अर्नब चक्रवात के कारण हुई भारी बारिश और तेज हवाओं से फसलों को पहुंचे नुकसान का जायजा, प्रभावित किसानों को राहत देने के निर्देश

जांजगीर-चांपा: छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में अर्नब चक्रवात के प्रभाव से हुई बेमौसम बारिश और तेज आंधी-तूफान के कारण फसलों को हुए नुकसान की भरपाई और प्रभावित किसानों को समय पर राहत राशि पहुँचाने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। कलेक्टर के स्पष्ट निर्देशों के बाद कृषि एवं राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने संयुक्त रूप से मैदान में उतरकर प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया है। कृषि विभाग के उप संचालक ने राजस्व अमले के साथ मिलकर नवागढ़, पामगढ़ और अकलतरा तहसील के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया और किसानों को शासन के निर्धारित नियमों के तहत ‘आरबीसी 6-4’ (RBC 6-4) के प्रावधानों के अंतर्गत सहायता राशि मिलने का भरोसा दिलाया है।
कलेक्टर जन्मेजय महोबे की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक, अधिकारियों को संवेदनशीलता के साथ फसल क्षति का सटीक आकलन करने के आदेश
चक्रवात अर्नब की वजह से खेतों में खड़ी और कटी हुई फसलों को हुए नुकसान को लेकर जिला कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने प्रशासनिक अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई थी। बैठक में सभी अनुविभागीय अधिकारियों (SDM), तहसीलदारों और कृषि विभाग के मैदानी अमले को यह सख्त निर्देश दिए गए थे कि वे पूरी संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करें तथा फसल क्षति का वास्तविक एवं पारदर्शी आकलन तैयार करें, ताकि किसी भी पात्र किसान को सहायता से वंचित न रहना पड़े।
सिंचित धान फसल पर प्रति हेक्टेयर 66 हजार और असिंचित पर 44 हजार रुपये का मुआवजा, जल निकासी की दी जा रही सलाह
कृषि विभाग के उप संचालक राकेश शर्मा ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि शासन के नियमानुसार यदि किसानों की फसल को प्राकृतिक आपदा से नुकसान पहुंचता है, तो सिंचित धान की फसल के लिए प्रति हेक्टेयर 66 हजार रुपये और असिंचित धान की फसल के लिए 44 हजार रुपये तक का मुआवजा दिए जाने का प्रावधान है। हालांकि, राहत की बात यह है कि जांजगीर-चांपा जिले में अभी तक फसल कटाई के बाद अनाज भीगने का एक भी मामला सामने नहीं आया है। फिर भी, लगातार हो रही बारिश और तेज हवा के कारण खेतों में फसल के लेटने से कटाई के दौरान कुछ कठिनाइयों की आशंका जरूर जताई जा रही है। विभाग द्वारा किसानों को लगातार यह सलाह दी जा रही है कि यदि वे फसल काट चुके हैं, तो उसे तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दें और खेतों में जमा अतिरिक्त पानी की निकासी तुरंत सुनिश्चित करें। इसके अलावा, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ उठाने के लिए किसान आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर 14447 पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
धान खरीदी प्रक्रिया और डिजिटल क्रॉप सर्वे के सत्यापन के लिए 1 से 5 नवंबर तक आयोजित हो रही हैं विशेष ग्राम सभाएं
दूसरी ओर, आगामी धान खरीदी प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से कलेक्टर ने ‘एग्रीस्टेक रजिस्ट्री’ (Agristack Registry) में पंजीकृत किसानों और डिजिटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से दर्ज फसल विवरण के सत्यापन की तैयारियों की भी गहन समीक्षा की है। जिलेभर में 1 से 5 नवंबर के बीच विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया जा रहा है, जिनमें पंजीकृत किसानों की सूची और उनके खसरों में दर्ज फसल के ब्योरे का खुलेआम वाचन किया जा रहा है। इसके साथ ही, धान बेचने के लिए पंजीकृत किसानों और उनके भू-अभिलेखों की सूचियां ग्राम पंचायतों के आधिकारिक सूचना पट्ट तथा अन्य सार्वजनिक स्थलों पर चस्पा की गई हैं, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
ग्राम सभाओं में मिलने वाली दावा-आपत्तियों का 6 से 10 नवंबर के बीच होगा निराकरण, किसानों को दी जाएगी पूरी जानकारी
प्रशासनिक निर्देशों के अनुसार, इन विशेष ग्राम सभाओं के दौरान किसानों से प्राप्त होने वाली सभी प्रकार की दावा-आपत्तियों को संबंधित समितियों में एकत्र किया जाएगा। इसके उपरांत, आगामी 6 से 10 नवंबर के बीच इन सभी प्रकरणों का समयबद्ध तरीके से विधिवत निराकरण किया जाएगा। समस्याओं का समाधान होने के बाद इसकी आधिकारिक जानकारी सीधे संबंधित किसानों को उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि वे बिना किसी परेशानी के अपनी उपज सुगमता से बेच सकें।





