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विदेश

तनाव के बीच तेहरान से आया राहत भरा मैसेज: ‘टेंशन मत लेना…’, जानें ईरान में फंसे भारतीय छात्रों का हाल

ईरान इन दिनों हिंसा की आग में जल रहा है, हालात दिन ब दिन खराब होते जा रहे हैं.पिछले दो हफ्तों से जारी हिंसक प्रदर्शनों में 2,500 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है. भारत ने अपने नागरिकों को फौरन ईरान छोड़ने की सलाह दी है. इंटरनेट शटडाउन किए जाने के बाद ईरान में पढ़ रहे भारतीय मेडिकल छात्रों और उनके परिजनों की चिंता काफी बढ़ गई है.

इस बीच ईरान में रह रही एक कश्मीरी छात्रा ने अपने परिवार को वीडियो संदेश भेजा है. जिसमें वहां के हालात के बारे में बता रही है, साथ ही अपने परिवार की खैरियत भी पूछती है. वीडियो में छात्रा कहती है ‘अस्सलामुअलैकुम अम्मी-अब्बू आप सभी कैसे हैं, मैं यहां ठीक हूं, ये मेरी दोस्त शायसा का फोन है, उसे घर आना था, उसी के फोन से मैं ये वीडियो रिकॉर्ड कर रही हूं, ताकि वो आपको ये वीडियो सेंड करे और आप सभी को पता चल सके कि मैं यहां ठीक हूं, मैं जिंदा हूं’.

‘आप लोग ज्यादा टेंशन न लें, मैं ठीक हूं…’

इसके आगे छात्रा अपने परिजनों से कहती है ‘आप लोग ज्यादा टेंशन न लें, मैं ठीक हूं और अच्छे से खा पी रही हूं और मेरे पास पैसे भी हैं. यहां पर प्रोटेस्ट होते हैं, समय के समय ज्यादा होते हैं, लेकिन टेंशन की कोई बात नहीं है, मैं अंदर ही रहती हूं, कोई टेंशन मत लेना’. छात्रा कहती है कि जैसे वहां पर शाम के समय कर्फ्यू होता है ऐसे ही यहां पर होता है, लेकिन परेशानी की कोई बता नहीं है. छात्रा कहती है ‘अगर घर जाने के लिए बोला गया तो हम आएंगे, लेकिन आप इंतजार मत करना. सब ठीक है आप टेंशन मत लेना और दुआ करना’.

परिजनों ने जताई चिंता

दरअसल बच्चों से संपर्क नहीं हो पाने के कारण देशभर में खासकर जम्मू-कश्मीर से जुड़े अभिभावकों में तनाव और बेचैनी का माहौल है. ईरान को छोड़कर जाने के आदेश से उनकी चिंताएं बढ़ गई हैं. श्रीनगर में टीवी9 भारतवर्ष से बात करते हुए परिजनों ने सकहा कि ईरान में हालात सही नहीं है और उनके बच्चे जो वहां पढ़ रहे हैं उन्हें वहां से वापस लाने की जरूरत है.

अभिभावकों का नहीं हो पा रहा संपर्क

परियोजनों कहा कि ईरान में इंटरनेट से काम नहीं कर रहा जिस से वह अपने बच्चों को पैसे भी नहीं भेज पा रहे हैं. परिजनों के अनुसार वह केंद्र सरकार, विदेश मंत्रालय से गुजारिश करते हैं कि उनके बच्चों को ईरान से वापस सुरक्षित भारत लाए.

‘छात्रों ने बताया हम सुरक्षित हैं…’

इधर एआईएमएसए (ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन) और एफएआईएमए डॉक्टर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष डॉ. मोहम्मद मोमिन ने हालात को लेकर विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने बताया कि ईरान में इंटरनेट बंद होने के कारण कई छात्रों ने वैकल्पिक तरीकों से उनसे संपर्क करने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि कुछ छात्र इराक बॉर्डर के पास चले गए थे और वहां से उन्होंने व्यक्तिगत रूप से टेक्स्ट मैसेज के जरिए संपर्क किया. इन संदेशों में छात्रों ने साफतौर पर बताया कि वो पूरी तरह सुरक्षित हैं.

ईरान में करीब 3,000 भारतीय छात्र पढ़ाई कर रहे

डॉ. मोमिन ने बताया कि इस समय ईरान में करीब 3,000 भारतीय छात्र पढ़ाई कर रहे हैं. इनमें से 2,000 से अधिक छात्र एमबीबीएस और बीडीएस जैसे मेडिकल कोर्स कर रहे हैं. खास बात यह है कि इनमें से 1,800 से ज्यादा छात्र जम्मू-कश्मीर से हैं. उन्होंने कहा कि वह इन सभी छात्रों के सीधे संपर्क में हैं और लगातार उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं.

भारतीय दूतावास ने जारी की एडवाइजरी

डॉ. मोमिन के अनुसार, भारतीय दूतावास की ओर से छात्रों की सुरक्षा को लेकर एडवाइजरी जारी की गई है. इसमें छात्रों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वो हॉस्टल में ही रहें, इंडोर गतिविधियों तक सीमित रहें और बिना जरूरत बाहर न निकलें. दूतावास ने यह भी स्पष्ट किया है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है और छात्रों की सुरक्षा पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है.

ईरान में 24 जनवरी तक कक्षाएं और परीक्षाएं सस्पेंड

उन्होंने यह भी जानकारी दी कि मौजूदा हालात को देखते हुए ईरान में 24 जनवरी तक कक्षाएं और परीक्षाएं सस्पेंड कर दी गई हैं. इससे छात्रों को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन इंटरनेट बंद होने की वजह से पढ़ाई और परिवार से संपर्क दोनों प्रभावित हो रहे हैं. उन्होंने बताया कि पूरे दिन उन्हें तेहरान यूनिवर्सिटी, शहीद बेहेश्ती यूनिवर्सिटी, अहवाज़ और इस्फ़हान जैसे शहरों से छात्रों के फोन कॉल और मैसेज आते रहे. कुछ छात्रों ने बताया कि वे सुरक्षा कारणों से इराक बॉर्डर के नजदीक गए थे और वहीं से उन्होंने संपर्क किया.

डॉ. मोमिन ने बताया कि अभिभावकों के लिए एक अलग व्हाट्सऐप ग्रुप बनाया गया है, जिसमें लगभग 1,800 अभिभावक जुड़े हुए हैं. इस ग्रुप के जरिए वो लगातार पेरेंट्स को छात्रों की स्थिति, दूतावास की एडवाइजरी और ताजा अपडेट्स साझा कर रहे हैं, ताकि गलत सूचनाओं और अफवाहों से बचा जा सके.

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