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केदारनाथ कपाटोद्घाटन के साक्षी बने 15 हजार से अधिक श्रद्धालु 

बाबा केदारनाथ की जय उदघोष के साथ आज शुक्रवार वृष लग्न में प्रात: 6 बजकर 25 मिनट पर  केदारनाथ धाम के  कपाट खुल गए हैं। इस अवसर पर मंदिर को भव्य रूप से दस क्विंटल फूलों से सजाया गया था। सेना की मराठा रेजीमेंट के बैंड की भक्तिमय धुनों के साथ देश-विदेश से आए 15 हजार से अधिक श्रद्धालुजन कपाट खुलने के गवाह बने। जिलाधिकारी के अनुसार और श्रद्धालुओं की पहुंचने की संभावना है। जिसके चलते रिकॉर्ड टूटने की संभावना है।आज प्रात साढ़े चार बजे से  बदरीनाथ- केदारनाथ मंदिर समिति ने कपाटोद्घाटन की तैयारी शुरू कर दी थी।
पांच बजे से मंदिर के गर्भगृह के द्वार का पूजन शुरू हुआ।  केदारनाथ धाम के रक्षक क्षेत्रपाल  भकुंट भैरव के आह्वान के साथ ठीक प्रात: 6 बजकर 25 मिनट पर  केदारनाथ धाम के  मुख्य द्वार के कपाट खोल दिए गए।कपाट खुलते ही  केदारनाथ भगवान के स्वयंभू शिवलिंग को समाधि रूप से जागृत किया। कुछ ही पल बाद बाबा के निर्वाण दर्शन हुए। कुछ अंतराल में बाबा का श्रृंगार दर्शन शुरू हुए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से पहला रुद्राभिषेक किया गया।मंदिर को विभिन्न प्रकार के फूलों से सजाया गया और समस्त केदारनाथ धाम में मराठा रेजीमेंट के बैंड की भक्तिमय धुनों से वातावरण गुंजायमान हो रहा था। दानीदाताओं ने भंडारे आयोजित किए।हेली सेवा एवं पैदल मार्ग से श्रद्धालुओं का आने का सिलसिला जारी है।
उल्लेखनीय है कि कपाट खुलने की प्रक्रिया के अंतर्गत  केदारनाथ भगवान की पंचमुखी डोली दो मई को शीतकालीन गद्दीस्थल  ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ से पैदल मार्ग से चलकर गुप्तकाशी,फाटा, गौरीकुंड होते हुए पांच मई शाम को  केदारनाथ धाम पहुंची थी। आज 6 मई को  प्रात:  केदारनाथ धाम के कपाट ग्रीष्मकाल यात्राकाल के लिए खुल गए।ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ से बाबा केदार की पंचमुखी भोगमूर्ति को चल उत्सव डोली में विराजमान किया गया। धार्मिक परंपराओं के निर्वहन के साथ चल उत्सव डोली ने जमाणियों के कांधों से धाम के लिए प्रस्थान किया। वयोवृद्ध तीर्थपुरोहित निवास पोस्ती बताते हैं कि त्रिपदा गायत्री का प्रकाट्य पंचमुखी मूर्तियों से ही हुआ है। पंचमुखी मूर्ति चल उत्सव डोली में ओंकारेश्वर धाम में होने वाली छह माह की पूजा के लिए स्वर्ण मुकुट पंचमुखी डोली के पास सुरक्षित रहता है। डोली के साथ चांदी की प्रभा भी केदारनाथ धाम तक पहुंचती है, जिसे वैदिक मंत्राच्चार के साथ ही केदारनाथ के त्रिकोणीय लिंग के ऊपर स्थापित किया जाता है

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