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भाजपा ने महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगने के लिए शिवसेना को जिम्मेदार ठहराया

मुम्बई: भाजपा ने महाराष्ट्र में 19 दिन के राजनीतिक गतिरोध के बाद राष्ट्रपति शासन लगने के लिए अपनी पूर्व सहयोगी एवं राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी शिवसेना के ‘‘हठ’’ को उसका नाम लिये बिना जिम्मेदार ठहराया। राष्ट्रपति शासन मंगलवार शाम में लागू हुआ जब राज्यपाल भगत सिंह कोशय़ारी ने केंद्र को एक रिपोर्ट भेजकर कहा कि उनके तमाम प्रयासों के बावजूद वर्तमान स्थिति में एक स्थिर सरकार का गठन असंभव है। भाजपा के वरिष्ठ नेता सुधीर मुनगंतीवार ने भाजपा की कोर समिति की एक बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा, ‘‘राष्ट्रपति शासन लगना जनादेश का अपमान है और यह कुछ लोगों के हठ के कारण हुआ है जिन्होंने उस जनादेश का अपमान किया। हम उभर रही राजनीतिक स्थिति पर नजदीकी नजर रखे हुए हैं।’’

महाराष्ट्र विधानसभा के पिछले महीने हुए चुनाव में भाजपा 105 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी थी। शिवसेना ने 56 सीटें, राकांपा ने 54 सीटें और कांग्रेस ने 44 सीटें जीती थीं। चुनाव परिणाम 24 अक्टूबर को घोषित हुए थे। यद्यपि शिवसेना ने यह कहते हुए सरकार बनाने के लिए भाजपा को समर्थन देने से इनकार कर दिया कि अमित शाह नीत पार्टी मुख्यमंत्री पद शिवसेना के साथ साझा करने के वादे से पीछे जा रही है। राज्यपाल के आमंत्रण पर भाजपा ने रविवार को सरकार बनाने से इनकार करते हुए कहा कि उसके पास जरूरी संख्याबल नहीं है। मुनगंटीवार ने उद्धव ठाकरे नीत पार्टी द्वारा कांग्रेस और राकांपा के समर्थन से सरकार बनाने के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘एक स्पष्ट जनादेश के बावजूद हमने अपनी सहयोगी की तरह वैकल्पिक संभावनाएं नहीं तलाशी, जिसने चुनाव परिणाम के बाद अन्य विकल्पों के बारे में बातें की।’’

उन्होंने सवाल किया, ‘‘यदि उन्हें सरकार बनाने को लेकर विश्वास था तो वे समर्थन का पत्र लेने में क्यों असफल रहे।’’    शिवसेना के नेता जब तय समयसीमा में राज्यपाल से राजभवन में मुलाकात करने गए तो वे कांग्रेस और राकांपा के समर्थन पत्र पेश करने में असफल रहे। इसके बाद राज्यपाल ने तीसरी सबसे बड़ी पार्टी राकांपा को सरकार बनाने के लिए दावा पेश करने के लिए ‘‘क्षमता और इच्छा’’ जताने के लिए आमंत्रित किया। यद्यपि शाम में राष्ट्रपति शासन लग गया। इस बीच भाजपा विधायक दल के नेता देवेंद्र फडणवीस ने उम्मीद जतायी कि राज्य में जल्द ही एक स्थिर सरकार बनेगी। उन्होंने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगने को ‘‘दुर्भाग्यपूर्ण’’ बताया। उन्होंने एक बयान में कहा, ‘‘एक स्पष्ट जनादेश के बावजूद सरकार नहीं बन पायी और राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ा। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। मैं उम्मीद करता हूं कि राज्य को जल्द ही स्थिर सरकार मिलेगी।’’

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य कई मुद्दों का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘बेमौसम वर्षा से फसल नुकसान का सामना करने वाले किसानों को राहत एवं सहायता मुहैया कराना एक प्रमुख मुद्दा है। राजनीतिक अस्थिरता के चलते, राज्य में निवेश प्रभावित हो सकता है और लोगों को परेशानी हो सकती है। मैं उम्मीद करता हूं कि सभी दल स्थिति पर गंभीरता से विचार करेंगे और राज्य को एक स्थिर सरकार मिलेगी।’’  इस बीच भाजपा नेता एवं महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणो ने कहा कि वह यह सुनिश्चित करने के लिए जो भी जरूरी होगा वह करेंगे कि उनकी पार्टी राज्य में सरकार बना ले। उन्होंने कहा, ‘‘मैं एक नयी भाजपा सरकार बनने के लिए जो भी जरूरी होगा करूंगा लेकिन मैं (तौर तरीके) चर्चा नहीं करूंगा।’’ उन्होंने कहा कि शिवसेना सरकार गठन में अभी तक ‘‘असफल’’ रही है और इसके बावजूद दावा किया। ‘‘मैं नहीं मानता कि शिवसेना कांग्रेस.राकांपा गठबंधन के साथ जाएगी।’’

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