Dilip Puri Funeral Barmandal Dhar: शहीद टीआई दिलीप पुरी का पैतृक गांव बरमंडल में राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार, परिजनों ने की सीबीआई जांच की मांग

देवास: मध्य प्रदेश के देवास जिले में अवैध शराब से भरे एक ट्रक की चेकिंग के दौरान वाहन से कुचलकर अपनी जान गंवाने वाले कर्तव्यनिष्ठ खातेगांव थाना प्रभारी (TI) दिलीप पुरी की शहादत के बाद उनके पैतृक गांव धार जिले के बरमंडल में शोक की असीम लहर दौड़ गई है। अपने गांव के इस अत्यंत होनहार, मिलनसार और कर्तव्यपरायण बेटे की इस प्रकार असमय और वीभत्स मौत से पूरा गांव गमगीन है और हर घर में सन्नाटा पसरा हुआ है। दिवंगत थाना प्रभारी का अंतिम संस्कार उनके इसी पैतृक गांव बरमंडल में पूरे राजकीय सम्मान के साथ संपन्न किया जाएगा।
प्रशासनिक अमले और जनप्रतिनिधियों ने दी सांत्वना, परिजनों ने घटना को महज हादसा मानने से इंकार करते हुए की सीबीआई जांच और बुलडोजर कार्रवाई की मांग
अंतिम संस्कार की तमाम तैयारियों का जायजा लेने और शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाने के लिए स्थानीय विधायक प्रताप ग्रेवाल, कलेक्टर राजीव रंजन मीना, एसपी सचिन शर्मा सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उनके गांव पहुंचे। इस दुखद घटना के बाद शोकाकुल परिवार ने इसे किसी भी सूरत में महज एक सड़क दुर्घटना मानने से साफ इंकार कर दिया है और इसे सुनियोजित हत्या करार दिया है। परिजनों ने मांग की है कि इस जघन्य कृत्य में शामिल सभी आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार कर फांसी के फंदे पर लटकाया जाए, उनके ठिकानों पर बुलडोजर कार्रवाई की जाए और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराई जाए।
पिता ओमप्रकाश पुरी का दर्द— “मेरा बेटा कोई सामान्य इंसान नहीं था, यह एक निर्मम हत्या है, दोषियों को मिले कड़ी से कड़ी सजा”
शहीद अधिकारी के पिता ओमप्रकाश पुरी ने अपने बेटे की असामयिक और दर्दनाक मौत पर गहरा व अटूट दुख व्यक्त करते हुए कहा कि जिन अपराधियों ने इस दुस्साहसिक घटना को अंजाम दिया है, उनका यह कृत्य बेहद निंदनीय और अमानवीय है। हमारा पूरा परिवार इस समय जीवन के सबसे बड़े और असहनीय दुख से गुजर रहा है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि यह कोई सड़क हादसा नहीं, बल्कि एक सोची-समजी निर्मम हत्या है, इसलिए सरकार को आरोपियों को फांसी की सजा देनी चाहिए। साथ ही उन्होंने अपराधियों पर बुलडोजर कार्रवाई और इस पूरे मामले की सीबीआई जांच की पुरजोर मांग उठाई है। पिता ने गर्व के साथ बताया कि उनका बेटा केवल पुलिस सेवा तक ही सीमित नहीं था, बल्कि वह गांव के बच्चों को पढ़ाने और उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के लिए लगातार प्रेरित भी करता था। आज उसी के मार्गदर्शन का परिणाम है कि गांव के कई युवा विभिन्न सरकारी पदों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
बहन दीपिका की दो टूक मांग— “पत्नी और बच्चों को मिले सरकारी नौकरी, और हर हाल में सामने आए पर्दे के पीछे के असली चेहरे”
