ब्रेकिंग
छतरपुर: उद्घाटन से पहले ही केन नदी पर बने पुल में पड़ी दरारें, निर्माण की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल इंदौर से भोपाल तक कांग्रेस की 'युवा स्वाभिमान यात्रा': जीतू पटवारी ने सरकार पर साधा निशाना, शुरू की ... शहडोल स्वास्थ्य व्यवस्था पर फिर उठे सवाल: 108 एंबुलेंस के इंतजार में महिला की मौत, रास्ते में दिया ब... श्योपुर कलेक्टर शीला दाहिमा का सुरीला अंदाज: सावन सांस्कृतिक संध्या में लाइव सिंगिंग ने जीता लोगों क... सीधी: रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े गए जिला अभियोजन अधिकारी, लोकायुक्त टीम को देख सड़क पर फेंके नोट रतलाम: खेत सीमांकन विवाद से परेशान किसान चढ़ा पानी की टंकी पर, 'शोले' के वीरू जैसा दिखा नजारा Ujjain News: स्कूल कैंपस से निकले छात्र और तालाब में डूबे, जवाहर नवोदय विद्यालय प्रबंधन की लापरवाही ... Jabalpur News: बरसाती नालों और खेतों में निकल रहे मगरमच्छ, वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट ने लोगों को दी सतर्क ... Weather Update: दिल्ली में बारिश पर ब्रेक, यूपी-बिहार समेत इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट इंदौर मर्डर केस: सहायक डाक अधीक्षक उर्मिला सैनी की हत्या के 48 घंटे बाद भी आरोपी पति फरार, परिजनों क...
धार्मिक

आंवला नवमी 21 नवंबर को, इसी दिन हुई थी सतयुग की शुरुआत, जानें क्या है पौराणिक मान्यता

इंदौर। हिंदू धर्म में आंवला नवमी प्रमुख त्योहारों में से एक हैं। इसे अक्षय नवमी भी कहा जाता है और इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल अक्षय नवमी या आंवला नवमी कार्तिक माह में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि और देवउठनी एकादशी से दो दिन पहले मनाया जाता है। हिंदू धर्म ग्रंथों में आंवला नवमी का काफी शुभ दिन माना जाता है। पौराणिक मान्यता है कि इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और जीवन में सभी सुखों की प्राप्ति होती है।

आंवला नवमी 21 नवंबर को

पंडित चंद्रशेखर मलतारे के मुताबिक, इस बार अक्षय नवमी 21 नवंबर मंगलवार को है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदी में स्नान करें। भगवान विष्णु की पूजा करने के लिए पूर्व दिशा की ओर आंवले के पेड़ के नीचे बैठे। आंवला नवमी कथा और बिन्दायक कथा का पाठ करें। देसी घी का दीया जलाते हुए आंवले के पेड़ के चारों ओर सात बार लाल बांधें। भगवान विष्णु या कृष्ण की आराधना करें।

इसी दिन हुई थी सतयुग की शुरुआत

आंवला नवमी का त्योहार मथुरा-वृंदावन में उत्साह के साथ मनाया जाता है। यहां महिलाएं आंवला नवमी पर व्रत रखती है। यहां काफी ज्यादा तादाद में भक्त गोवर्धन परिक्रमा के लिए भी पहुंचते हैं। एक पौराणिक मान्यता यह भी है कि अक्षय नवमी के दिन से ही सत्य युग की शुरुआत हुई थी।

आंवला नवमी पर हुआ था कंस वध

आंवला नवमी से जुड़ी एक और कथा प्रचलित है। इस कथा के मुताबिक, भगवान कृष्ण ने अपने नाना उग्रसेन को मथुरा का राजा बनाने के लिए अपने मामा कंस का वध करने के लिए आंवला नवमी पर ही वृंदावन और गोकुल की गलियों से मथुरा की यात्रा शुरू की थी।

डिसक्लेमर

‘इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।’

Related Articles

Back to top button