Dantewada Tourism News: बस्तर की बदलती तस्वीर, डेनमार्क से पहली बार दंतेवाड़ा के झिरका पहुंचे चार विदेशी पर्यटक

दंतेवाड़ा: छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल की बदलती हुई और खूबसूरत तस्वीर अब न केवल देश के भीतर बल्कि विदेशों में भी अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाने लगी है। क्षेत्र से नक्सलवाद के प्रभाव के कम होने और पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के बाद अब विदेशी सैलानी भी दक्षिण बस्तर के प्राकृतिक सौंदर्य और यहां की अनूठी संस्कृति की ओर खिंचे चले आ रहे हैं। इसका एक जीवंत और ताजा उदाहरण दंतेवाड़ा जिले के झिरका गांव में देखने को मिला, जहाँ डेनमार्क से आए चार विदेशी पर्यटकों ने पहली बार कदम रखा और ग्रामीण पर्यटन के इस सफर का हिस्सा बने।
ग्रामीण और जनजातीय पर्यटन को मिल रही है नई दिशा, स्थानीय ग्रामीणों ने गर्मजोशी के साथ किया विदेशी मेहमानों का स्वागत
जिले में ग्रामीण तथा जनजातीय पर्यटन को प्रोत्साहित करने की दिशा में इस घटना को एक बहुत बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। झिरका गांव में स्थित प्रसिद्ध एवं मनोरम झारालावा जलप्रपात के क्षेत्र में जब डेनमार्क के ये सैलानी पहुंचे, तो स्थानीय पर्यटन समिति के सदस्यों और वहां के ग्रामीणजनों ने उनका बेहद आत्मीयता और उत्साह के साथ पारंपरिक स्वागत किया।
विदेशी मेहमानों ने चखा बस्तर की प्रसिद्ध चापड़ा चटनी का स्वाद, महुआ की पारंपरिक निर्माण प्रक्रिया को भी करीब से समझा
डेनमार्क से आए इन पर्यटकों ने न केवल झिरका की मनमोहक प्राकृतिक छटा का आनंद लिया, बल्कि बस्तर की अत्यंत समृद्ध जनजातीय संस्कृति, पारंपरिक व्यंजनों और ग्रामीण जीवनशैली को भी बेहद करीब से जानने का अवसर प्राप्त किया। उनके लिए यह पूरा भ्रमण केवल प्राकृतिक नज़ारों को देखने तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि बस्तर की प्राचीन परंपराओं को समझने का एक यादगार अनुभव बन गया। इस यात्रा के दौरान पर्यटकों ने बस्तर के प्रसिद्ध पारंपरिक व्यंजन यानी ‘चापड़ा चटनी’ के बनाए जाने की पूरी विधि को अपनी आँखों से देखा और ग्रामीणों से इसके इतिहास की जानकारी ली। इसके साथ ही, उन्होंने चापड़ा चटनी के अनूठे स्वाद का लुत्फ भी उठाया। इसके अलावा विदेशी मेहमानों ने पूरे गांव का भ्रमण कर स्थानीय निवासियों के रहन-सहन और पारंपरिक गतिविधियों का अवलोकन किया। उन्होंने ग्रामीण स्तर पर महुआ से जुड़ी पारंपरिक निर्माण प्रक्रिया को भी समझा और बस्तर की जनजातीय जीवनशैली में महुआ के सामाजिक व सांस्कृतिक महत्व की गहरी जानकारी हासिल की।
नक्सलवाद के खात्मे के बाद झिरका में विदेशी सैलानियों का यह पहला आगमन, पर्यटन मानचित्र पर उभर रहा है क्षेत्र
झिरका गांव में पहली बार चार विदेशी पर्यटकों का पहुँचना इस बात का प्रमाण है कि क्षेत्र में ग्रामीण पर्यटन की संभावनाएं तेजी से परवान चढ़ रही हैं। झारालावा जलप्रपात का प्राकृतिक सौंदर्य, चहुंओर फैली हरियाली, लजीज स्थानीय व्यंजन और बस्तर के आदिवासियों की विशिष्ट परंपराएं इस पूरे क्षेत्र को पर्यटन के लिहाज से बेहद खास बनाती हैं।
पर्यटन के विस्तार से स्थानीय युवाओं और महिला समूहों को मिलेंगे रोजगार और स्वरोजगार के नए और बेहतरीन अवसर
प्रशासन और स्थानीय समितियों द्वारा की जा रही इस तरह की सकारात्मक पहलों से दंतेवाड़ा के उन तमाम अनछुए प्राकृतिक स्थलों को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने की पूरी उम्मीद है, जो अब तक मुख्यधारा के पर्यटन मानचित्र पर अधिक चर्चित नहीं हो पाए थे। इस प्रकार के ग्रामीण पर्यटन के विस्तार से स्थानीय युवाओं, महिला स्व-सहायता समूहों और पर्यटन समितियों के लिए आने वाले दिनों में रोजगार तथा स्वरोजगार के ढेरों नए रास्ते खुलने की प्रबल संभावनाएं बन रही हैं।





