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मध्यप्रदेश

बसंत पर्व से हुआ 40 दिवसीय फाग महोत्सव का शुभारंभ

  • भगवान कृष्ण की विभूति है बसंत ऋतु : कैलाश मंथन
  • मां सरस्वती की साधना से सिद्ध होती है वाणी-लेखनी: मंथन

गुना। ऋतूना कुसुमाकर ऋतुओं में बसंत ऋतु है। श्रीमद् भगवद् गीता के विभूति योग में भगवान कृष्ण ने बसंत ऋतु को अपनी विभूति बताया है। पुष्टिमार्गीय वैष्णव परिषद के प्रांतीय प्रचार प्रमुख कैलाश मंथन ने बताया कि बसंत पंचमी से सभी पुष्टिमार्गीय केंद्रों पर फाग महोत्सव की शुरूआत हुई। जो लगातार डेढ़ माह तक चलेगी। इस दौरान धुलेंडी तक पुष्टिमार्गीय केंद्रों पर श्रीठाकुर जी के साथ रंग गुलाल से होली खेली जाती है। 40 दिवसीय बसंत फाग पर्व उल्लास उमंग एवं जीवन में रंग भरने का महोत्सव है। फाग महोत्सव के तहत पुष्टिमार्गीय श्रीनाथजी के मंदिरों एवं सत्संग मंडलों में होली की पूर्णिमा घुलेड़ी तक बसंतोत्सव पर भक्ति श्रद्धा के साथ नित्य नए रंगों से श्रीनाथ जी को दुलार किया जाता है। श्रीनाथ जी के मंदिर से रंग गुलाल के साथ विशेष मनोरथ कर बसंत पर्व का आरंभ हुआ।

सरस्वती जयंती पर हुए कार्यक्रम विचार गोष्ठी
बसंतोत्सव के तहत चिंतन हाउस में मां सरस्वती की पूजन अर्चन एवं विचार गोष्ठी का आयोजन हुआ। इस मौके पर हिउस प्रमुख श्री मंथन ने कहा कि बसंत पंचमी मां सरस्वती की आराधना का दिवस है। भगवान श्रीकृष्ण ने बसंत ऋतु का अपनी विभूति बताया है। मां सरस्वती की साधना से वाणी एवं लेखनी की सिद्धि प्राप्त होती है। सृष्टि के आरंभ में ब्रह्मा की वाणी के रूप में सरस्वती वेदों के रूप में प्रकट हुई। सरस्वती की रचना कर ब्रह्मा भी मोहित हो गए थे। आदिकाल से लेकर वर्तमान काल तक महान लेखकों कवियों साहित्यकारों सुर साधकों संगीतकारों गायकों एवं बुद्धिजीवियों ने मां सरस्वती की आराधना कर महानता प्राप्त की है। रामायण के लेखक आदि कवि वाल्मिकी महाकवि कालिदास महाभारत-गीता एवं भागवत के रचियता वेद व्यास जी एवं ऋषियों मुनियों ने अपने ग्रंथ की प्रशस्ति सरस्वती के ध्यान से की है। कैलाश मंथन ने कहा मां सरस्वती जिस पर मेहरबान होती हैं उस पर दुनिया कुर्बान होती है। स्थिर बुद्धि एवं मेधावीवृत्ति सरस्वती की आराधना करके प्राप्त की जा सकती है। सर्राफा बाजार स्थित चिंतन हाउस में मां सरस्वती का पूजन अर्चन किया गया। इसमें साहित्यकार लेखक आदि शामिल हुए।

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