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मध्यप्रदेश

इंदौर की झांकियों में दिखेगी 100 बरस की विकास यात्रा, पहली बार थ्रीडी पुतलों का उपयोग

दिखेगा चंद्रयान और देश का विकास

मिल : हुकमचंद मिल

वर्ष : 100वां

प्रथम : इसमें मिल के मालिक सेठ हुकमचंद कासलीवाल द्वारा 100 साल पहले निकाली गई बैलगाड़ी पर झांकी को दिखाया गया था। अगले भाग में चंद्रयान के जरिये देश की विकास यात्रा दर्शाई है। इस झांकी में 100 वर्ष के बदलाव को दर्शाया गया है।

द्वितीय : कृष्ण लीला पर आधारित झांकी में गोमाता की महत्ता को प्रदर्शित किया गया है। तीन भागों में बनी झांकी में पहले गोपाष्टमी पर्व, दूसरे में माखन चोरी की लीला और कृष्ण और कंस का युद्ध दिखाया गया है।

तृतीय : भगवान विष्णु के वामन अवतार पर आधारित झांकी में त्रेता युग को दिखाया गया है। इसमें भगवान को बालक रूपी ब्राह्मण अवतार में दिखाया गया। इसमें वे देवताओं को राजा बली से भय मुक्ति का आश्वासन भी देते दर्शया गया है।

कृष्ण की रास लीला और हनुमानजी की भक्ति

मिल : कल्याण मिल

वर्ष : 95वां

प्रथम : श्रीकृष्ण की रासलीला पर आधारित झांकी में भगवान को बंसी बजाते हुए दिखाया गया है। राधा संग गोपियों को बांसुरी की मधुर ध्वनि पर मोहित होकर नृत्य करते हुए दिखाती यह झांकी आनंदित करने वाली है।

द्वितीय : हनुमानजी की प्रभु राम के प्रति भक्ति को दर्शाती दूसरी झांकी में हनुमानजी को पूरे शरीर में सिंदूर लगाकर जाते हुए दर्शाया गया है। यह रामायण के उस प्रसंग पर आधारित है, जिसमें हनुमानजी सीता माता से पूछते हैं कि आप मांग में सिंदूर क्यों लगाते हो? इसके जवाब में वे कहती हैं कि इससे प्रभु प्रसन्न होते हैं।

शिव-पार्वती विवाह का उल्लास, सीता हरण की झांकी

मिल : स्वदेशी मिल

वर्ष : 94वां

प्रथम : पहली झांकी को सीता हरण को तीन भागों में दिखाया गया है। प्रथम में सीता माता कहती हैं हिरण को पकड़कर लाओ, दूसरे में सीता माता को कुटिया के बाहर और रावण को साधु वेश में दिखाया गया है। तृतीय भाग में रावण द्वारा सीता का हरण दिखाया गया है।

द्वितीय : शिव पार्वती का विवाह भी तीन भागों में दिखाया गया है। पहले भाग में नारदजी पार्वती माता की माता को वर शिव दिखाते हुए दर्शाया गया है। दूसरे भाग में मैनाजी को विष्णु और ब्रह्माजी समझाते हुए और अंत में शिव-पार्वती को फेर लेते हुए दिखाया गया है।

शिवाजी-महाराणा का शौर्य दिखाया

मिल : मालवा मिल

वर्ष : 89वां

प्रथम: पहली झांकी में महापुरुषों के शौर्य की गाथा कहती देशभक्ति की झांकी है। इसमें झांसी की रानी, छत्रपति शिवाजी महाराज और महाराणा प्रताप को आक्रमणकारियों से युद्ध लड़ते दिखाया गया है। चित्रों में डा. भीमराव आंबेडकर, टंट्या भील, स्वामी विवेकानंद आदि दिखाई दे रहे हैं।

द्वितीय: जग में सुंदर है दो नाम चाहे कृष्ण कहो या राम थीम पर बनी झांकी में राधा कृष्ण नृत्य करते हुए दिखाई दे रहे हैं। भगवान राम का दरबार भी नजर आ रहा है। इसमें राम को सबरी के झूठे बेर खाते भी दिखाया गया है।

तृतीय: तीसरी झांकियां में कालिया नाग के फन पर कृष्ण भगवान को नृत्य करते दिखाया गया है। इसके साथ ही कालिया नाग की चार पत्नियों को कृष्ण से प्रार्थना करते दिखाया कि वे कालिया नाग का वध न करें। इस भगवान उन्हें जीवनदान देते हैं।

मोबाइल युग में बच्चे दिखेंगे शारीरिक खेल खेलते

मिल: राजकुमार मिल

वर्ष: 88वां वर्ष

प्रथम: लकड़ी की काठी पे घोड़ा थीम पर बनी मनोरंजक झांकी में मोबाइल के दौरा में बच्चों को अलग-अलग शारीरिक खेल खेलते दिखाय गया है। इसके जरिए बच्चों को घर आंगन, आंगन और बाग-बगीचे में खेलने के लिए प्रोत्साहित करना है।

