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झारखंड की नई सरकार से लोगों को हैं कई उम्‍मीदें, सरकार के समक्ष कुछ चुनौतियां भी हैं सामने

रांची। राज्यपाल का अभिभाषण राज्य सरकार की दिशा का आईना होता है। इससे पता चलता है कि आनेवाले दिनों में सरकार के कामकाज की रूपरेखा क्या और कैसी होगी। यह अच्छी बात है कि झारखंड विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण के माध्यम से नई सरकार ने अपनी प्राथमिकताओं को बेबाकी के साथ जनता के सामने रख दिया है। उन अहम मुद्दों पर भी सरकार का नजरिया स्पष्ट हो गया है जिनको लेकर पिछली सरकार के कार्यकाल में भ्रम या विवाद की स्थिति पैदा हो गई थी।

ऐसे ही मुद्दों में सीएनटी-एसपीटी एक्ट भी शामिल था। इसमें संशोधन को लेकर जब सरकार के स्तर से बात सामने आई तो विवाद भी बढ़ा और भ्रांतियां भी। जनता के एक बड़े वर्ग में यह आशंका मजबूती के साथ घर कर गई कि उसके हाथों से जमीन निकल सकती है। अच्छी बात यह है कि राज्यपाल के अभिभाषण में दो टूक शब्दों में घोषणा कर दी गई है कि सीएनटी-एसपीटी एक्ट को सख्ती से लागू किया जाएगा। इसके साथ ही सरकार को यह भी देखना होगा कि इस कानून के कवच को बरकरार रखते हुए आदिवासियों और मूलवासियों के विकास का मार्ग कैसे प्रशस्त किया जाए। ऐसा इसलिए, क्योंकि 1908 में सीएनटी-एसपीटी कानून बनने से लेकर अबतक की स्थिति में आमूलचूल बदलाव आ चुका है। 21वीं सदी की नई पीढ़ी समय के साथ विकास से कदमताल करने को तत्पर है। भाषा अकादमी के गठन से क्षेत्रीय भाषाओं का विकास होगा और इसका फायदा बच्चों को भी मिलेगा। कला एवं संस्कृति को संरक्षण मिलेगा। साथ ही राज्य के गौरवशाली इतिहास में भी नया अध्याय जुड़ेगा।

नई सरकार के इस कदम का भी स्वागत किया जाना चाहिए कि जलवायु परिवर्तन और यातायात प्रबंधन को स्कूली पाठयक्रम में शामिल किया गया है। आनेवाले समय में दोनों बड़े संकट का रूप धारण कर सकते हैं।समय रहते नई पीढ़ी को इनकी गंभीरता से अवगत करा इससे निपटने के रास्ते तलाशे जा सकते हैं। जनता की उम्मीदों को मंजिल तक पहुंचाने में सरकार की भावी रीति-नीति निर्णायक भूमिका अदा करेगी। इसीलिए सरकार को काफी सुविचारित तरीके से ब्लूप्रिंट तैयार करने के साथ समय सीमा में नतीजा भी सुनिश्चित करना होगा। सरकार की जो प्राथमिकताएं सामने आई हैं उनसे पता चलता है कि आगाज तो अच्छा है। अब जरूरत इस बात की है कि प्राथमिकताओं को मूर्त रूप देने के लिए त्वरित और परिणामोन्मुख काम हो।

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