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मध्यप्रदेश

ठेले-गुमठियों पर दिखावे की कार्रवाई, हरियाली खत्म करने वाले रसूखदारों को छोड़ा

भोपाल। शहर की सड़कों के बीच और किनारे में बनाए गए ग्रीन बेल्ट पर कब्जा जारी है। रसूखदार सेंट्रल व साइड वर्ज से हरियाली को खत्म करते जा रहे हैं। लेकिन राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण(एनजीटी) के आदेश के बाद भी इन पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। जबकि दिखावे के नाम पर एक सप्ताह तक निगम अमला सड़क के किनारों से ठेले व गुमठियों को हटाकर दिखावे की कार्रवाई करता रहा। लेकिन इस दौरान एक भी स्थाई अतिक्रमण नहीं हटाया गया। जबकि एनजीटी में चल रहे प्रकरण में दिलीप बिल्डिकान के दिलीप सूर्यवंशी, भोपाल फ्रैक्चर अस्पताल के शशांक अग्रवाल, पूर्व विधायक पीसी शर्मा, जिंदल अस्पताल के मोहित सिक्का, सागर गैरे, गेस्ट्रोकेयर के संजय कुमार और नगर निगम समेत अन्य लोगों को पक्षकार बनाया गया है। इनके खिलाफ आरोप है कि सेंट्रल व साइड वर्ज की हरियाली को नष्ट कर यहां कांक्रीट से पक्का निर्माण कर दिया गया। इस दौरान 30 से 40 वर्ष पुराने सैकड़ों पेड़ काट दिए गए। सेंट्रल व साइड वर्ज को खत्म कर वहां केंटीन, पार्किंग और बैठने के लिए कुर्सियां लगाई गई है।

निगम ने प्रतिमा स्थापना के लिए काटे पुराने पेड़

अरेरा कालोनी में जिस स्थान पर वीर दुर्गादास की प्रतिमा लगी थी। वहां चौराहे को संकरा किया जाना था। ऐसे में नगर निगम ने वीर दुर्गादास की प्रतिमा को विस्थापित किया जाना था। इसके लिए निगम के अधिकारियों ने प्रतिमा को सड़क किनारे स्थापित करने के लिए साइड वर्ज में खड़े पुराने पेड़ों को काट दिया। वहीं प्रतिमा के लिए दो हजार स्क्वायर फीट में कांक्रीट का बेस बनाया और इसके बगल में लोगों के बैठने के लिए कुर्सियां लगाकर हरियाली को नष्ट किया।

वीआइपी क्षेत्रों में खत्म हो रहा ग्रीन बेल्ट

वर्ष 2021 में राजधानी परियोजना द्वारा सेंट्रल व साइड वर्ज पर 692 अतिक्रमणकारियों को चिंहित किया गया था। जबकि पिछली सुनवाई में एनजीटी ने 297 और अतिक्रमणकारियों के नाम इस सूची में जोड़ने के निर्देश दिए हैं। इनमें 1100 क्वार्टर, अरेरा कालोनी ई-1 से लेकर ई-8 तक, शाहपुरा, चूनाभट्टी, गुलमोहर, 12 नंबर और लिंक रोड समेत अन्य स्थानों पर सड़क किनोर ग्रीन बेल्ट खत्म होता जा रहा है।

एनजीटी में आज फिर सुनवाई

इस मामले में पर्यावरणविद सुभाष सी पांडे ने एनजीटी में याचिका दायर की है। इसकी सुनवाई के लिए पक्षकारों को एनजीटी के सामने 12 दिसंबर को तलब किया गया था। इस दिन नगर निगम के कर्मचारियों को भी एनजीटी में उपस्थित होकर बताने के लिए बुलाया गया कि अब तक कब्जा हटाने के लिए उन्होंने क्या कार्रवाई की।

एनजीटी के आदेश ही नहीं मान रहा नगर निगम

एनजीटी ने ग्रीन बेल्ट पर अतिक्रमणकारियों को चिह्नित करने के लिए भोपाल डीएफओ के नेतृत्व में जांच समिति बनाई थी। साथ ही नगर निगम को कहा था कि अतिक्रमणकारियों को चिह्नित कर कार्रवाई करें। वहीं एनजीटी में इस मामले की एक्शन टेकन रिपोर्ट सबमिट करें। लेकिन अब तक इस पर कोई अमल नहीं हुआ। इधर ग्रीन बेल्ट से कब्जा हटाने के नाम पर सड़क के किनारों से ठेले-गुमठियां उठाना शुरु कर दिए।

इनका कहना

जांच समिति और नगर निगम को एनजीटी में बताना था कि किसके बंगले के सामने और किस सार्वजनिक जगह पर कितना कब्जा है। जिससे कब्जेधारियों से पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति वसूली जा सके। लेकिन इस पर कोई अमल नहीं हुआ।

– सुभाष सी पांडे, याचिकाकर्ता

शहर में ग्रीन बेल्ट की हरियाली खत्म की जा रही है। आरक्षित ग्रीन बेल्ट कम होने से जलवायु पर भी असर हो रहा है। निगम को यहां से कब्जा हटाने के बाद तार फेसिंग करनी चाहिए। जिससे यहां दूसरी बार कब्जा न हो।

– कमल राठी, सामाजिक कार्यकर्ता

सेंट्रल व साइड वर्ज को सबसे अधिक नुकसान अरेरा कालोनी में अस्पतालों ने किया है। इसमें भोपाल फ्रैक्चर अस्पताल और गेस्ट्रोकेयर अस्पताल समेत अन्य अस्पतालों ने साइड वर्ज के पेड़ों को काटकर सीमेंट-कांक्रीट से बैठने की व्यवस्था बनाई है।

– राशिद नूर, पर्यावरण कार्यकर्ता

कलेक्टर सर के निर्देश पर हम ग्रीन बेल्ट से अतिक्रमण हटा रहे हैं। इसके लिए पीडब्ल्यूडी, सीपीए व अन्य विभागों से भी समन्वय स्थापित किया जा रहा है। अब तक हमने 169 अतिक्रमण ग्रीन बेल्ट से हटाए हैं, ये भी एनजीटी की सूची में है।

– फ्रैंक नोबल ए., आयुक्त, भोपाल नगर निगम

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