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द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म ने कश्मीरी पंडितों पर हुए अत्याचार को बखूबी से बताया : पनुन कश्मीर

जम्मूपनुन कश्मीर ने नरसंहार व क्रूरता रोकने के लिए कानून लाने की वकालत की है। इस कानून से कश्मीर में नरसंहार करने वालों पर से परदा हट सकेगा व अपराधी लोग जेलों के पीछे जा सकेंगे। बुधवार को संवाददाता सम्मेलन में महासचिव कुलदीप रैना ने ‘द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म पर चर्चा की जिसमें घाटी में कश्मीरी पंडितों पर हुए अत्याचार को बखूबी से बताया गया है।

रैना ने कहा कि घाटी में कश्मीरी पंडितों को एक कठिन दौर से गुजरना पड़ा। फिल्म के जरिए लोगों में सच सामने आया है और प्रधानमंत्री ने भी इसका जिक्र किया है। लेकिन हम कहना चाहेंगे कि पनुनकश्मीर समय-समय पर आवाज बुलंद करता रहा है कि घाटी में नरसंहार हुआ। इस पूरे क्रम की जांच कराने के लिए पुनन कश्मीर ने सरकार को जेनोसाइड एंड एट्रोसिटीज बिल का ड्राफ्ट पेश किया। हम गुजारिश करते हैं कि सरकार इस बिल को स्वीकार करते हुए इसे संसद में पेश करे। ताकि पारित होने के बाद नरसंहार व क्रूरता रोकने वाला कानून बन सके। इससे ही कश्मीरी पंडितों को इंसाफ मिल सकेगा जोकि नरसंहार व क्रूरता के कारण ही आज घाटी से दूर हो चुके हैं।

कुलदीप रैना ने कहा कि अब सारी राजनीति खत्म होनी चाहिए और कश्मीरी पंडितों के साथ इंसाफ होना चाहिए। 1989 का दौर कश्मीरी पंडित समाज के लिए बहुत ही कठिन था। घाटी में ऐसा वातावरण बनाया गया कि कश्मीरी पंडित खतरे में आ गया। इन लोगों पर हमले शुरू हो गए और कई कश्मीरी पंडितों को अपनी जानें गंवानी पड़ी। कश्मीरी पंडित लोगों को अपना घर संपति सब घाटी में छोड़कर पलायन करने पर मजबूर होना पड़ा था। आज कश्मीरी पंडित सम्मान के साथ घाटी जाना चाहते हैं। लेकिन इससे पहले वो लोग जेलों में जाने चाहिए जिन्होंने घाटी में वातावरण को खराब कर कश्मीरी पंडितों पर जुल्म किए थे, उनको विस्थापन करने के लिए मजबूर किया था।

पुनन कश्मीर ने कहा कि फिल्म कश्मीर फाइल्स ने कश्मीर का सही चित्रण किया है और कश्मीरी पंडितों की वास्तिक तस्वीर को फिल्म में उतारा है। इसके लिए पुनन कश्मीर फिल्म निर्माता की सराहना करता है।

बैठक में प्रधान विरेंद्र रैना ने कहा कि कश्मीरी पंडितों पर जो जाति संहार किया गया, की तस्वीर इस फिल्म में साफ दिखती हैं। यह बहुत ही बेहतर फिल्म है जिसके जरिए देश के लोग ही नही , दुनिया के सामने सच्चाई आई है। हमारी मांग रहेगी कि कश्मीरी फाइल्स को आस्कर पुरस्कार प्राप्त होना चाहिए।

विरेंद्र रैना ने कहा कि 1989 का दौर कश्मीरी पंडितों के लिए बहुत कठिन था, जब घाटी में सारा वातावरण कश्मीरी पंडितों के लिए बनाया गया। ऐसे में कश्मीरी पंडितों को घाटी छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। कई कश्मीरी पंडितों को अपनी जानें देनी पड़ी। घाटी में जो जाति संहार हुआ, को आज सभी को मानना होगा और कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास की दिशा में काम करना होगा। बैठक में ओपेंद्र कौल, समीर भट्ट, पीके भान, केवल कृष्ण, समीर मट्टू, संजय कौल आदि उपस्थित थे।

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