ब्रेकिंग
UP Police Constable Exam 2026: यूपी पुलिस कांस्टेबल लिखित परीक्षा का शेड्यूल जारी, 3 दिनों तक चलेगा ... Uttarakhand Madarsa Board: उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड खत्म! अब 'अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण' तय करेगा... Bikram Majithia News: जेल से बाहर आते ही गुरुद्वारा दुख निवारण साहिब पहुंचे मजीठिया, नतमस्तक होकर पर... Batala Murder Case: बटाला कत्ल मामले में पुलिस की बड़ी कामयाबी, हत्या की साजिश रचने वाला 'कपल' गिरफ्... Punjab Highway Accident: पंजाब में हाईवे पर स्कॉर्पियो का भीषण हादसा, 3 पुलिसकर्मियों समेत 6 लोग गंभ... Punjab Board Exam Update: कब शुरू होंगी PSEB 12वीं की परीक्षाएं? डेटशीट को लेकर आई बड़ी जानकारी, छात... Horrific Attack: घर से निकलते ही 13 साल के बच्चे पर खूंखार कुत्ते का हमला, लहूलुहान हुआ मासूम; चीखें... Punjab Governor Visit: पंजाब के 3 अहम जिलों के दौरे पर रहेंगे गवर्नर, प्रशासन ने कसी कमर; सुरक्षा के... Jalandhar Raid: जालंधर में शराब माफिया के ठिकाने पर बड़ी रेड, भारी पुलिस फोर्स ने घंटों खंगाला घर; इ... Crime Strike: बड़े शातिर चोर गिरोह का पर्दाफाश, पुलिस ने 6 आरोपियों को दबोचा; लाखों का माल बरामद
देश

अरविंद केजरीवाल की लहर में 22 साल बाद ढह गया किला, जनता में नहीं रहा ‘इकबाल’

नई दिल्ली। वर्ष 2015 में अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) की ऐसी लहर चली कि बड़े-बड़े सूरमा धराशायी हो गए। केजरीवाल की लहर में AAP ने एतिहासिक प्रदर्शन किया और 70 में 67 सीटें जीत लीं, वहीं एक पार्टी का तो टेंट-तंबू तक उड़ गया। ऐसे ही सूरमा थे शोएब इकबाल, जिनके बारे में प्रचलित था कि कभी इनका सूरज अस्त नहीं हो सकता है। वह 22 सालों से पुरानी दिल्ली की मटियामहल सीट पर जीत हासिल कर रहे थे। उनका तिलिस्म ऐसा था कि उन्हें विधानसभा चुनाव जीतने के लिए कभी राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के सहयोग की जरूरत नहीं पड़ी।

पांच बार से लगातार जीत रहे थे चुनाव

यहां पर क्षेत्रीय दल तो उनके क्षेत्र में पीछे खड़े हो जाते थे। वह पांच बार से लगातार चुनाव जीतते आ रहे थे। हालांकि, छठवीं बार वर्ष 2015 के चुनाव में हवा का रुख भांपकर उन्होंने कांग्रेस पार्टी का हाथ पकड़ा, लेकिन सियासत के नए खिलाड़ी आसिम अहमद खान ने AAP के टिकट पर चुनाव लड़ा और उन्हें पटखनी दे दी। यह उनके लिए तगड़ा झटका था। जानकार कहते हैं कि इस हार के बाद से उन्होंने राजनीति से खुद को दूर कर लिया और सार्वजनिक मंचों से दूरी बना ली थी। फिलहाल कुछ महीनों से वह सार्वजनिक कार्यक्रमों में दिखने लगे हैं।

वर्ष 1993 के चुनाव में जनता दल के टिकट पर शोएब ने 62 फीसद के साथ करीब 27 हजार मत पाकर मटियामहल से पहली जीत दर्ज की थी। इसके बाद कभी जनता दल, कभी जनता दल सेक्युलर तो कभी लोक जनशक्ति पार्टी के टिकट पर वह चुनाव जीतते रहे।

समय के साथ उनकी चमक भी खोने लगी थी। वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में जदयू के टिकट पर मिले 31 फीसद (22,732) मतों से वह किसी तरह कुर्सी बचाने में कामयाब हुए थे। लेकिन, वर्ष 2015 आते-आते वह समझ गए कि राष्ट्रीय पार्टी का साथ लिए बिना चुनाव जीतना मुश्किल है, इसलिए विधानसभा चुनाव के ठीक पहले उन्होंने कांग्रेस पार्टी का दामन थाम लिया। दिल्ली में सम्मानजनक वापसी की जद्दोजहद में लगी कांग्रेस ने भी उन्हें सहर्ष स्वीकार कर लिया। यह गठजोड़ भी शोएब के साम्राज्य को बचा नहीं पाया और उनका किला ढह गया। उन्हें महज 21,488 मत मिले जबकि आप के आसिम अहमद खान ने 47,584 वोटों के साथ ऐतिहासिक जीत दर्ज की।

इस जीत के साथ आसिम अहमद रातोंरात सुर्खियों में आ गए। उन्हें अरविंद केजरीवाल सरकार में मंत्री पद भी मिला। हालांकि, यह कुर्सी ज्यादा दिन उनके पास नहीं रही। कथित भ्रष्टाचार का ऑडियो लीक होने के बाद मंत्री की कुर्सी गंवानी पड़ी। फिलहाल संबंध सुधरने के बाद आसिम को दिल्ली वक्फ बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button