आधार कार्ड और वोटर आईडी जन्मतिथि का अंतिम प्रमाण नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

बिलासपुर (छत्तीसगढ़): पंचायत चुनाव में प्रत्याशियों की उम्र को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि आधार कार्ड या वोटर आईडी कार्ड (मतदाता पहचान पत्र) में दर्ज जन्मतिथि को किसी व्यक्ति की वास्तविक आयु का अंतिम और पुख्ता प्रमाण नहीं माना जा सकता। उच्च न्यायालय ने दो टूक व्यवस्था दी है कि किसी भी नागरिक की उम्र के निर्धारण में प्राथमिक शिक्षा के रिकॉर्ड और विशेष रूप से 10वीं (मैट्रिक) की अंकसूची को ही सबसे अधिक विश्वसनीय और विधिक साक्ष्य माना जाएगा।
📜 क्या है बलरामपुर सरपंच चुनाव का पूरा मामला: नामांकन के समय उम्र पर उठा विवाद
मामले की पृष्ठभूमि और दस्तावेजों की पड़ताल:
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ग्राम पंचायत कृष्णानगर का विवाद: यह पूरा प्रकरण बलरामपुर जिले के जनपद पंचायत बलरामपुर अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत कृष्णानगर का है।
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दस्तावेजों में विसंगति: कृष्णानगर की सरपंच जसिला तिथियो के कक्षा पहली से लेकर 10वीं (मैट्रिक) तक के सभी शैक्षणिक दस्तावेजों में उनकी जन्मतिथि 12 अप्रैल 2004 दर्ज पाई गई।
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उम्र सीमा का उल्लंघन: पंचायती राज नियमों के अनुसार, चुनाव में नामांकन दाखिल करने के समय प्रत्याशी की न्यूनतम आयु 21 वर्ष पूरी होनी अनिवार्य है।
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अपात्रता का आधार: शैक्षणिक प्रमाण पत्रों के आधार पर नामांकन दाखिले के समय उनकी आयु 21 वर्ष पूर्ण नहीं हो रही थी, जबकि अन्य पहचान पत्रों में भिन्न तिथि का उल्लेख कर चुनाव लड़ा गया था। इसी विसंगति को लेकर मामला हाईकोर्ट की दहलीज तक पहुंचा।





