ब्रेकिंग
CJP प्रदर्शनकारियों को खाना खिलाने वाले जुनैद मलिक पहुंचे सुप्रीम कोर्ट! पुलिस पर प्रताड़ना और परिजन... NEET पेपर लीक पर पूर्णिया सांसद पप्पू यादव का अनोखा प्रदर्शन, सिर पर पट्टी और हाथ में लाठी लेकर पहुं... 'NEET के छात्रों से ऐंठे जाते हैं ₹1.32 लाख करोड़'; सार्वजनिक परीक्षा विधेयक 2026 पर बहस के दौरान प्... शिर्डी में गुरु पूर्णिमा उत्सव का आगाज! MP और गुजरात के भक्तों ने बाबा के चरणों में न्यौछावर किए लाख... दिल्ली में महिलाओं को हर महीने मिलेंगे ₹2500! 'लक्ष्मी योजना' को कैबिनेट की मंजूरी, रक्षाबंधन पर आएग... सिर में नक्सलियों की गोली फंसी होने के बाद भी रोज लगा रहे 10 KM दौड़, पढ़ें हॉक फोर्स के जांबाज शिवक... फतेहपुर के सर्वोदय इंटर कॉलेज में छात्रों का हंगामा! बिजली, शौचालय व पेयजल की मांग को लेकर सड़क पर उ... IIT दिल्ली से घर बैठे सीखें AI और डेटा साइंस! सर्टिफिकेट प्रोग्राम के लिए आवेदन शुरू, जानें अप्लाई क... मसूरी-देहरादून मार्ग पर भारी भूस्खलन! मैगी पॉइंट के पास रेस्टोरेंट हुआ क्षतिग्रस्त, घंटों ठप रहा ट्र... छात्र प्रदर्शनों पर लाठीचार्ज मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश! निर्दोषों को तुरंत रिहा करने के ...
विदेश

नंगी आंखों से देख सकेंगे अगले माह अद्भुत खगोलीय नजारा

पेरिस। खगोलविदों ने एक नया धूमकेतु खोजा है जिसे नंगीं आंखों से अगले महीने देखा जा सकता है। ऐसी खगोलीय घटना 50 हजार वर्षों में कभी-कभार ही होता है। खगोलविदों के मुताबिक आने वाले हफ्तों में ये धूमकेतु पृथ्वी और सूर्य को पार कर जाएगा। पिछले साल मार्च में बृहस्पति ग्रह के पास से गुजरते हुए इस धूमकेतु को पहली बार देखा गया था। क्षणिक ट्रांजिट के बाद इस धूमकेतु को सी/2022 ई-3 (जेडटीएफ) नाम दिया गया है। खगोलविदों के अनुसार हमारे सौर मंडल की यात्रा करने के बाद यह 12 जनवरी को सूर्य के सबसे करीब आएगा और 1 फरवरी को पृथ्वी के सबसे करीब से गुजरेगा। इस दौरान लोग दूरबीन की एक अच्छी जोड़ी के साथ इसे देख सकेंगे। खगोलविदों ने कहा है कि नंगी आंखों से भी इस धूमकेतु को देखना आसान होगा बशर्ते शहर की रोशनी या चंद्रमा से आकाश बहुत अधिक रोशन न हो।

धूमकेतु पृथ्वी के सबसे करीब होने पर सबसे चमकीला होगा
कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में भौतिकी के प्रोफेसर थॉमस प्रिंस ने कहा कि धूमकेतु पृथ्वी के सबसे करीब होने पर सबसे चमकीला होगा। पेरिस वेधशाला में एक खगोल वैज्ञानिक निकोलस बीवर ने कहा कि बर्फ और धूल से बने और हरे रंग की आभा उत्सर्जित करने वाले इस धूमकेतु का व्यास लगभग एक किलोमीटर होने का अनुमान है। बीवर ने कहा कि यह नियोवाइज धूमकेतु से काफ़ी छोटा होगा जिसे बिना दूरबीन की सहायता के नंगी आंखों से आखिरी बार मार्च 2020 में पृथ्वी को पार करते हुए देखा गया था।
बीवर ने कहा कि 1 फरवरी के आसपास पूर्ण चंद्रमा धूमकेतु देखने की राह में रोड़ा अटका सकता है लेकिन उत्तरी ध्रुव में उन्होंने जनवरी के आखिरी सप्ताह में इसे देखने का सुझाव दिया है जब धूमकेतु उरसा माइनर और उरसा मेजर नक्षत्रों के बीच से गुजरेगा। उन्होंने कहा कि 21-22 जनवरी के सप्ताहांत के दौरान अमावस्या स्टारगेज़र्स के लिए यह एक अच्छा मौका प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि आकाश में धूमकेतु का पता लगाने का एक और मौका 10 फरवरी को आएगा जब यह मंगल के करीब से गुजरेगा।

Related Articles

Back to top button