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मध्यप्रदेश

संगठन मजबूत करने कांग्रेस जल्द करेगी खाली पदों पर नियुक्तियां

भोपाल। चुनावी साल शुरु होते ही मप्र के सियासी गलियारों में गर्मी का माहौल है। नए साल की छुट्टियों से लौटते ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने जिला प्रभारियों और संगठन मंत्रियों की मीटिंग करके बूथ-मंडलम् सेक्टर से लेकर बूथ कमेटियों को मजबूत करने को कहा। कमलनाथ संगठन को दुरुस्त करने में जुटे हैं। मप्र में चुनावी साल शुरु होने के बावजूद प्रदेश के करीब 10 जिले ऐसे हैं जहां कांग्रेस बिना मुखिया के चल रही है। यानि इन जिलों में जिलाध्यक्ष नहीं हैं। इनमें से आधे जिले ऐसे हैं जहां कार्यवाहक जिलाध्यक्षों से काम चल रहा है। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी जेपी अग्रवाल का कहना है जो भी पद खाली है उनपर जल्दी नियुक्तियां हो जाएंगी।

चंबल संभाग के मुख्यालय मुरैना जिले में कांग्रेस का ग्रामीण जिलाध्यक्ष नहीं हैं। मुरैना जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष 12 साल से अध्यक्ष रहे राकेश मावई ने पिछले साल अगस्त में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। पीसीसी चीफ कमलनाथ को दिए इस्तीफे में मावई ने लिखा था कि मैं 12 साल से मुरैना जिला कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष हूं। मुझे पार्टी ने विधानसभा का टिकट दिया अब मैं विधायक के तौर पर मुरैना की जनता को पूरा समय देना चाहता हूं इसलिए मेरा इस्तीफा स्वीकार कर लें। राकेश के इस्तीफा देने के बाद से ही कांग्रेस जिलाध्यक्ष का पद खाली है। एमपी के बुन्देलखंड की राजधानी कहे जाने वाले सागर में कांग्रेस की हालत खराब है। सागर जिले की आठ विधानसभाओं में से सिर्फ दो विधानसभाओं देवरी और बंडा में कांग्रेस के विधायक हैं। शिवराज सरकार के मंत्रिमंडल में अकेले सागर जिले से ही तीन मंत्री हैं। पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेन्द्र सिंह के विधानसभा क्षेत्र खुरई में कांग्रेस के उन कार्यकर्ताओं के घर गए थे जिनके ऊपर बीजेपी के दबाव में केस दर्ज हुए हैं। पत्रकारों ने प्रत्याशी के बारे में पूछा तो दिग्गी बोले कोई नहीं लड़ेगा तो मैं खुरई से चुनाव लडूंगा। लेकिन सागर जिले में कांग्रेस की खराब हालत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सागर शहर और ग्रामीण दोनों ही पदों पर अध्यक्ष नहीं हैं। 11 साल से सागर शहर की जिलाध्यक्ष रेखा चौधरी के बीते सितंबर में इस्तीफा देने के बाद से सागर की पूरी कार्यकारिणी भंग है। वहीं ग्रामीण जिलाध्यक्ष नरेश जैन की कोरोना से निधन के 4 महीने बाद उनके भाई स्वदेश को ग्रामीण जिलाध्यक्ष बनाया गया था। बीते अक्टूबर में स्वदेश ने भी व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए पद से इस्तीफा दे दिया था। लंबे समय तक अनुपपुर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे जयप्रकाश अग्रवाल ने नवंबर 2020 में हुए उपचुनाव में अनूपपुर विधानसभा हारने के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद विधायक फुन्देलाल मार्को को अध्यक्ष बनाया गया था। मार्को ने भी पिछले साल कमलनाथ को जिलाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। तब से ही अनूपपुर में कांग्रेस जिलाध्यक्ष का पद खाली है। अनूपपुर में कांग्रेस विधायकों फुन्देलाल मार्को और सुनील सर्राफ के समर्थकों के बीच हुए एक विवाद के बाद मार्को ने इस्तीफे की पेशकश की थी। पंचायत चुनाव के बाद रतलाम जिला कांग्रेस अध्यक्ष के पद से सैलाना विधायक हर्ष विजय गेहलोत ने इस्तीफा दे दिया था। चार महीने बीतने के बाद अब तक ग्रामीण जिलाध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हो पाई है। हालांकि पिछले साल पीसीसी चीफ कमलनाथ ने विधानसभा चुनाव लडऩे के इच्छुक नेताओं को पार्टी के प्रमुख पद छोडने के निर्देश दिए थे। इसके बाद विधायकों ने जिला अध्यक्षों के पद से इस्तीफे दे दिए थे। भीकनगांव विधायक झूमा सोलंकी खरगोन की जिला कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष थीं। कमलनाथ के निर्देश के बाद विधायक झूमा सोलंकी ने जिला अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया था। चार मजिहीनों से खरगोन में कांग्रेस का नया जिलाध्यक्ष तय नहीं हो पाया है।
कई जिलों में कार्यवाहक अध्यक्षों से चल रहा काम
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ कई बार सार्वजनिक तौर पर यह कह चुके हैं कि हमारा मुकाबला बीजेपी के नेताओं से नहीं उसके संगठन से है। कमलनाथ बीजेपी से निपटने के लिए संगठन को मजबूत करने पर काम कर रहे हैं। नाथ के प्रयासों के बावजूद स्थानीय स्तर पर गुटबाजी के कारण संगठन का काम प्रभावित हो रहा है। निमाड़ अंचल के बुरहानपुर खंडवा दोनों जिलों में शहर और ग्रामीण इकाईयों में कार्यवाहक जिलाध्यक्ष से काम चल रहा है। शहडोल में सुभाष गुप्ता कटनी शहर में विक्रम खम्परिया बतौर कार्यवाहक जिलाध्यक्ष काम कर रहे हैं। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी जेपी अग्रवाल से जब पूछा गया कि कई जिले ऐसे हैं जहां जिलाध्यक्ष नहीं हैं वहां नियुक्तियां कब तक होंगी? इस पर उन्होंने कहा- नियुक्तियां बहुत जल्दी हो जाएंगी। ये प्रोसेस है कोई भी सीट खाली नहीं रहती। संगठन में यदि जिलाध्यक्ष नहीं हैं तो कार्यवाहक होगा उपाध्यक्ष महामंत्री को जिम्मेदारी दी जाती है। जब भी कोई पद खाली होता है तो समन्वय बनाने और नई नियुक्ति करने में समय लगता है।

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