ब्रेकिंग
अनुराग जैन पर मोहन सरकार का भरोसा, एक साल और बढ़ा कार्यकाल डॉग बाइटिंग के लिए बदनाम रतलाम में गई फिर एक जान, कुत्ते के काटने के 28 दिन बाद युवक की मौत MP में दहेज का काला सच, 18 महीने में 719 हत्याएं, हर दिन एक महिला की मौत डुमना एयरपोर्ट से फ्लाइट संचालित करने RFP जारी, 3 बिंदुओं पर जवाब पेश करे सरकार: हाईकोर्ट अब भोपाल की ट्रेनों में मिलेंगी दूध जैसी सफेद ‘तकिया-चादरें’, मैकेनाइज्ड लॉन्ड्री से यात्रियों को सा... जबलपुर में ट्रेन में किन्नर बनकर ठगी, RPF ने किया भंडाफोड़ भोपाल-छिंदवाड़ा-इंदौर सहित 17 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, IMD ने जारी की चेतावनी फिट रहने के लिए सारा तेंदुलकर करती हैं पिलेट्स, जानें इसे करने के जबरदस्त फायदे महाराष्ट्र: शिवसेना के विधायक अमोल खताल पर हुआ हमला, हाथ मिलाने के बहाने किया अटैक कर्नाटक-केरल सीमा पर हुआ भयानक सड़क हादसा, बस के ब्रेक हुए फेल, 6 की हुई मौत
मध्यप्रदेश

MP: नसरुल्लागंज का नाम फिर से भैरुंदा होगा, सीएम ने केंद्र सरकार को भेजा प्रस्ताव, शिवराज ने एक साल पहले की थी घोषणा

भोपाल। मध्य प्रदेश में एक और शहर का नाम बदलेगा. सीहोर जिले में स्थित नसरुल्लागंज का नाम बदलने की घोषणा सीएम शिवराज ने की थी, लेकिन अभी तक इसका नाम नहीं बदला गया है. अब नाम बदलने की प्रक्रिया तेज हो गई है. नसरूल्लागंज तहसील का नाम बदलकर भैरुंदा किया जाएगा. शिवराज सरकार ने केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा है. 1908 में नसरुल्लागंज का नाम भैरुंदा ही था. इससे पहले होशंगाबाद और बबाई का भी नाम बदला जा चुका है. सीएम शिवराज सिंह 22 फरवरी 2021 को नाम बदलने का ऐलान किया था.

नसरुल्लागंज के इतिहास को देखा जाए, तो यह भोपाल के नवाब परिवार से जुड़ा है. नवाब सुल्तान जहान बेगम ने भोपाल के पास अपने तीनों बेटों को जागीरें दीं. ज्येष्ठ पुत्र नसरुल्ला खां को दी गई जागीर का नाम उनके नाम पर नसरुल्लागंज रखा गया. इसी तरह ओबैदुल्लागंज ओबैदुल्ला खान की जागीर थी. सुल्तान जहां बेगम ने अपने सबसे छोटे बेटे हमीदुल्लाह को चिकलोड की जागीर दी. नसरुल्ला खान और औबैदुल्ला खान की पूर्व मृत्यु के कारण, भोपाल रियासत के नवाब हमीदुल्ला को बनाया गया था.

भोपाल रियासत की 1908 की गजट अधिसूचना में कहा गया है कि उस समय नसरुल्लागंज का नाम भैरुंडा था. राजपत्र में उल्लेख है कि भैरुंडा भोपाल रियासत के दक्षिणी संभाग के आठ परगनाओं में से एक था. उस समय भैरुंडा और आसपास के इलाकों में कालीन बुनने का काम किया जाता था. यहां कई बुनकर रहते थे. लंबे समय से यहां के निवासी शहर का नाम भैरुंडा करने की मांग कर रहे थे. मुख्यमंत्री के ऐलान से पहले ही स्थानीय लोगों ने नसरुल्लागंज के साथ-साथ भैरुंडा लिखना शुरू कर दिया.

Related Articles

Back to top button