ब्रेकिंग
HCL मलाजखंड और आईआईटी कानपुर की SATHEE पहल ने मलाजखंड में आयोजित किया करियर काउंसलिंग एवं जागरूकता स... गाजियाबाद में निषाद पार्टी का कार्यक्रम, काफी संख्या में कार्यकर्ता हुए शामिल कवर्धा में फर्जी डिजिटल पेमेंट का भंडाफोड़: फर्जी रिसीविंग दिखाकर नकद राशि ऐंठने वाले गिरोह पर एक्शन Bhilai News: भिलाई सेक्टर-2 में गटर की सफाई के दौरान मिला नवजात का शव, इलाके में सनसनी; जांच में जुट... Barwani News: बिजासन घाट में शिमला मिर्च से भरे मिनी ट्रक में लगी भीषण आग, कूदकर बची ड्राइवर की जान;... लाठीचार्ज के बाद भड़के डॉक्टर्स, सीनियर रेजिडेंट्स ने किया OPD का बहिष्कार; JDA का समर्थन MP High Court on Dacoity Act: जब प्रदेश में डकैत ही नहीं तो 45 साल पुराना एक्ट क्यों? हाईकोर्ट ने DG... भोपाल में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर अड़े इंटर्न डॉक्टर: कमला पार्क में धरना जारी, मिला कांग्रेस का... रतलाम में मॉडिफाइड साइलेंसरों पर गरजा पुलिस का बुलडोजर: 108 साइलेंसर कुचले, ₹1 लाख का जुर्माना वसूला Gwalior Achaleshwar Mandir: अचलेश्वर महादेव मंदिर की दानपेटी से निकली अनोखी चिट्ठियां, भक्त बोला- 'क...
छत्तीसगढ़

प्रदेश में पहली बार डिसॉल्वेबल स्टेंट की मदद से दिल का दौरा पड़े पीड़ित का हुआ इलाज, जानिए क्या हैं इस नई तकनीक के फायदे…

 रायपुर. प्रदेश में पहली बार एक आधुनिक डिसॉल्वेबल स्टेंट की मदद से दिल के दौरे से 39 वर्षीय व्यक्ति को बचाया गया. प्रारंभिक उपचार के बाद मरीज को आगे की जांच और उपचार के लिए एनएच एमएमआई नारायणा सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल आया. जहां डॉ. सुमंत शेखर पाढ़ी ने जांच किया और एंजियोग्राफी का सुझाव दिया, जिसमें एल.ए.डी (हृदय की सबसे बड़ी धमनी) में 90% रुकावट की पाई गई.

डॉ. सुमंत शेखर पाढ़ी, सीनियर कंसल्टेंट – इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी (एनएच एमएमआई नारायणा सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, रायपुर) ने कहा, चूंकि मरीज की उम्र कम थी और अन्य तकलीफ नहीं थी, इसलिए हमने आमतौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले मेटल स्टेंट के बजाय एक डिसॉल्वेबल स्टेंट का उपयोग करने का फैसला लिया. डिसॉल्वेबल स्टेंट उन्हें बेहतर और दीर्घकालिक परिणाम देगा. हालांकि, नए डिसॉल्वेबल स्टेंट को इम्प्लांट करने के लिए मेटल स्टेंट की तुलना में एक अलग ही स्टेंट प्रत्यारोपण तकनीक की आवश्यकता होती है.

वहीं डॉ सुनील गौनियाल (सीनियर कंसल्टेंट – इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी) ने बताया कि, “इंट्रावास्कुलर अल्ट्रासाउंड के साथ उपचार की योजना बनाई गई थी. इंट्रावास्कुलर अल्ट्रासाउंड कोरोनरी धमनी के अंदरूनी हिस्से को देखने के लिए एक उन्नत इमेजिंग तकनीक है. इस तरह की उन्नत इमेजिंग तकनीक स्टेंट की उचित स्थिति निर्धारित करने में मदद करती है, इसके लिए ऑपरेटर द्वारा अधिक कौशल की आवश्यकता होती है.

बता दें कि, 11 मार्च को कार्डियोलॉजिस्ट की एक टीम डॉ सुमंत शेखर पाढ़ी (सीनियर कंसल्टेंट – इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी), डॉ. सुनील गौनियाल (सीनियर कंसल्टेंट – इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी), डॉ. स्नेहिल गोस्वामी (कंसल्टेंट – इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी) और डॉ. जिनेश जैन (कंसल्टेंट – इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी) द्वारा प्रक्रिया को सफलतापूर्वक किया गया और 13 मार्च को मरीज को डिस्चार्ज कर दिया गया.

मरीज ने अपना अनुभव बताते हुए कहा, मैं ठीक हूं और इस उपचार की मदद से नियमित जीवन जीने में सक्षम हूं. जब मुझे नए डिसॉल्वेबल स्टेंट के बारे में पता चला, तो मैं डर गया, लेकिन जल्द ही इसके लाभ का एहसास हुआ.

नवीन शर्मा, फैसिलिटी डायरेक्टर, एनएच एमएमआई नारायणा सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, रायपुर ने कहा, यह हमारे राज्य में पहली बार हुआ है कि एक डिसॉल्वेबल स्टेंट का इस्तेमाल किया गया. डॉ. एस.एस. पाढ़ी ऐसी तकनीकों के विशेषज्ञों में से एक हैं.

Related Articles

Back to top button