ब्रेकिंग
NEET-UG 2026 Raipur: रायपुर में नीट परीक्षा को लेकर हाई अलर्ट; 25 केंद्रों पर बायोमेट्रिक जांच के बा... Koriya Illegal Mining News: अवैध खनिज परिवहन पर खनिज विभाग का बड़ा एक्शन; 9 वाहन जब्त, कारोबारियों मे... Rahul Gandhi in Chhattisgarh: राहुल गांधी का छत्तीसगढ़ दौरा; 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में जिला अध्य... Chhattisgarh Monsoon Update: छत्तीसगढ़ में मानसून का इंतजार जारी; मौसम विभाग ने बताया कब तक होगी एंट... GPM Crime News: मरवाही में पुलिस बनकर आए बदमाशों ने व्यापारी को किया अगवा; बंदूक की नोक पर ले उड़े क... Child Labour Rescue in Mahasamund: आयोग की अध्यक्ष ने पिकअप वाहन से छुड़ाए 6 बच्चे; बैंड पार्टी के खि... NEET-UG Re-Exam Raipur: जेल की सलाखों से परीक्षा केंद्र तक; हत्या के आरोपी छात्र ने कड़ी सुरक्षा में ... NEET-UG 2026 Durg & MCB: दुर्ग और मनेंद्रगढ़ में कड़ी सुरक्षा के बीच नीट पुनर्परीक्षा संपन्न; बायोमेट... NEET-UG 2026 Giridih: नीट परीक्षा को लेकर गिरिडीह प्रशासन सख्त; होटलों और लॉज की तलाशी, चप्पे-चप्पे ... Ranchi Fraud News: सिल्ली में विधवा महिला से 60 लाख की ठगी; बैंक और LIC के नाम पर दंपति ने हड़पी जमा-...
धार्मिक

महादेव को लगाए जाने वाले त्रिपुंड में होता है 27 देवताओं का वास, विज्ञान ने बताया इसे लगाने का फायदा

हिंदू धर्म में देवी-देवताओं की पूजा में इस्तेमाल किए जाने वाले तिलक (Tilak) का बहुत महत्व होता है. यही एक वजह है कि अलग-अलग देवी देवताओं के लिए न सिर्फ अलग-अलग तरह के आकार वाला तिलक (Shivling Tripund Significance) लगाया जाता है.

वहीं बात करें औढरढानी शिव जी की तो उन्हें लगाए जाने वाला तिलक त्रिपुंड (tripund meaning) कहलाता है. जो आपने साधु-संतो या तपस्वियों यहां तक कि पंडितों के माथे पर चंदन (importance of tilak) या भस्म से बनी तीन रेखाओं के रूप में देखा होगा. ये रेखाएं ही त्रिपुंड कहलाती हैं.
माथे पर चंदन या भस्म से बनी तीन रेखाएं त्रिपुण्ड कहलाती हैं. चन्दन या भस्म द्वारा तीन उंगुलियों की मदद से त्रिपुंड बनाया जाता है. त्रिपुण्ड की तीन रेखाओं में 27 देवताओं का वास होता है. हर रेखा में 9 देवताओं का वास होता है. त्रिपुण्ड धारण करने वालों पर शिव की विशेष कृपा हमेशा (shivas horizontal tripund importance) बरसती है.
त्रिपुंड को चंदन या भस्म से लगाया जाता है. चंदन भस्म माथे को शीतलता प्रदान करते हैं. ज्यादा मानसिक श्रम करने से विचारक केंद्र में पीड़ा होने लगता है. ऐसे में त्रिपुण्ड ज्ञान-तंतुओं को शीतलता प्रदान करता है. इससे मानसिक शांति मिलती है. माना ये भी जाता है कि त्रिपुंड को प्रसाद स्वरूप लगाने पर साधक पर शिव की कृपा बनी रहती है. यहां तक कि जीवन में किसी भी भूत, प्रेत या बाधा का खतरा भी नहीं रहता है. उग्र स्वभाव वाला व्यक्ति यदि माथे पर चंदन लगाए तो उसका व्यवहार सौम्य हो जाता है. वहीं त्रिपुंड के लिए भस्म का मतलब किसी भी लकड़ी की राख नहीं होता बल्कि शैव परंपरा (tripund significance) में भस्म को विशेष प्रकार से तैयार किया जाता है.

Related Articles

Back to top button