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हिजाब के भीतर बिगड़ेगा सपा का खेल? समझें क्या है पीएम मोदी की कोशिश; फिर ‘चुपचाप कमल छाप’ का मैसेज

कानपुर  उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के तहत सोमवार को 9 जिलों की 55 सीटों पर वोटिंग हो रही है। दूसरे चरण के मतदान के तहत पीएम मोदी ने कानपुर में जनसभा की और समाजवादी पार्टी पर जमकर बरसे। इस दौरान पीएम मोदी ने एक बार फिर मुस्लिम महिलाओं से बीजेपी के पक्ष में वोट की अपील की। पीएम ने उन्हें तीन तलाक से मुक्ति दिलाने और इससे उनके जीवन में आए बदलाव की याद दिलाते हुए कहा कि चुपचाप कमल के निशान पर वोट करें। एक तरफ जहां देश में हिजाब को लेकर बवाल मचा हुआ है तो दूसरी तरफ पीएम मोदी की ओर से लगातार मुस्लिम महिलाओं को साधने की कोशिश को लेकर सवाल उठ रहा है कि क्या ‘हिजाब के पर्दे’ में रहकर मुस्लिम महिलाएं बीजेपी को वोट देकर सपा का समीकरण बिगाड़ सकती हैं?

पीएम मोदी ने पहले चरण के रुझान बताते हुए कहा, ”यूपी में दूसरे चरण का जो ट्रेंड आया है, और पहले चरण की जो वोटिंग हुई है, उसने चार बातें बहुत साफ कर दी हैं। पहला- भाजपा की सरकार, योगी जी की सरकार फिर आ रही है, पूरे जोर-शोर से आ रही है।  दूसरा- हर जाति के लोग, हर वर्ग के लोग बिना बंटे, गांव के लोग-शहर के लोग बिना बंटे, बिना किसी भ्रम में पड़े, एकजुट होकर अपने यूपी के तेज विकास के लिए वोट कर रहे हैं। तीसरा- हमारी माताओं-बहनों-बेटियों ने बीजेपी की जीत का झंडा खुद उठा लिया है। चौथा- मेरी मुस्लिम बहनें, चुपचाप, बिना किसी शोर-शराबे के, मन बनाकर मोदी को आशीर्वाद देने के लिए घर से निकल रही हैं। हमारी मुस्लिम महिलाएं-बहनें-बेटियां जानती हैं कि जो सुख-दुख में काम आता है, वही अपना होता है।”

पीएम मोदी ने कहा, ”जब यूपी में अपराधी कंट्रोल में आए तो इसका लाभ मुस्लिम बहन बेटियों को भी मिला। मुझे खुशी है कि स्कूल-कॉलेजों में मुस्लिम बेटियों की संख्या बढ़ रही है। मेरा निरंतर प्रयास रहा है कि कैसे अपनी मुस्लिम बहन-बेटियों का जीवन मैं आसान बना सकूं। आप कल्पना कर सकते हैं, हर पुरुष कल्पना करें, मुस्लिम पुरुष भी कल्पना करें, मायके से यदि औरत खाली हात लौटती है तो फटाक से तीन तलाक दे दिया जाए, ससुराल से पत्नी बाइक लेकर नहीं आई तो तीन तलाक दे दिया जाए। सोने का चेन लेकर नहीं आई तो तीन तलाक दे दो। घड़ी, मोबाइल नहीं आया तो तीन तलाक दे दो, कोई भी छोटी से बीत पर तालक, तलाक, तलाक कहकर मुस्लिम महिलाओं का पूरा जीवन बर्बाद हो जाता था।

सिर्फ उस मुस्लिम महिला का नहीं, उस बेटी के पिता और मां का दर्द समझिए, जब बेटी वापस चली आए तो मन पर क्या गुजरती होगी। वह हमेशा इस डर में जीती थी कि कहीं बेटी का तीन तलाक ना हो जाए। आज देश की हर मुस्लिम बहन बेटी के पास तीन तलाक के खिलाफ कानून की सुरक्षा हमने दी है। एक रिपोर्ट में सामने आया है कि तीन तलाक का कानून बनने के बाद यूपी की हजारों बेटियों का घर तबाह होने से बचा है। मेरी बेटियां और उनके मायके वाले बच गए हैं।”

क्या है बीजेपी की रणनीति

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीजेपी को पिछले तीन चुनावों में महिलाओं के काफी वोट मिले हैं। जनधन खाते, प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना के तहत एलपीजी सिलेंडर, मुफ्त राशन जैसी योजनाओं का सीधा लाभ महिलाओं को मिला है, जिनपर घर चलाने की जिम्मेदारी होती है। हिंदुओं की तरह मुस्लिम महिलाओं को भी इन योजनाओं का लाभ मिला है और पार्टी को उम्मीद है कि कुछ हद तक मुस्लिम महिलाओं के मन में पार्टी के प्रति एक नरम रवैया पैदा हुआ है। तीन तलाक के खिलाफ कानून को लेकर  तो बड़ी संख्या में मुखर होकर पढ़ी-लिखी मुस्लिम महिलाओं ने बीजेपी को शुक्रिया अदा किया था। पार्टी की कोशिश ऐसी मुस्लिम महिला मतदाताओं से पार्टी  के पक्ष में मतदान कराने की कोशिश है।

आंशिक बदलाव का भी बड़ा हो सकता है असर

असल में इस बार सपा को एकमुस्त मुस्लिम वोट मिलने की बात कही जा रही है। पार्टी मुस्लिम, यादव के परंपरागत वोटर्स के अलावा पिछड़ों पर भी दांव खेल रही है। ऐसे में सपा की काट निकालने के लिए  बीजेपी ने भी एक नया वोट बैंक जोड़ने की कोशिश की है। माना जाता है कि बीजेपी को मुस्लिम वोट बेहद कम मिलते हैं। पार्टी इसके लिए कभी अधिक कोशिश भी करती नहीं दिखती है। हालांकि, पार्टी को उम्मीद है कि यदि कुछ फीसदी मुस्लिम महिलाएं भी पार्टी के पक्ष वोट करती हैं तो यह सपा को सीधा नुकसान होगा और भगवा दल को परंपरागत वोटर्स के अलावा एक नया वर्ग मिलेगा, जो करीबी मुकाबले वाले सीटों पर बड़ा असर डाल सकते हैं।

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