ब्रेकिंग
BSF Attari Border News: अटारी सीमा पर रिट्रीट सेरेमनी का नया शेड्यूल जारी; शाम 5:30 बजे शुरू होगी पर... Batala Viral Video: गुरु नानक देव जी के विवाह पर्व में ट्रैक्टर स्टंट पड़ा भारी; तेज रफ्तार में पलटा... Dubai Visa Fraud: 90 हजार में दुबई भेजा, छीना पासपोर्ट और मुर्गीखाने में रखा! जालंधर के पीड़ित ने सु... Amritsar Flooding Alert: तरनतारन रोड के पास नहर टूटने से मचा हड़कंप; मिट्टी की बोरियों से दरार भरने ... Punjab Gold Silver Price Today: पंजाब में उछले सोना-चांदी के दाम; जालंधर में 24 कैरेट सोना ₹1.58 लाख... Ferozepur Central Jail: केंद्रीय जेल फिरोजपुर में फिर चला तलाशी अभियान; 10 और मोबाइल फोन बरामद, कैदि... Etah Fake University Scam: एटा में चायवाले के नाम पर चल रही थी फर्जी यूनिवर्सिटी; भेद खुला तो प्रिंस... Bihar Flood Relief: सीएम सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री राहत कोष में दान दी एक महीने की सैलरी; नितिन नब... Durg News Today: फेसबुक पोस्ट पर बवाल; भिलाई-3 थाने पहुंचे कांग्रेसी, भाजयुमो नेता पर FIR और गिरफ्ता... Agra Mahakumbh Ambikapur: सीएम विष्णु देव साय ने किया 'अग्र महाकुंभ 2026' का शुभारंभ; अग्रवाल समाज क...
विदेश

बिलावल की यात्रा मी‎डिया के ‎लिए ‎सिर्फ मसाला बनकर न रह जाए

इस्‍लामाबाद। पा‎‎किस्तान के ‎विदेश मंत्री ‎बिलावल भुट्टो की भारत यात्रा कहीं मी‎डिया के ‎लिए मसाला बनकर न रह जाए। जानकारों की मानें तो इससे कुछ नया होने की संभावना कम ही नजर आ रही है। गौरतलब है ‎कि चार और पांच अप्रैल को भारत और पाकिस्‍तान के बीच हाई वोल्‍टेज ड्रामा देखने को मिलेगा। गोवा की राजधानी पणजी में शंघाई को-ऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन सम्‍मेलन का आयोजन होना है। इस सम्‍मेलन में एसीसीओ देशों के विदेश मंत्री भी शामिल होंगे। पाकिस्‍तान के विदेश मंत्री बिलावल भूट्टो भी मौजूद होंगे। कई विशेषज्ञों की मानें तो बिलावल का भारत दौरा दोनों देशों की मीडिया के लिए मसाला परोसने वाला होगा। लेकिन उनके आने से रिश्‍तों पर कुछ खास फर्क पड़ेगा, इस बात की संभावना बहुत कम है। भारतीय विशेषज्ञों की मानें तो दोनों देशों के रिश्तों में सुधार तब तक नहीं होगा जब तक पाकिस्‍तान की विदेश नीति को उनके देश में समर्थन मिलेगा। इसमें एक बड़ा रोल पाकिस्‍तानी सेना का भी है जिसे नजरअंदाज करना मुश्किल है। पिछले 10 सालों यानी एक दशक में भारत आने वाले बिलावल पाकिस्‍तान के पहले विदेश मंत्री हैं। उनका यह दौरा यह बताने के लिए काफी है कि आतंरिक स्‍तर पर पाकिस्‍तान में भारत और दुनिया की राजनीति को लेकर कितने मतभेद हैं।
बिलावल के साथ एससीओ सम्‍मेलन में पाकिस्‍तान के परममित्र चीन के भी विदेश मंत्री मौजूद होंगे। लेकिन पाकिस्‍तान के विचारक भारत दौरे को एक अपमान के तौर पर देख रहे हैं। पाकिस्‍तान की विदेश नीति की सबसे बड़ी समस्‍या है कि भारत पर कभी कोई समझौता नहीं होता है। विदेश नीति में सबसे बड़ा फोकस चीन, अमेरिका और रूस पर ही रहता है। पाकिस्‍तान को इस समय अफगानिस्‍तान से भी काफी चुनौतियां मिल रही हैं। साथ ही वह मीडिल ईस्‍ट की बदली राजनीतिक स्थितियों से भी निपटने के लिए संघर्ष कर रहा है। एशिया सोसायटी पॉलिसी इंस्‍टीट्यूट के सीनियर फेला सी राजामोहन के अनुसार पाकिस्तान की सेना के लिए भी एजेंडा तय करना मुश्किल हो रहा है। जबकि वह लंबे समय से भारत की रणनीति समेत देश की बाकी प्रमुख नीतियों की मध्यस्थ रही है।
हाल ही में पूर्व सेना प्रमुख जनरल (रिटायर्ड) कमर जावेद बाजवा को लेकर सामने आई खबरों से भी इस बात की पुष्टि हो जाती है। देश के कई सीनियर जर्नलिस्‍ट्स जैसे हामिद मीर ने बाजवा पर कश्मीर मसले पर भारत के साथ बड़ा समझौता करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि बाजवा का दावा था कि पाकिस्तानी सेना भारत से लड़ने की स्थिति में नहीं है। सेना प्रमुख के रूप में उनके छह साल के कार्यकाल के दौरान मीडिया या राजनीतिक वर्ग के कुछ लोगों ने बाजवा की आलोचना करने की हिम्मत की। जानकारों के अनुसार घरेलू स्‍तर पर काम करने के अलावा पाकिस्तान को विदेश नीति की सहमति के पुनर्निर्माण के लिए बहुत समय की जरूरत है। भारत को ‎बि अपनी प्राथमिकताओं को बदलना होगा। भारत सरकार के लिए एक प्राथमिकता रावलपिंडी में सेना के लिए जरूरी और मूल्यवान पर्दे के पीछे की रणनीति को बरकरार रखने की जरूरत है।

Related Articles

Back to top button