द्वितीय : पूतना वध एवं खाटू श्याम की झांकी में मथुरा के राजा कंस को बालक कंस का वध करने के लिए पूतना को भेजते हुए दिखाया गया। इसमें विशालकाय पूतना को ठहाके लगाते हुए दिखाया गया है।

तृतीय : तीसरी झांकी में भीम व हिडिंबा के पोते राजा बर्बरीक भगवान कृष्ण को अपना शीश सौंपते हुए दिखाया गया। इससे प्रसन्न भगवान कृष्ण उन्हें प्रसन्न होकर कलियुग में खाटू श्याम के रूप में पूजे जाने का आशीर्वाद देते हुए दिखाए गए हैं।

समुद्र मंथन और चंद्रयान की झांकी

मिल : होप टैक्सटाइल्स

वर्ष : वर्ष 74वां

प्रथम : प्रथम झांकी में समुद्र मंथन को दर्शाया गया है। इस झांकी में देवताओं और दानव द्वारा समुद्र मंथन कर रहे हैं। समुद्र मंथन से एक से बढ़कर एक अनुपम वस्तु निकल रही है। इसमें महादेव को विष पान करते दिखाया गया है।

द्वितीय : दूसरी झांकी में चंद्रयान को दर्शाया गया है। इसमें भगवान गणेश चंद्रमा पर जा रहे हैं। उनके अभिनंदन के लिए चंद्रदेव स्वयं प्रकट हो गए हैं। गणेशजी के हाथ में तिरंगा है। इस झांकी के माध्यम से कलाकारों ने भारत की विकास यात्रा को दर्शाने का प्रयास किया गया है।

गर्भगृह के होंगे दर्शन, पेड़-पौधों को काटने से रोकेंगे भगवान

-खजराना गणपति मंदिर

वर्ष :19वां वर्ष

प्रथम : इसमें 25 फीट के ट्राले को पुष्पक विमान के रूप में बदल दिया गया है। इसमें हनुमान, रामजी, सीता और लक्ष्मण विराजमान है। इस चलित झांकी में विमान के पंख चलायमान रहेंगे जो आकर्षण का केंद्र बनेंगे।

द्वितीय : दूसरी झांकी में खजराना गणेश की गर्भगृह की दर्शन होंगे। यह झांकी कलाकारों द्वारा खूबसूरती से बनाई गई है। इसमें भगवान के पूजन के दृश्य को सुंदरता से दर्शाया गया है।

तृतीया : पर्यावरण संरक्षण की तीसरी झांकी में भगवान गणेश पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे हैं। पेड़-पौधों को काटने से भगवान स्वयं रोककर रहे हैं। इस बात के लिए चूहों को भी निर्देशित करेंगे।

झांकी में दिखी आडिटोरियम, स्विमिंग पूल, लवकुश चौराहा

– इंदौर विकास प्राधिकरण

वर्ष : 26वां

प्रथम : पहली झांकी में प्राधिकरण द्वारा कराए जा रहे विकास कार्यों को दर्शाया जा रहा है। इसमें आडिटोरियम, स्विमिंग पूल, लवकुश चौराहा, लेवल फ्लोअर आदि दिखाई देंगे।

द्वितीय : इसमें भगवान कृष्ण के जन्म के प्रसंग को दिखाया गया है। इसमें मथुरा के कारागार में बंदी वसुदेव-देवकी को दिखाया गया है। इसी झांकी में वसुदेव को यमुना पार कृष्ण को ले जाते हुए दिखाया गया है। इसमें शेषनाग वसुदेव की मदद करते हैं।

तृतीय : छत्रपति शिवाजी महाराज की शौर्य गाथा पर आधारित झांकी में राज्याभिषेक को दर्शाया गया है। इसमें 6 जून 1674 के रायगढ़ किले के दृश्य को दर्शाने का खूबसूरत प्रयास कलाकारों द्वारा किया गया है।

पहली बार थ्रीडी प्रिंटिंग वाले पुतलों का उपयोग

– नगर-निगम इंदौर

वर्ष : 28वां

प्रथम : पहली बार थ्रीडी प्रिंटिंग का उपयोग कर माडल बनाए हैं। पहली झांकी में छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक और उनके जीवन पर आधारित झांकी बनाई गई है।

द्वितीय : चंद्रयान की सफलता दर्शाती झांकी में विज्ञानियों का अभिनंदन किया जा रहा है। लाड़ली बहना योजना का भी चित्रण किया गया है।

तृतीय : पर्यावरण और जल बचाओ का संदेश देती झांकी में मां नर्मदा पर केंद्रित है। इसमें पेड़, पौधों, जीव-जंतु, मानव आदि के जीवन में जल के महत्व को बताया गया है।

चतुर्थ : हनुमान अष्टक के नाम से बताई गई झांकी थ्रीडी प्रिंटिंग का खूबसूरत इस्तेमाल देखते ही बन रहा है। इसमें पवन पुत्र के जीवन के विभिन्न प्रेरक प्रसंगों को खूबसूरती से दर्शाया गया है।

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