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मध्यप्रदेश

मध्‍य प्रदेश सरकार बिजली आपूर्ति प्रबंधन में असफल:पूर्व ऊर्जा मंत्री प्रियव्रत सिंह का आरोप

भोपाल ।    अद्योषित बिजली की कटौती पूरे प्रदेश में हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में आठ से दस घंटे तक बिजली काटी जा रही है। कोयले की कमी के कारण ताप विद्युत संयंत्रों से उत्पादन घटकर आधा रह गया है। यह बात पूर्व ऊर्जा मंत्री प्रियव्रत सिंह ने शुक्रवार को कही। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार उपभोक्ताओं को बिजली उपलब्ध कराने के मोर्चे पर असफल साबित हो रही है। प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में हुई पत्रकारवार्ता में सिंह ने बिजली की मांग, आपूर्ति और उत्पादन के आंकड़े जारी किए। उन्होंने कहा कि अभी बिजली की मांग लगभग 12 हजार 500 मेगावाट की है और आपूर्ति लगभग 11 हजार 171 मेगावाट की हो रही है। कोयले की कमी के कारण एनटीपीसी के विभिन्न् संयंत्रों से मध्य प्रदेश को मिलने वाली लगभग एक हजार मेगावाट बिजली अभी नहीं मिल रही है। सिंगाजी पावर प्लांट से 42 प्रतिशत बिजली ही प्राप्त हो रही है। इसी तरह सतपुड़ा ताप विद्युत गृह से 30 प्रतिशत बिजली मिल रही है। अधिकांश ताप विद्युत संयंत्रों के पास एक सप्ताह से कम का कोयला बचा है। कोयला प्रबंधन के लिए सरकार को समय रहते जो कदम उठाने थे, वह नहीं उठाए गए हैं। इसका ही परिणाम है कि उत्पादन घट गया और मांग बढ़ने के कारण बिजली की कटौती करनी पड़ रही है। उन्होंने आशंका जताई कि आने वाले दिनों में बिजली का संकट और गहरा सकता है। वहीं, नेता प्रतिपक्ष डा.गोविंद सिंह ने कहा कि पूरा प्रदेश बिजली की कमी से जूझ रहा है। अघोषित कटौती के कारण किसान और विद्यार्थी परेशान हो रहे हैं। पार्टी ने इस मुद्दे को लेकर तहसील स्तर पर आंदोलन करने का निर्णय लिया है। इसके लिए सभी जिला और ब्लाक इकाइयों के अध्यक्षों को निर्देश भी दिए गए हैं।

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