करियर काउंसलिंग एवं जागरूकता स... गाजियाबाद में निषाद पार्टी का कार्यक्रम, काफी संख्या में कार्यकर्ता हुए शामिल कवर्धा में फर्जी डिजिटल पेमेंट का भंडाफोड़: फर्जी रिसीविंग दिखाकर नकद राशि ऐंठने वाले गिरोह पर एक्शन Bhilai News: भिलाई सेक्टर-2 में गटर की सफाई के दौरान मिला नवजात का शव, इलाके में सनसनी; जांच में जुट... Barwani News: बिजासन घाट में शिमला मिर्च से भरे मिनी ट्रक में लगी भीषण आग, कूदकर बची ड्राइवर की जान;... लाठीचार्ज के बाद भड़के डॉक्टर्स, सीनियर रेजिडेंट्स ने किया OPD का बहिष्कार; JDA का समर्थन MP High Court on Dacoity Act: जब प्रदेश में डकैत ही नहीं तो 45 साल पुराना एक्ट क्यों? हाईकोर्ट ने DG... भोपाल में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर अड़े इंटर्न डॉक्टर: कमला पार्क में धरना जारी, मिला कांग्रेस का... रतलाम में मॉडिफाइड साइलेंसरों पर गरजा पुलिस का बुलडोजर: 108 साइलेंसर कुचले, ₹1 लाख का जुर्माना वसूला Gwalior Achaleshwar Mandir: अचलेश्वर महादेव मंदिर की दानपेटी से निकली अनोखी चिट्ठियां, भक्त बोला- 'क...
देश

24 अगस्त को अफगानिस्तान मुद्दे पर चर्चा करेगी संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद

नई दिल्ली। अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद अफरा-तफरी का माहौल है। चुनिंदा देशों को छोड़कर अमेरिका, भारत और सऊदी अरब समेत अन्य देश या तो अपने दूतावासों को बंद कर अपने लोगों को वहां से निकाल चुके हैं या निकालने का काम जारी है। वहीं, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद  24 अगस्त को अफगानिस्तान मुद्दे पर चर्चा के लिए एक विशेष सत्र आयोजित करेगी।

अमेरिका ने 3,200 लोगों को निकाला

एफपी न्यूज एजेंसी के अनुसार अमेरिकी सेना युद्धग्रस्त देश से अबतक 3,200 लोगों को निकाल लिया है। वहीं, भारत भी अपने दूतावास के अधिकारियों समेत लगभग 500 लोगों को वापस ला चुका है,जबकि अभी भी कुछ भारतीयों के फंसे होने की संभावना, उन्हें भी वापस लाने का प्रयास किया जा रहा है। सरकारी सूत्रों ने बताया कि भारत ने अपने दूतावास को बंद नहीं किया है और स्थानीय कर्मचारी वहां कांसुलर सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।

महिलाओं को तलिबान का न्योता

तलिबान ने महिलाओं को सरकार में शामिल होने का न्योता दिया है। उन्हें इस्लामिक कानून के तहत अधिकार देने के साथ ही काम करने और पढ़ने की अनुमति देने का भरोसा दिलाया है। तालिबान ने कहा है कि वह किसी दूसरे देश को निशाना बनाने के लिए अपनी जमीन के इस्तेमाल की अनुमति नहीं देगा। इसके अलावा विदेशी सेनाओं के लिए काम करने वाले सैनिकों, अनुवादकों और ठेकेदारों के खिलाफ प्रतिशोध की भावना से काम नहीं करेगा।

काबुल में पसरा सन्नाटा

तलिबाैन के कब्जे के बाद राजधानी काबुल में वीरानी छाई हुई है। बाजार में सन्नाटा पसरा है, दुकानें और सरकारी प्रतिष्ठान बंद हैं। लोग डरे हुए हैं। सड़कों पर एके-47 और अन्य अत्याधुनिक हथियार लिए तालिबान के लड़ाके पहरा दे रहे हैं। लोगों को डर है कि अमेरिका समर्थित सरकार के दो दशक के शासन काल के दौरान दो आजादी और अधिकार उन्हें मिले थे, तालिबान के राज में वो सब खत्म हो जाएंगे।

यूएन को मानवाधिकार के लिए काम करने वाले अफगानियों की चिंता

अफगानिस्तान में मानवाधिकारों के लिए काम करने वाले सैकड़ों लोगों की सुरक्षा के लिए संयुक्त राष्ट्र ने चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बेसलेट के प्रवक्ता ने कहा कि रूपर्ट कालविल ने कहा कि हम विशेष रूप से उन हजारों अफगानों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं तो वहां मानवाधिकारों के लिए काम कर रहे हैं।

ग्लोबमास्टर ने पाकिस्तानी वायु क्षेत्र का नहीं किया इस्तेमाल

काबुल से भारतीय राजदूत और दूतावास में काम करने वाले कर्मचारियों को वायु सेना के मालवाहक विमान ग्लोबमास्टर से वापस लाया गया। भारत से अफगानिस्तान जाने के लिए सबसे सीधा रूट पाकिस्तान होते हुए है, लेकिन वायु सेना का विमान होने के नाते ग्लोबमास्टर ने पाकिस्तानी वायु क्षेत्र का इस्तेमाल नहीं किया। इसे खाड़ी क्षेत्र से ईरान होते हुए काबुल भेजा गया था और उसी रास्ते से वापस भी लौटा।

अफगान शरणार्थियों की मदद करें बाइडन: बुश

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज डब्ल्यू बुश ने अफगान शरणार्थियों को मदद पहुंचाने के लिए बाइडन सरकार से आग्रह किया है। बुश के शासनकाल में ही 11 सिंतबर 2001 को व‌र्ल्ड ट्रेड पर टावर पर हमला हुआ था। इसके बाद ही अमेरिका ने अफगानिस्तान पर हमला करते हुए तालिबान को खदेड़ दिया था।

प्रभावित होगी अफगानियों को निकालने की योजना

आस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्काट मारिसन ने कहा है कि उनकी सरकार काबुल से उतने अफगानियों नहीं निकाल पाएगी, जितना वह चाहते थे। 130 से अधिक नागरिकों और उनके परिवारों को अफगानिस्तान से निकालने के लिए आस्ट्रेलिया 250 सैन्यकर्मियों के साथ तीन परिवहन और हवा से हवा में ईंधन भरने वाले जेट भेज रहा है। दरअसल, आस्ट्रेलिया उन अफगानियों को भी निकालना चाहता है, जिन्होंने उसके सैनिकों और राजनयिकों के लिए दुभाषिए की भूमिका अदा की है।

Related Articles

Back to top button