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मध्यप्रदेश

केंद्र सरकार की योजना में सहयोग नहीं कर रहा जिला शिक्षा विभाग

 ग्वालियर। राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) को मिलने वाली अनुदान राशि पर पूरी निगरानी रखने के लिए केंद्र सरकार ने एक योजना तैयार की थी जिसमें एनएसएस की एभी इकाइयों को स्टेट बैंक आफ इंडिया में खाता खुलवाना है। इस योजना का क्रियान्वयन उच्च शिक्षा विभाग ने तो कर दिया है लेकिन स्कूल शिक्षा विभाग इससे बचता नजर आ रहा है। अभी तक स्कूल शिक्षा विभाग की एक या दो यूनिट ने ही इस योजना के अंतर्गत खाता खुलवाया है। बता दें कि जिले के शिक्षा अधिकारी ने इस मामले में आदेश जारी कर सभी स्कूलों को खाता खुलवाने के लिए हिदायत भी दी थी लेकिन इसके बाद भी किसी पर कोई असर नहीं है।

इन खातों से होगा फायदा

इन खातों से एनएसएस को मिलने वाली अनुदान राशि पर केंद्र सरकार की सीधी नजर रहेगी। संस्था को मिलने वाली राशि से पूरे साल भर में क्या गतिविधियां हुईं , कितना पैसा खर्च हुआ और कितना नहीं इसकी पूरी जानकारी केंद्र सरकार को होगी। कई संस्थाए ऐसी होती हैं जो अनुदान की राशि को ठीक से उपयोग नहीं कर पाती हैं और पैसा वित्तीय वर्ष के खत्म होने के बाद भी खाते में पड़ा रहता है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। अब वित्तीय वर्ष समाप्त होने के समय अगर किसी यूनिट के पास अनुदान राशि शेष रहती है या कोई गतिविधि नहीं होती है तो केंद्र सरकार अनुदान की राशि को वापस ले लेगी।

भोपाल और दिल्ली करेंगे निगरानी

संभाग स्तर पर मौजूद सभी 234 एनएसएस संस्थाओं का पेरेंट एकाउंट ग्वालियर स्तर पर होगा, इसके बाद प्रत्येक संस्था का बैंक खाता बतौर चाइल्ड एकाउंट होगा। राष्ट्रीय स्तर पर निगरानी का काम दिल्ली से हाेगा वहीं प्रदेश स्तर पर इस बैंक एकाउंट की निगरानी भोपाल से होगी और भोपाल में होने वाली इस गतिविधि को दिल्ली से देखरेख में रखा जाएगा।

शहर को मिलता है साढ़े 36 लाख का अनुदान

ग्वालियर चंबल संभाग की कुल 234 संस्थाओं में से 81 संस्था सिर्फ ग्वालियर जिले की हैं। इसमें 25 एनएसएस संस्था स्कूल की और 56 कालेज की शामिल हैं। प्रत्येक संस्था को प्रतिवर्ष 45 हजार रुपये बतौर अनुदान मिलते हैं । इस आधार पर अगर हिसाब लगाया जाए तो लगभग साढ़े 36 लाख रुपये प्रतिवर्ष संस्थाओं को केंद्र सरकार से बतौर अनुदान प्राप्त होती है।

इनका कहना है

‘स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से सहियोग नहीं मिल रहा है, खाते नहीं खुलवा रहे हैं। डीईओ तक शिकायत कर चुके हैं अब लगता है संयुक्त संचालक से ही मदद मांगनी हाेगी।’

-डा रविकांत अदालतवाले, निदेशक, एनएसएस ग्वालियर-चंबल संभाग

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