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गवर्नर से होटल कारोबारियों का सवाल, बिना फोन घाटी में कैसे आए सैलानी?

श्रीनगर: कश्मीर में घाटी के बड़े होटल व्यवसायियों और पर्यटन से जुड़े समूहों ने राज्यपाल सत्यपाल मलिक के निर्देशों की आलोचना की है। गवर्नर ने राज्य प्रशासन को कश्मीर आने वाले सैलानियों के लिए जारी ट्रैवल एडवाइजरी रद्द करने का आदेश दिया था। हालांकि घाटी में कई जगहों पर संचार व्यवस्था अब भी ठप्प है। इसकी वजह से मोबाइल ‘फोन और इंटरनैट की सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में होटल कारोबारियों ने बिना फोन सुविधा के सैलानियों को न्यौता देने के निर्देशों पर सवाल उठाए हैं।
5 अगस्त, 2019 को अनुच्छेद-370 के ज्यादातर प्रावधानों को हटाए जाने के बाद से घाटी में संचार व्यवस्था पटरी पर नहीं लौटी है राज्यपाल सत्य पाल मलिक ने सोमवार को राज्य के गृह विभाग को निर्देश दिया कि अगस्त में जारी की गई एडवाइजरी को वापस लें, जिसमें पर्यटकों को घाटी छोड़ने के लिए कहा गया था। ताजा निर्देश में 10 अक्तूबर से घाटी में पर्यटकों के आगमन को हरी झंडी दी गई है। श्रीनगर में हाऊसबोट के मालिक अब्दुल रहमान मल्ला ने ट्रैवल एडवाइजरी वापस लेने के फैसले की खिल्ली उड़ाते हुए कह्म कि पर्यटक कश्मीर कैसे जा सकते हैं, जब मोबाइल ‘फोन और इंटरनैट सेवाएं बंद हैं।
एक अन्य शिकारा के मालिक मोहम्मद याकूब ने वीरान पड़ी डल झील की ओर इशारा करते हुए कहा कि कश्मीर के पर्यटन उद्योग को बड़ी चोट पहुंची है और इसे ठीक होने में 3-4 साल तक लग सकते हैं। वही ट्रैवल एजैंट मुश्ताक अहमद डार कहते हैं कि मोबाइल के बगैर हम बंधक हैं, क्योंकि हमारा व्यापार काफी हद तक इंटरनैट पर निर्भर है। घाटी घूमने की मंशा रखने वाले लोग पूछताछ और बुकिंग के लिए हमसे इंटरनैट के जरिए ही संपर्क करते हैं।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने भी स्वीकार किया कि पर्यटकों के लिए मोबाइल फोन और इंटरनैट जैसी सुविधाएं शुरू किए बिना उन्हें घाटी में आमंत्रित करना हास्यास्पद है। ट्रैवल एजैंट मोहम्मद अशरफ ने कहा कि कश्मीर में मौजूदा पर्यटन सीजन अभी के लिए खत्म हो गया है और पर्यटकों, घरेलू और विदेशी, जो सर्दियों में घाटी की यात्रा करना पसंद करते हैं, की बुकिंग शुरु करनी होगी, लेकिन कई जगह पर कम्युनिकेशन बंद होने की बजह से यह संभव नहीं है।

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