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क्या सत्यपाल मलिक ही होंगे जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल

राष्ट्रपति द्वारा जम्मू-कश्मीर को केन्द्र शासित प्रदेश बनाने से राज्यपाल सत्यपाल मलिक की स्थिति कुछ अजीब हो गई है। नई व्यवस्था के तहत अब यहां राज्यपाल के पद को कम कर उपराज्यपाल का बना दिया गया है। इसके अलावा लद्दाख के तौर पर नया केन्द्र शासित प्रदेश अस्तित्व में आया है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या किसी राज्यपाल को उसकी सहमति के बिना उपराज्यपाल के रूप में पद अवनत किया जा सकता है?
केन्द्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए नए उपराज्यपालों की नियुक्ति संबंधी नई अधिसूचना जारी की जानी अभी बाकी है। ऐसा लगता है कि गृहमंत्री अमित शाह अभी एल.जी. के तौर पर काम करने के संबंध में सत्यपाल मलिक की सहमति का इंतजार कर रहे हैं। दूसरा, सरकार सत्यपाल मलिक को दोनों केन्द्र शासित प्रदेशों का राज्यपाल नहीं बनाना चाहती। हालांकि यह व्यवस्था कुछ समय तक जारी रखी जा सकती है लेकिन उसके बाद सरकार दो अलग-अलग एल.जी. बनाने के लिए उत्सुक है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर के केन्द्र शासित प्रदेश के रूप में परिवर्तित होने के बाद सेवा नियम तथा काफी सारा पेपर वर्क संसद में पारित कानून के अनुसार पूरा करना होगा।
देश में 5 केन्द्र शासित प्रदेश थे जिनकी संख्या अब 2 नए केन्द्र शासित प्रदेश बनने के बाद 7 हो गई है। अब राज्य के अधिकारियों के राज्य कैडर को यू.टी. कैडर अधिकारियों में मर्ज करना पड़ेगा जोकि एक पेचीदा कार्य है। यह एक अनोखा मामला है जिसमें किसी पूर्ण राज्य को 2 केन्द्र शासित प्रदेशों में बांटा गया है। ऐसा पिछले 70 साल में पहली बार हुआ है। इसके अलावा अब तक कई उपराज्यपालों को पदोन्नत कर राज्यपाल बनाया गया है लेकिन किसी भी राज्यपाल को कभी भी डिमोट कर एल.जी. नहीं बनाया गया। ऐसे में यह देखना होगा कि क्या मलिक एल.जी. के तौर पर काम करने के लिए राजी होंगे?
ऐसा भी प्रस्ताव है कि जब तक केन्द्रीय गृह मंत्रालय इस संबंध में नए नियम बनाकर आगामी आदेश जारी नहीं करता तब तक मलिक अपने वर्तमान पद पर बरकरार रह सकते हैं लेकिन निश्चित तौर पर 2 नए केन्द्र शासित प्रदेश बनाए जाने से कुछ गंभीर प्रशासनिक जटिलताएं पैदा हुई हैं।

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