सिद्धरमैया और दिनेश गुंडू राव का अपने पदों से इस्तीफा, भाजपा तीन सीटों पर काबिज, नौ पर आगे

बेंगलुरू। कर्नाटक में 15 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के लिए मतगणना हुई। अभी तक मिली जानकारी के मुताबिक, भाजपा ने तीन सीटें जीत ली है जबकि नौ सीटों पर आगे चल रही है। दूसरी ओर कांग्रेस दो सीटों पर आगे है। एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार ने बढ़त बनाई हुई है। इस बीच कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने कांग्रेस विधायक दल के नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया है। यही नहीं कांग्रेस नेता दिनेश गुंडू राव ने भी अपने पद से त्यागपत्र दे दिया है।
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– कांग्रेस नेता दिनेश गुंडू राव (Congress Leader Dinesh Gundu Rao) ने कहा है कि मैं उपचुनावों में हुई हार की जिम्मेदारी लेता हूं और पार्टी के कर्नाटक प्रमुख के पद से इस्तीफा दे रहा हूं।
– सिद्धारमैया ने कहा कि मुझे लोकतंत्र का सम्मान करना चाहिए। मैंने अपना इस्तीफा सोनिया गांधी को सौंप दिया है। मैंने कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद से भी इस्तीफा दे दिया है।
– कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने कहा कि मैं खुश हूं कि जनता ने हमें अच्छा बहुमत दिया है। अब हम बिना किसी समस्या के राज्य के लोगों को लोकोन्मुखी और स्थाई सरकार देंगे।
– मतगणना में भाजपा की अभूतपूर्व बढ़त से खुश कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने अपने बेटे बीवाई विजयेंद्र को मिठाई खिलाई।
येदियुरप्पा ने बचाई सरकार
इस उपचुनाव में मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को सरकार बचाने के लिए कम से कम छह सीटें जीतनी जरूरी हैं। मौजूदा रूझानों से यह संकेत मिल रहा है कि उनकी सरकार को अब कोई खतरा नहीं है। बता दें कि कर्नाटक में 224 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा के पास 105, कांग्रेस के पास 66 और जेडीएस के पास 34 विधायक हैं। यही नहीं विधानसभा में एक बसपा का भी एमएलए है। हाई कोर्ट में मामला लंबित रहने के कारण विधानसभा में दो सीटें खाली हैं जिन पर उपचुनाव नहीं कराया गया है।
15 विधानसभा क्षेत्रों में कुल 165 उम्मीदवार
कर्नाटक की 15 विधानसभा क्षेत्रों में कुल 165 उम्मीदवार मैदान में खड़े थे, जिसमें 126 निर्दलीय और नौ महिलाएं शामिल थीं। भाजपा और कांग्रेस ने सभी 15 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ा जबकि जेडीएस ने 12 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। भाजपा ने चुनाव मैदान में कांग्रेस और जेडीएस छोड़कर आए 11 बागी अयोग्य विधायकों को उतारा था। इन्होंने 14 नवंबर को भाजपा का दामन थाम लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने बीते 13 नवंबर को अपने फैसले में विधायकों की अयोग्यता को बरकरार रखते हुए इनको दोबारा चुनाव लड़ने की इजाजत दे दी थी।






