ब्रेकिंग
शहजाद पूनावाला की मां का एक्सीडेंट: कार की टक्कर से गंभीर चोटें, सर्जरी के लिए अस्पताल में भर्ती कौन था सुपारी किलर बनारसी यादव? गाजीपुर से सोनभद्र तक दहशत, काशी में यूपी एसटीएफ ने किया एनकाउंटर 'वी लव कोरियन गेम्स...' गाजियाबाद सुसाइड मिस्ट्री में डायरी ने खोला मौत का खौफनाक राज UP Police Constable Exam 2026: यूपी पुलिस कांस्टेबल लिखित परीक्षा का शेड्यूल जारी, 3 दिनों तक चलेगा ... Uttarakhand Madarsa Board: उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड खत्म! अब 'अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण' तय करेगा... Bikram Majithia News: जेल से बाहर आते ही गुरुद्वारा दुख निवारण साहिब पहुंचे मजीठिया, नतमस्तक होकर पर... Batala Murder Case: बटाला कत्ल मामले में पुलिस की बड़ी कामयाबी, हत्या की साजिश रचने वाला 'कपल' गिरफ्... Punjab Highway Accident: पंजाब में हाईवे पर स्कॉर्पियो का भीषण हादसा, 3 पुलिसकर्मियों समेत 6 लोग गंभ... Punjab Board Exam Update: कब शुरू होंगी PSEB 12वीं की परीक्षाएं? डेटशीट को लेकर आई बड़ी जानकारी, छात... Horrific Attack: घर से निकलते ही 13 साल के बच्चे पर खूंखार कुत्ते का हमला, लहूलुहान हुआ मासूम; चीखें...
मध्यप्रदेश

हाई कोर्ट ने ओवरटाइम के लिए दोगुना मेहनताना सुनिश्चित करने दिए निर्देश

जबलपुर। हाई कोर्ट ने ओवर टाईम की दर कम किए जाने को अनुचित करार दिया। इसी के साथ समुचित दर निर्धारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही याचिका निराकृत कर दी। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने मप्र दुकान एव प्रतिष्ठान अधिनियम की धारा 55 का हवाला देते हुए अपने आदेश में कहा है कि आवश्यकता के अनुसार कर्मचारी ओवर टाइम करता है तो वह दुगने मेहनताने का हकदार है।

इसलिए दायर की गई थी याचिकाः

मप्र राज्य कर्मचारी उपभोक्ता कर्मचारी संघ की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि मप्र राज्य कर्मचारी उपभोक्ता संघ के अंतर्गत सहकारी समितियों समाहित है। जिसका कार्य उपभोक्ताओं को उचित दर में निर्धारित वस्तु का विक्रय करना है। संघ की सम्पत्ति में सहकारी समितियों के कर्मचारी का अंश भी है। संघ के एमडी व बोर्ड आफ डायरेक्टर ने आर्थिक नुकसान का हवाला देते हुए ओवरटाइम की दर दुगनी से घटाकर सामान्य कर दी है, जो नियम के प्रतिकूल है। मनमाने तरीके से उक्त निर्णय लिया गया है। एकलपीठ ने याचिका की सुनवाई के बाद याचिका स्वीकार करते हुए मनमाने आदेश को निरस्त कर दिया। इससे पीड़ित पक्ष ने राहत की सांस ली।

Related Articles

Back to top button