दिवंगत दिलीप पुरी की छोटी बहन दीपिका भी अपने भाई की इस बेरहमी से हुई हत्या के बाद से गहरे सदमे और आंसुओं में डूबी हैं। उन्होंने मीडिया के सामने स्पष्ट रूप से कहा कि यह कोई सामान्य दुर्घटना नहीं बल्कि एक खतरनाक साजिश के तहत की गई हत्या है। इस पूरे प्रकरण की गहराई से जांच के लिए सीबीआई से पड़ताल कराई जानी चाहिए, ताकि इस घटना के पीछे छिपे सभी षड्यंत्रकारियों के चेहरे बेनकाब हो सकें और दोषियों को उनके किए की कड़ी सजा मिल सके। इसके साथ ही, दीपिका ने शासन-प्रशासन से यह मांग की है कि शहीद टीआई की पत्नी और उनके मासूम बच्चों को तत्काल प्रभाव से सरकारी नौकरी दी जानी चाहिए तथा परिवार को पर्याप्त आर्थिक सहायता प्रदान की जाए।
बचपन के दोस्त और स्थानीय लोग कर रहे हैं याद, कहा— गांव के युवाओं के प्रेरणास्रोत थे दिलीप पुरी
दिलीप पुरी के बचपन के मित्र पंकज विश्वकर्मा ने पुरानी यादों को साझा करते हुए बताया कि वे शुरू से ही बेहद कुशाग्र बुद्धि, साहसी और मेहनती स्वभाव के व्यक्ति थे। पुलिस विभाग की कठिन सेवा में आने के बाद भी उनका अपने मूल गांव और मिट्टी से जुड़ाव कभी कम नहीं हुआ। वे हमेशा गांव के छोटे भाई-बहनों और युवाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते थे, विशेष तौर पर प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी नौकरियों की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों का वे हमेशा हाथ पकड़कर मार्गदर्शन करते थे। पंकज के अनुसार, उनकी यह अचानक विदाई पूरे क्षेत्र के लिए एक ऐसी क्षति है जिसे कभी भरा नहीं जा सकता।
साधारण पुजारी परिवार से ताल्लुक रखते थे दिलीप, गांव के सरस्वती शिशु मंदिर से शुरू हुई थी उनकी शुरुआती शिक्षा का सफर
दिवंगत थाना प्रभारी का परिवार मूल रूप से धार जिले के साधारण परिवेश वाले बरमंडल गांव का रहने वाला है। उनके पिता ओमप्रकाश पुरी गांव के स्थानीय मंदिर और मठ में पूजा-पाठ करने के साथ-साथ खेती-किसानी का कार्य भी संभालते हैं। उनका छोटा भाई धर्मेंद्र पुरी एक निजी प्रतिष्ठान में कार्यरत है। माता-पिता गांव में ही निवास करते हैं, जबकि परिवार के अन्य सदस्य पढ़ाई व अन्य कारणों से इंदौर में रहते हैं। दिलीप की प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही सरस्वती शिशु मंदिर में हुई थी, और अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कुछ वर्षों तक इसी विद्यालय में आचार्य के रूप में भी अपनी सेवाएं दी थीं। उस दौरान उन्होंने गांव के अनगिनत बच्चों को शिक्षा की रोशनी से जोड़ने का सराहनीय कार्य किया था।
कुछ दिन पहले ही नवरात्रि पर गांव आए थे दिलीप, अब उनके जाने से पूरे बरमंडल में पसरा हुआ है मातम
परिजनों की आंखों से बहते आंसू इस बात की गवाही दे रहे हैं कि कुछ ही दिन पूर्व नवरात्रि के पावन अवसर पर वे माता के दर्शन और पूजन के लिए अपने पैतृक गांव आए थे। तब किसी ने सपने में भी यह नहीं सोचा था कि अपने परिवार और दोस्तों से मिलकर विदा होने वाला यह बेटा कभी जिंदा लौटकर वापस नहीं आएगा। अब उनकी शहादत की इस मनहूस खबर के बाद पूरा बरमंडल गांव गहरे शोक में डूबा हुआ है। हर आंख नम है और हर जुबान पर बस एक ही मांग है कि दिलीप पुरी की इस शहादत का न्याय मिलना चाहिए और दोषियों को उनके पाप की सजा मिलनी चाहिए।





