ब्रेकिंग
Police Action Chhindwara: सीसीटीवी फुटेज की मदद से तीन शातिर लुटेरे गिरफ्तार, 43 हजार रुपये बरामद Malva Nritya Mahotsav 2026: सेमी-क्लासिकल डांस में चमकी सौम्या, मिला प्रतिष्ठित 'मालवा नृत्य महोत्सव... STF Action in Bhopal: बौद्ध धर्म प्रचार के नाम पर फर्जी पासपोर्ट बनवाने का मामला, 70 संदिग्ध चिन्हित Municipal Corporation Sagar: एमआईसी के प्रस्तावों को लंबित रखने का आरोप, आयुक्त के कार्यप्रणाली के ख... Ramleela Chhindwara 2026: छोटी बाजार में सजी भगवान राम की लीला, कोरोना काल में भी नहीं रुका था मंचन ... Congress Protest Bhopal: चुनाव आयोग के बाहर कांग्रेस नेताओं का हंगामा, पूरे प्रदेश में आंदोलन का ऐला... Madhya Pradesh Politics: पटवारी बोले- 'जब प्रदेश के पटवारी ही सरकार की नहीं सुनते, तो सरकार खटारा है... Delhi Building Accident: नई बनी इमारत ढहने से हड़कंप, राहत और बचाव कार्य जारी, घायलों को अस्पताल में... Coal India PME Update: कोलकर्मियों की हर साल होगी स्वास्थ्य जांच? प्रस्तावित नई व्यवस्था के खिलाफ मु... Muslim Personal Law: नाबालिग बेटी की कस्टडी मामले में हाईकोर्ट का निर्देश, बच्चे का कल्याण सबसे सर्व...
धार्मिक

आखिर भगवान विष्णु से ही क्यों किया देवी लक्ष्मी ने विवाह

सनातन धर्म में माता लक्ष्मी को धन, वैभव और सुख समृद्धि की देवी कहा गया है। मान्यता है कि इनकी इच्छा के बिना किसी जातक को भौतिक सुखों की प्राप्ति नहीं होती है,ऐसे में हर कोई महालक्ष्मी को प्रसन्न करने के तरीके खोजता रहता है जिससे उन्हें धन सुख और समृद्धि आदि का सुख प्राप्त हो।

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार देवी लक्ष्मी को भगवान विष्णु की पत्नी कहा गया है। ऐसे में अधिकतर लोगों के मन में ये प्रश्न उठता है कि देवी लक्ष्मी ने भगवान विष्णु से ही विवाह क्यों किया, अगर आप भी इस प्रश्न का उत्तर जानने के लिए उत्सुक है तो आज का हमारा ये लेख आपको पूरा पढ़ना होगा।

धार्मिक कथा के अनुसार जब समुद्र मंथन के दौरान देवी लक्ष्मी प्रकट हुई तब सारी सृष्टि बिजली की तरह जगमगा ने लगी। देवी लक्ष्मी के सौंदर्य, यौवन, रूप रंग और महिमा ने हर किसी का मन मोह लिया। ऐसे में हर कोई चाहे वह मनुष्य हो, असुर हो या देवता हो सभी देवी लक्ष्मी को प्राप्त करना चाहते थें सभी ने देवी का आदर सत्कार किया। जिसके बाद माता लक्ष्मी अपने हाथों में कमल पुष्पों की एक माला लिए अच्छे और सुयोग्य वर से विवाह के लिए आगे बढ़ी। लेकिन तलाश करने के बाद भी उन्हें सुयोग्य वर की प्राप्ति नहीं हुई।

देवी लक्ष्मी ने गन्धर्व, सिद्ध, यक्ष, असुर और देवताओं में कुछ न कुछ कमी देखी जिस कारण उन्होंने इनमें से किसी को भी नहीं चुना। इसके बाद देवी लक्ष्मी ने काफी विचार करके भगवान श्री विष्णु का वरण किया, क्योंकि श्री हरि सभी सद्गुणों से परिपूर्ण है। ऐसे में देवी लक्ष्मी ने भगवान विष्णु के गले में कमल के पुष्पों का हार डाला और विष्णु को प्राप्त कर उनकी धर्म पत्नि कहलाई।

Related Articles

Back to top button