ब्रेकिंग
कवर्धा में नकली नोट गिरोह का भंडाफोड़: ₹12.50 लाख के जाली नोट, टाटा पंच EV कार और प्रिंटर के साथ 3 ग... पचमढ़ी नागद्वारी मेले में दो दिन में पहुंचे 2 लाख श्रद्धालु: अव्यवस्थाओं से आक्रोशित भीड़ का हंगामा,... छतरपुर में सनसनी: मशहूर व्यापारी के इंजीनियर बेटे की रेलवे ट्रैक किनारे मिली संदिग्ध लाश, वर्क फ्रॉम... बुरहानपुर में 'वेस्ट से बेस्ट' की अनूठी मिसाल, केले के तनों से महिलाओं ने बनाईं ईको-फ्रेंडली राखियां विदिशा में बेतवा नदी के उफान से बिगड़े हालात, चरणतीर्थ घाट डूबा; शिव मंदिर में फंसे 3 बेजुबान जबलपुर में स्वास्थ्य विभाग को मिली ऐतिहासिक सफलता, नई थेरेपी से एड्स पीड़ित माताओं के 13 बच्चे बने ए... ग्वालियर के श्मशान घाटों में खत्म होगी मनमानी: अब तय रेट पर मिलेंगे कंडे और लकड़ी, नगर निगम का बड़ा ... मध्य प्रदेश में लगेगा नेशनल सोयाबीन रिसर्च इंस्टीट्यूट, भोपाल-विदिशा मार्ग होगा 4-लेन; MP कैबिनेट के... भोपाल में 'हर घर तिरंगा' अभियान की भव्य तैयारी: कोलार से बैरागढ़ तक निकलेगी तिरंगा यात्रा, प्रशासन न... रतलाम में 24 घंटे में ढाई इंच बारिश: फसलों को मिला संजीवनी बूस्टर, जिला अस्पताल के वार्डों में टपका ...
देश

कचरा साफ नहीं होने पर स्थानीय निकायों पर हर महीने लगेगा 10 लाख का जुर्माना

नई दिल्ली: शहरों में कचरा पैदा होने और उसके निस्तारण में बड़ा अंतर है जिससे पर्यावरण को नुक्सान हो रहा है और इससे लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। यह बात राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एन.जी.टी.) ने कही। साथ ही उसने निर्देश दिया कि 10 लाख से अधिक आबादी वाले इलाकों में इसके निस्तारण में विफल रहने पर स्थानीय निकायों को प्रति महीने 10 लाख रुपए जुर्माना भरना पड़ेगा।

एन.जी.टी. अध्यक्ष आदर्श कुमार गोयल की पीठ ने कहा कि ठोस और तरल अपशिष्ट के मुद्दे को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। यह भी निर्देश दिया गया कि सभी राज्यों और संघ-शासित क्षेत्रों के मुख्य सचिवों के कार्यालयों में एक महीने के अंदर ‘‘पर्यावरण निगरानी प्रकोष्ठ’’ का गठन किया जाए। पीठ ने कहा, ‘‘कचरा पैदा होने और उसे इकट्ठा करने के बाद उसके निस्तारण की प्रक्रिया नियमित आधार पर नहीं हो रही है। कोई भी व्यक्ति जो रेलगाड़ी से यात्रा करता है, बिखरे कूड़े और बहते नाले सामान्य तौर पर देख सकता है। संतोषजनक सीवेज प्रबंधन भी नहीं हो रहा। इन असंतोषजनक कार्यों का जल्द निदान होना चाहिए और उच्च स्तर पर समयबद्ध तरीके से होना चाहिए। जवाबदेही तय की जानी चाहिए।’’

अवैध भूजल निकासी पर उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश को फटकार
एन.जी.टी. ने उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में ‘संवेदनशील’ और ‘कम संवेदनशील’ क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अवैध रूप से भूजल निकालने को लेकर ‘निष्क्रियता’ के लिए दोनों राज्यों की सरकारों को शुक्रवार को फटकार लगाई। एन.जी.टी. ने दोनों राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि वे निजी उद्योगों के संबंध में उपचारात्मक कदम उठाएं और साथ ही यह सुनिश्चित करने के लिए सामान्य कदम उठाएं कि केंद्रीय भूजल प्राधिकरण की पूर्व अनुमति के बगैर भूजल का दोहन न किया जाए।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button