गुजरात में सख्त शराबबंदी के नियमों को धत्ता बताते हुए राजकोट के एक होटल में आयोजित हुई हाई-प्रोफाइल शराब पार्टी, मची राजनीतिक हलचल

राजकोट: गुजरात राज्य में कागजों पर भले ही सख्त शराबबंदी लागू हो, लेकिन आए दिन होने वाली ऐसी घटनाएं प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोल देती हैं। हाल ही में राजकोट शहर के एक प्रमुख होटल में एक बड़ी और हाई-प्रोफाइल शराब पार्टी का आयोजन किया गया, जिसने पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी है। इस गुप्त पार्टी में राजकोट और पड़ोसी जिले मोरबी के जाने-माने बिल्डर्स, प्रतिष्ठित डॉक्टर, बड़े उद्योगपति और प्रमुख ज्वैलर्स समेत कुल 76 रसूखदार लोग शामिल हुए थे। यह आयोजन शहर के प्रसिद्ध सरज़ा होटल में किया गया था। इस पार्टी में शामिल अधिकांश लोग पाटीदार समुदाय से ताल्लुक रखते हैं, जिसके चलते इस घटना के सामने आने के बाद पाटीदार समाज के भीतर ही शराबबंदी के मुद्दे पर दो अलग-अलग और विरोधी विचार खड़े हो गए हैं।
पाटीदार नेता गणपत पटेल ने समाज में बढ़ती बुराइयों पर जताई गहरी चिंता, युवाओं में नशे की लत को बताया खतरनाक
विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस हाई-प्रोफाइल शराब पार्टी के खुलासे के बाद समाज के कई जिम्मेदार नेताओं ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। जाने-माने पाटीदार नेता गणपत पटेल ने एक सार्वजनिक मंच से अपनी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए समाज में पैर पसार रही शराब की बुराई पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि भले ही पाटीदार समुदाय आर्थिक और व्यावसायिक रूप से काफी समृद्ध हो रहा है, लेकिन इसके साथ ही कुछ सामाजिक कुरीतियां भी समाज के भीतर प्रवेश कर रही हैं। समुदाय के युवाओं में तेजी से बढ़ रही शराब की लत पर चिंता जताते हुए उन्होंने आह्वान किया कि इस सामाजिक विकृति को रोकने के लिए अब समाज के लोगों को खुद आगे आना होगा।
शराब पार्टी के समर्थन में उतरे बिल्डर एसोसिएशन के उपाध्यक्ष, गुजरात की शराबबंदी नीति पर उठाए तीखे सवाल
एक तरफ जहां इस पार्टी की आलोचना हो रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ पाटीदार नेता और उद्यमी इस पार्टी में पकड़े गए लोगों के समर्थन में भी खुलकर सामने आ गए हैं। इन लोगों ने राज्य की मौजूदा शराबबंदी नीति के औचित्य पर ही गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। राजकोट बिल्डर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष ध्रुविक पटेल ने एक विवादित बयान देते हुए गुजरात की तुलना सीधे अफगानिस्तान से कर डाली और शराबबंदी का कड़ा विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि जब दूसरे राज्यों या देशों से आने वाले बाहरी लोग गुजरात आकर आसानी से शराब का सेवन कर सकते हैं, तो फिर गुजरात के मूल निवासी अपने ही राज्य में शांति से शराब क्यों नहीं पी सकते? उन्होंने राजकोट की धरती से ही प्रदेश में लागू शराबबंदी को पूरी तरह समाप्त करने के लिए एक लंबी लड़ाई छेड़ने की बात कही।
ज्योति तिलवा और परशोत्तम पिपलिया की प्रतिक्रिया, कहा— किसी की हत्या नहीं हुई, मीडिया इस मामले को दे रहा है तूल
इस पूरे विवाद के बीच, उमियाधाम सिदसार की पूर्व महिला अध्यक्ष ज्योति तिलवा ने सोशल मीडिया पर अपनी राय रखते हुए कहा कि पार्टी में शामिल लोगों ने केवल शराब का सेवन किया था, उन्होंने किसी की कोई हत्या नहीं की है। उन्होंने यह भी दावा किया कि गुजरात के विभिन्न इलाकों में बने फार्महाउसों में इस तरह की शराब पार्टियां आम तौर पर हर रोज आयोजित होती हैं। वहीं दूसरी ओर, परशोत्तम पिपलिया ने इस पूरे प्रकरण पर तीखा रुख अपनाते हुए आरोप लगाया कि मीडिया जानबूझकर इस मुद्दे को जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है, क्योंकि इस पार्टी में शामिल होने वाले लोग पाटीदार समुदाय से संबंध रखते हैं।
शराबबंदी हटाने की मांग और वैचारिक मतभेदों के बीच सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस, आने वाले दिनों में और गरमा सकता है विवाद
राजकोट के इस बहुचर्चित शराब कांड के बाद पाटीदार समाज के भीतर साफ तौर पर दो अलग-अलग विचारधाराएं और धाराएं बनती दिखाई दे रही हैं। एक तरफ गणपत पटेल जैसे प्रबुद्ध नेता समाज के युवाओं को नशे की चपेट से बचाने और संस्कृति को बचाने की बात कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ कुछ लोग खुलकर राज्य में शराबबंदी को उखाड़ फेंकने की मांग उठा रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी इस गंभीर विषय को लेकर बयानबाजी और तीखी बहस का दौर जारी है। जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह वैचारिक मतभेद और अधिक तूल पकड़ सकता है तथा इस पर राजनीतिक गलियारों में भी बड़ी सरगर्मी देखने को मिल सकती है।





