ब्रेकिंग
NEET Student Suicide: मऊगंज की छात्रा आकांक्षा चतुर्वेदी ने दी जान, सुसाइड नोट में लिखी भविष्य की चि... MPPL 2026: रजत पाटीदार की ग्वालियर चीताज को मिली करारी हार; उज्जैन फाल्कंस ने 92 रनों से जीता मुकाबल... Israel-Lebanon Ceasefire News: इजराइल-लेबनान सीजफायर पर सहमति, हिज्बुल्लाह को लितानी नदी से हटने के ... Gold and Silver Price Hike: सोने की कीमतों में जबरदस्त उछाल; जानें दिल्ली-मुंबई में क्या हैं आज के न... Purushottam Maas Guruvar: पुरुषोत्तम मास में गुरुवार का विशेष संयोग; भगवान विष्णु की कृपा पाने के अच... Dehydration Tips: गर्मी में कमजोरी और दस्त से बचने के लिए घर पर तैयार करें ORS, जानें सही तरीका Delhi Malviya Nagar Hotel Fire: मालवीय नगर होटल अग्निकांड में 21 की दर्दनाक मौत; मां की बहादुरी ने ब... Lalit Modi Interview: ललित मोदी ने 'भगोड़ा' होने के आरोपों को नकारा; कहा- "मुझे किसी को कुछ साबित कर... DK Shivakumar First Decisions: कर्नाटक के सीएम डी.के. शिवकुमार का बड़ा धमाका; बेंगलुरु की सड़कों के ल... Amarnath Yatra Helicopter Service Banned: अमरनाथ यात्रा के लिए हेलीकॉप्टर सेवा पर रोक, केदारनाथ-बद्र...
विदेश

संज्ञान लेना चा‎‎हिए, निजी सुख के ‎लिए नहीं

इस्लामाबाद । पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि स्वत: संज्ञान के अधिकार का मौलिक उद्देश्य उसका इस्तेमाल जनहित के लिए करना है, न कि किसी खास इंसान के लिए। शरीफ का यह बयान सत्तारूढ़ गठबंधन और न्यायपालिका के बीच जारी तनातनी के बीच आया है। पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) नीत सरकार उच्चतम न्यायालय (कार्यप्रणाली औरप्रक्रिया) विधेयक 2023 को कानूनी रूप देने का प्रयास कर रही है, जिसका लक्ष्य पाकिस्तान के प्रधान न्यायाधीश उमर अटा बांदियाल के स्वत: संज्ञान लेने की शक्ति को कम करना और मामलों की सुनवाई के लिए न्यायाधीशों के पैनल का गठन करना है। सरकार के इस कदम को लेकर विधायिका और न्यायपालिका के बीच ठनी हुई है। शुरुआत में इस विधेयक को संसद के दोनों सदनों ने पारित कर दिया और कानूनी रूप देने के लिए इसे राष्ट्रपति आरिफ अल्वी के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा गया। लेकिन, पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) से ताल्लुक रखने वाले राष्ट्रपति अल्वी ने इसे लौटाते हुए कहा कि प्रस्तावित कानून ‘‘संसद के दायरे से बहुत बाहर है।’’ हालांकि, 10 अप्रैल को संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में खान की पार्टी के सदस्यों के हंगामे के बीच यह विधेयक फिर से पारित हो गया।
गौरतलब है ‎कि पाकिस्तान की नेशनल असेंबली ने इस कानून को अधिसूचित कर दिया। जानकारी के अनुसार अनुसार, लाहौर की कोटलखपत जेल का दौरा करने और वहां के कैदियों की स्थिति के बारे में जानकारी लेने के बाद मीडिया से बातचीत में प्रधानमंत्री शरीफ ने सवाल किया कि जेलों और उनमें बंद कैदियों से जुड़े मुद्दों पर अदालत ने कितनी बार स्वत: संज्ञान लिया है। शरीफ ने कहा कि उच्चतम न्यायालय को जनहित के मुद्दों पर स्वत: संज्ञान लेने और उन पर सुनवाई करने का अधिकार प्राप्त है।

Related Articles

Back to top button