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पीएम मोदी ने साधा कांग्रेस पर निशाना कोरिया को लेकर क्या था नेहरू का वो भाषण याद दिलाया

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को संसद में एक के बाद एक नेहरू का जिक्र कर कांग्रेस पार्टी पर हमला बोला। उन्होंने महंगाई को लेकर कांग्रेस पार्टी के सवाल पर कहा कि भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू कोरिया का उदाहरण दिया करते थे। बढ़ती महंगाई पर आलोचना से निपटने के लिए पीएम मोदी ने जवाहरलाल नेहरू के शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा, “देश के पहले पीएम ने कहा था कि कोरिया में अगर कुछ होता है, तो इसका असर यहां की कीमतों पर पड़ता है। कल्पना कीजिए कि तब कितनी गंभीर समस्या थी। लेकिन हम इस तरह हार नहीं मानते।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “कांग्रेस ने अपने ‘गरीबी हटाओ’ नारे के कारण कई चुनाव जीते लेकिन ऐसा करने में असफल रहे। फिर देश के गरीबों ने उन्हें वोट दिया। पंडित नेहरू ने कहा था कि कोरियाई युद्ध मुद्रास्फीति का कारण बना। उन्होंने कहा अमेरिका में किसी भी अशांति की वजह से महंगाई भी होती है।” पीएम ने कई बार नेहरू का नाम लेकर कांग्रेस पार्टी को घेरा। ऐसे में ये जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर जवाहर लाल नेहरू का वो कौन सा भाषण था जब उन्होंने कोरिया का जिक्र किया था।

क्या था नेहरू का वो भाषण?

नेहरू ने लाल किले की प्राचीर से दिए एक भाषण में कहा था कि कोरियाई युद्ध का असर भारत में खाद्य मुद्रास्फीति पर पड़ सकता है। ऐसा कहा जाता है कि नेहरू ने कई दफा अपने भाषणों में कोरिया का जिक्र किया था। ये सच है कि नेहरू ने कोरियाई युद्ध के असर का जिक्र अपने भाषण में किया था। लेकिन उस समय परिस्थिति कुछ और थी। ये रहा नेहरू का वो भाषण।

क्या था कोरियाई युद्ध

कोरियाई युद्ध 1950 से 1953 तक चला था। लेकिन इस युद्ध में दुनिया की तत्कालिक दो सबसे बड़ी महाशक्तियां अमेरिका और रूस औपचारिक रूप से जुड़े हुए थे। लिहाज कोरियाई युद्ध ने तीसरे विश्व युद्ध की आशंका को जन्म दे दिया था। इसके चलते पूरी दुनिया में व्यापार प्रभावित हुआ और आयात-निर्यात के मोर्चे पर काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा रहा था।

शीत युद्ध काल में लड़ा गया सबसे पहला और सबसे बड़ा युद्ध

युद्ध उत्तरी कोरिया से दक्षिणी कोरिया पर आक्रमण के साथ हुआ था। यह शीत युद्ध काल में लड़ा गया सबसे पहला और सबसे बड़ा संघर्ष था। एक तरफ उत्तर कोरिया था जिसका समर्थन कम्युनिस्ट सोवियत संघ तथा साम्यवादी चीन कर रहे थे, दूसरी तरफ दक्षिणी कोरिया था जिसकी रक्षा अमेरिका कर रहा था। यानी की पूरी दुनिया दो खेमे में बंट गई थी।

कैसे नेहरू ने दो गुटों में बटी दुनिया को दिया तीसरा विकल्प

नेहरू ने दो गुटों में बटी दुनिया को एक तीसरा विकल्प दिया और गुट निरपेक्षता की नीति अपनाई। उन्होंने उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया में जारी युद्ध को खत्म करने में एक मध्यस्थ के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

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