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मध्यप्रदेश

बुरहानपुर में बोले हर्षवर्धन सिंह- निमाड़ की जनता के साथ दूसरी बार हुआ फरेब

बुरहानपुर। कांग्रेस के बाद भाजपा में भी प्रत्याशी की घोषणा होते ही विरोध शुरू हो गया है। भाजपा के कद्दावर नेता रहे पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व सांसद स्व. नंदकुमार सिंह चौहान के पुत्र हर्षवर्धन सिंह चौहान बागी हो सकते हैं। रविवार को भोपाल से शहर पहुंचे हर्षवर्धन ने शक्ति प्रदर्शन किया। पांच हजार से ज्यादा कार्यकर्ताओं, समर्थकों और नेताओं के साथ लालबाग से शहर तक जुलूस निकाला गया।

स्टेशन से बाहर आते ही हर्षवर्धन ने कहा कि निमाड़ की जनता के साथ दूसरी बार फरेब हुआ है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कहा था कि निर्दलीय से हारे किसी नेता को टिकट नहीं दिया जाएगा। बावजूद इसके भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे लोगों को प्रत्याशी बना दिया गया है। उनका इशारा बुरहानपुर विधानसभा सीट से प्रत्याशी बनाई गईं पूर्व मंत्री और प्रदेश प्रवक्ता अर्चना चिटनिस की ओर था।

वरिष्ठ नेताओं ने किया था ये वादा

उल्लेखनीय है कि नंदू भैया निमाड़ क्षेत्र के लाड़ले और लोकप्रिय नेता थे। उन्हें निमाड़ की नैया के नाम भी पुकारा जाता था। उनके निधन के बाद बुरहानपुर आए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित भाजपा के कई बड़े नेताओं ने हर्षवर्धन का राजनीतिक भविष्य संवारने का वादा किया था, लेकिन संसदीय क्षेत्र के लिए हुए उप चुनाव में उनकी जगह ज्ञानेश्वर पाटिल को प्रत्याशी बना दिया था। विरोध के बाद आने वाले विधानसभा चुनाव में मौका देने की बात कही गई थी, लेकिन इस बार भी उन्हें कहीं से प्रत्याशी नहीं बनाया गया।

सेवक जनता के आदेश का पालन करेगा

निर्दलीय चुनाव लड़ने के सवाल पर हर्षवर्धन सिंह चौहान ने कहा है कि वे जनता के सेवक हैं और जनता उनकी मालिक है। मालिक जो भी आदेश करेगा वे उसे पूरा करेंगे। उनके इस जवाब को निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरने की मंशा के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले शनिवार रात बड़ी संख्या में नंदू भैया के समर्थक कार्यकर्ता उनके संजय नगर स्थित आवास में एकत्र हुए थे। इस दौरान उन्होंने नंदू भैया निमाड़ की नैया के नारे भी लगाए थे।

ऐसे व्यवहार को कार्यकर्ता नहीं करेंगे सहन

नंदू भैया की पत्नी दुर्गेश्वरी देवी ने पार्टी के नेताओं से सवाल किया था कि उनके पति ने आखिर पार्टी की सेवा में कौन सी कमी छोड़ी थी। उन्होंने निमाड़ क्षेत्र में पार्टी को स्थापित किया था और कई बार भाजपा सरकार के लिए तारणहार बने थे। पार्टी की सेवा करते-करते ही कोरोना काल में उन्होंने खुद को बलिदान तक कर दिया। ऐसे नेता के परिवार के साथ पार्टी के इस व्यवहार को कार्यकर्ता कभी सहन नहीं कर पाएंगे।

सभी दावेदार हुए एकजुट

प्रत्याशी की घोषणा होने के बाद टिकट के सभी दावेदार एकजुट हो गए हैं। शनिवार और रविवार को भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष विजय गुप्ता, पूर्व निगम अध्यक्ष मनोज तारवाला, पूर्व महापौर अनिल भोंसले सहित अन्य नेता हर्षवर्धन के साथ खड़े नजर आए। इसके अलावा भाजपा के आधा दर्जन पार्षद व कई पदाधिकारी भी स्वागत कार्यक्रम में शामिल हुए थे। इससे सहज अनुमान लगाया जा सकता है कि जिले में भाजपा दो खेमों में बंट गई है। टिकट नहीं मिलने से नाराज चल रहे नेता एक ओर व पार्टी के निष्ठावान पदाधिकारी दूसरे खेमे के साथ खड़े नजर आ रहे हैं।

कांग्रेस के दोनों प्रत्याशियों का विरोध

भाजपा की तरह कांग्रेस में भी दोनों प्रत्याशियों का विरोध जारी है। प्रत्याशियों को बदलने के लिए कांग्रेस के छोटे पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं से लेकर प्रदेश उपाध्यक्ष हमीद काजी और प्रदेश महासचिव अजय रघुवंशी तक सड़कों पर उतर आए हैं। कांग्रेस के 23 पार्षद विरोध स्वरूप पार्टी से इस्तीफा दे चुके हैं। बुरहानपुर और नेपानगर में प्रत्याशियों के पुतले भी जलाए जा चुके हैं। लगातार हो रहे विरोध को देखते हुए शनिवार को कांग्रेस ने प्रदेश मुख्यालय में बैठक भी बुलाई थी। जिसमें जिले के पदाधिकारी शामिल हुए थे। निमाड़ में हो रहे विराध प्रदर्शनों की धुरी में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव का नाम बार-बार सामने आ रहा है।

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