ब्रेकिंग
सनातनी विनोद कुमार बिंदल के सान्निध्य में रामलीला का समापन, दशहरा पर रावण दहन और श्रीराम के राज्याभि... US Stance on India Internal Matters: भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने से अमेरिका का इनकार, अमेरिकी... Delhi High Court Observation: 'आप लोग जेन-जी नहीं हैं...' कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ताओं पर कोर्ट ... Tiger Shroff Attack Case Update: टाइगर श्रॉफ पर हमले की साजिश का बड़ा खुलासा, लॉरेंस बिश्नोई गैंग के... Smriti Irani Attacks Rahul Gandhi: स्मृति ईरानी का राहुल गांधी पर तीखा हमला, महिला पुलिस अफसर के साथ... Mallikarjun Kharge Letter to PM Modi: परिसीमन और संविधान संशोधन को लेकर मल्लिकार्जुन खरगे ने पीएम मो... UP Congress Press Conference: यूपी कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर बोला बड़ा हमला, एसआईआर प्रक्रिया में गड... Akhilesh Yadav Warning to Officers: राजनीतिक कार्यकर्ता बनकर काम करने वाले अधिकारियों को जेल जाने की... Supaul News: बिहार के सुपौल में 9 दिनों तक छाती पर कलश रखकर मां दुर्गा की आराधना करने वाली महिला की ... Haridwar Ganga Canal Cleaning News: हरिद्वार में हर की पैड़ी पर सूखी गंगा की धारा, मरम्मत और सफाई के...
मध्यप्रदेश

शिक्षक से पत्नी को आधा वेतन दिलाने पर हाई कोर्ट ने कलेक्टर पर लगाया 25 हजार का जुर्माना

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में शिक्षक के वेतन से 50 प्रतिशत की राशि काटकर उनकी पत्नी को भरण-पोषण बतौर दिलाने के कलेक्टर के आदेश को मनमाना और अवैधानिक करार दिया। इसके लिए हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने सिंगरौली जिले के तत्कालीन कलेक्टर के प्रति नाराजगी जताते हुए उन पर 25 हजार का जुर्माना तो लगाया ही है, साथ ही शिक्षक के वेतन से काटकर पत्नी को दिलाए गए वेतन की धनराशि आठ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने का भी आदेश दिया।

हाई कोर्ट ने कहा कि भरण-पोषण राशि निर्धारित करने का अधिकार कलेक्टर को है ही नहीं। यह अधिकार न्यायालय का है। याचिका सिंगरौली निवासी शिक्षक कालेश्वर साहू की ओर से दायर की गई थी। इसमें कहा गया कि उसकी पत्नी ने भरण-पोषण के लिए धारा-125 के तहत कुटुम्ब न्यायालय में आवेदन किया था। कुटुम्ब न्यायालय में मामले की सुनवाई लंबित है।

मप्र हाई कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी

सिंगरौली जिला कलेक्टर के समक्ष जनसुनवाई के दौरान उसकी पत्नी मुन्नी साहू उपस्थित हुई थीं। कलेक्टर ने याचिकाकर्ता के वेतन से 50 प्रतिशत की राशि काटकर पत्नी को भरण-पोषण के लिए प्रदान करने के आदेश अक्टूबर 2021 में जारी किए थे। कलेक्टर के निर्देशानुसार शिक्षा विभाग के जिला समन्वयक अधिकारी ने 50 प्रतिशत वेतन कटौती के आदेश जारी कर दिए।

याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि भरण-पोषण की राशि निर्धारित करने का अधिकार संबंधित न्यायालय को है। ऐसा करने की न्यायिक शक्तियां जिला कलेक्टर के पास नहीं है। जिला कलेक्टर का आदेश पूरी तरह से मनमाना व अवैधानिक है। हाई कोर्ट ने याचिका की सुनवाई के बाद वेतन से कटौती की गई राशि आठ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ याचिकाकर्ता शिक्षक को प्रदान करने के आदेश जारी किए हैं। कलेक्टर के आदेश को मनमाना व गैरकानूनी मानते हुए याचिका-व्यय बतौर 25 हजार का जुर्माना लगा दिया। यह राशि तत्कालीन कलेक्टर से वसूलने के निर्देश दिए हैं।

Related Articles

Back to top button