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पर्यावरण संरक्षण मंडल ने माना, अरपा के जल स्तर में तेजी के साथ आ रही है गिरावट

बिलासपुर। पर्यावरण संरक्षण मंडल ने अपनी रिपोर्ट में इस बात की जानकारी दी है कि अरपा नदी में बेतहाशा हो रही रेत की खोदाई से जल स्तर में भारी गिरावट आने लगी है। अरपा के जल स्तर में आ रही गिरावट से अस्तित्व को लेकर खतरा उत्पन्न् हो गया है। राज्य शासन ने भी अपनी रिपोर्ट में अरपा नदी के जल स्तर में आ रही गिरावट को लेकर चिंता जताई है।

अरपा अर्पण महाभियान समिति ने अपने वकील के जरिए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर अरपा नदी में रेत की हो रही बेतहाशा खोदाई पर रोक लगाने और अरपा के संरक्षण व संवर्धन की दिशा में काम करने की मांग की है।

याचिकाकर्ता ने कहा है कि अरपा नदी में खनिज विभाग ने आधा दर्जन से अधिक रेत घाटों का संचालन ठेके के जरिए करा रहा है। रेत घाटों को ठेकेदारों को लीज पर दे दिया है। ठेकेदार द्वारा रेत खोदाई के लिए पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा बनाए गए नियमों व मापदंडों का सीधेतौर पर उल्लंघन किया जा रहा है। रेत की खोदाई के दौरान विभाग के अफसर भी नहीं रहते। विभागीय अधिकारी इस बात की भी जानकारी नहीं लेते कि मापदंडों के अनुस्र्प खोदाई हो रही है या नहीं। रेत की खोदाई में मापदंडों का पालन नहीं किया जा रहा है।

इससे नदी के स्वरूप बदलने का खतरा भी पैदा हो गया है। पर्यावरण को इससे भारी नुकसान की आशंका भी जताई है। जनहित याचिका की सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने राज्य शासन व पर्यावरण संरक्षण विभाग को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने का निर्देश दिया था। पर्यावरण संरक्षण विभाग व राज्य शासन ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। दोनों ने ही अरपा की बेतरतीब खोदाई से नदी के स्वरूप बदलने की आशंका जताने के साथ ही जल स्तर में तेजी के साथ आ रही गिरावट को लेकर भी चिंता जताई है।

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