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मायावती ने अखिलेश को याद दिलाया ‘गेस्ट हाउस कांड’, बोलीं- उपेक्षित वर्गों को ‘शूद्र’ कहकर इनका अपमान न करे समाजवादी पार्टी

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती (Mayawati) ने शुक्रवार को रामचरित मानस प्रकरण को लेकर समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) पर जोरदार हमला बोला है। बसपा सुप्रीमो ने कहा कि देश में कमजोर एवं उपेक्षित वर्गों का ग्रंथ ‘रामचरितमानस या मनुस्मृति’ नहीं बल्कि ‘भारतीय संविधान’ है।

मायावती ने कहा कि संविधान में बाबा साहब भीमराव आंबेडकर ने इन वंचित तबकों को ‘शूद्र’ नहीं बल्कि अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की संज्ञा दी है और सपा इन्हें ‘शूद्र’ कहकर उनका अपमान नहीं करे और न संविधान की अवहेलना करें।

दरअसल, सपा के राष्ट्रीय महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य ने गुरुवार को कहा था कि धर्म की आड़ में की जाने वाली अपमानजनक टिप्पणियों का दर्द केवल महिलाएं और ‘शूद्र’ ही समझ सकते हैं। मायावती ने ट्वीट कर कहा, ‘देश में कमजोर एवं उपेक्षित वर्गों का ग्रंटा रामचरितमानस व मनुस्मृति आदि नहीं बल्कि भारतीय संविधान है, जिसमें बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने इनको शूद्रों की नहीं बल्कि एससी, एसटी व ओबीसी की संज्ञा दी है। अतः इन्हें शूद्र कहकर सपा इनका अपमान न करे तथा न ही संविधान की अवहेलना करे।

उन्होंने कहा, ‘इतना ही नहीं, देश के अन्य राज्यों की तरह उप्र में भी दलितों, आदिवासियों व ओबीसी समाज के शोषण, अन्याय, नाइन्साफी तथा इन वर्गों में जन्मे महान संतों, गुरुओं व महापुरुषों आदि की उपेक्षा एवं तिरस्कार के मामले में कांग्रेस, भाजपा व समाजवादी पार्टी भी कोई किसी से कम नहीं।’

बसपा नेता ने कहा, ‘साथ ही सपा प्रमुख को इनकी वकालत करने से पहले उन्हें लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस के दो जून, 1995 की घटना को भी याद कर अपने गिरेबान में जरूर झांककर देखना चाहिए, जब मुख्यमंत्री बनने जा रही एक दलित की बेटी पर सपा सरकार में जानलेवा हमला कराया गया था।’

मायावती ने आगे कहा कि वैसे भी यह जगज़ाहिर है कि देश में एससी, एसटी, ओबीसी, मुस्लिम एवं अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों आदि के आत्म-सम्मान एवं स्वाभिमान की क़द्र बसपा में ही हमेशा से निहित और सुरक्षित है, जबकि बाकी पार्टियां इनके वोट के स्वार्थ की खातिर किस्म-किस्म की नाटकबाजी ही ज्यादा करती रहती हैं।

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