ब्रेकिंग
सदाशिवपेट में 400 साल पुरानी ऐतिहासिक पुष्करिणी: इतिहास, संस्कृति और आस्था का बेजोड़ संगम नवी मुंबई के ऐरोली में दही हांडी उत्सव के दौरान हादसा: मानव पिरामिड गिरने से 34 वर्षीय गोविंदा की मौ... Sagar Hooch Tragedy: सागर के बंडा में जहरीली शराब का कहर, 11 लोगों की मौत; 25 अस्पताल में भर्ती महाराष्ट्र में MPSC के खिलाफ छात्रों का फूटा आक्रोश: चेयरमैन के इस्तीफे की मांग, राहुल गांधी का मिला... राजधानी में ब्रिक्स सम्मेलन की तैयारियां तेज: VVIP कारकेड के ड्राई रन से 35 से ज्यादा मार्ग रहेंगे प... Muzaffarnagar Crime News: जन्माष्टमी पर मंदिर गई 14 वर्षीय किशोरी से दरिंदगी, मुख्य आरोपी समीर गिरफ्... दुबई से पति को तलाशते हुए सतना पहुंची महिला: महिला थाने में दर्ज कराई गुमशुदगी की शिकायत 🛕 खैरागढ़ के जमातपारा में 300 साल पुराना बनबिहारी मंदिर: कृष्ण भक्ति और रियासतकालीन इतिहास का संगम Durg News: दिव्यांगता को बनाया ताकत, दुर्ग के दृष्टिबाधित शिक्षक अवतार गुप्ता ने की डिजिटल एक्सेसिबि... Chhattisgarh BJP News: रायपुर में जुटेगा प्रबुद्ध वर्ग और ओबीसी मोर्चा, संगठन महामंत्री पवन साय देंग...
मध्यप्रदेश

Digvijay singh ने दे दिया EVM में गड़बड़ी का डेमो! एक्सपर्ट के जरिए साबित किया कि VVPAT गलत पर्ची कैसे दिखाती है…?

भोपाल: मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने एक बार फिर से ईवीएम को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने राजधानी भोपाल में बुधवार को EVM को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें EVM से जुड़े कई सवाल किए और लाइव डेमो के जरिए वोटिंग गड़बड़ी का आरोप लगाया। दिग्विजय सिंह ने डेमो में दिखाया कि ईवीएम में वोट किसी और को दिया गया और गया किसी और को। दिग्विजय ने कहा कि लाल कृष्ण आडवाणी से लेकर कई नेताओं ने इस पर अविश्वास जताया था। चर्चा हुई तो वीवीपैट मशीन आई। 2003 में EVM से चुनाव शुरू हुआ। तब कर्मचारियों में नाराजगी थी। बटन दबाओ, वोट कहां चला जाता है पता नहीं लगता। मददान का अधिकार लोगों का संवैधानिक है। लोगों को पता लगना चाहिए कि आखिर वोट कहां जा रहा है।

ईवीएम का सॉफ्टवेयर तय करता है किसकी सरकार बनेगी- दिग्विजय सिंह

दिग्विजय सिंह ने कहा कि अब ईवीएम का सॉफ्टवेयर तय करता है कि किसकी सरकार बनेगी। सारा काम प्राइवेट लोगों के हाथ में है। 140 करोड़ के देश में जहां 90 करोड़ मतदाता हैं तो क्या हम ऐसे लोगों के हाथ में ये सब तय करने का अधिकार दे दें। पूरे इलेक्शन प्रोसेस का मालिक न मतदाता है, न अधिकारी-कर्मचारी हैं। इसका मालिक सॉफ्टवेयर बनाने और डालने वाला है।सॉफ्टवेयर कौन डाल रहा है इसकी कोई जानकारी नहीं है। सॉफ्टवेयर बनाने वाला डालने वाला और सॉफ्टवेयर ही तय करेगा की सरकार किसकी बनेगी। इन सबका मालिक अब सॉफ्टवेयर निर्माता है।

ऐसे काम करती है ईवीएम

दिग्विजय सिंह ने कहा कि इंजीनियर इंटरनेट के लिए लैपटॉप से ईवीएम को कनेक्ट करते हैं। उसके बाद चुनाव चिन्ह लोड होते हैं। इंजीनियरों की इस गतिविधि से चिप सर्वे सर्वा हो जाता है। वीवीपैट मशीन में 7 सेकंड के लिए दिखाई देता है। लेकिन, जो दिखा वही डब्बे में गिरा इस बात पर संदेह है। उन्होंने कहा कि वीवीपैट में जो माइक्रोचिप है, वही वोट डाल रही है। विश्व भर में केवल 5 देश है जहां ईवीएम से इलेक्शन होता है। ऑस्ट्रेलिया में ईवीएम में जो सॉफ्टवेयर इस्तेमाल होता है वह पब्लिक डोमेन में है। लेकिन, भारत में आज तक कौनसा सॉफ्टवेयर इस्तेमाल होता है ये जानकारी किसी को नहीं है। चुनाव आयोग कहता है कि पब्लिक करने से सॉफ्टवेयर हैक हो सकता है।

दबाव में है चुनाव आयोग- दिग्विजय सिंह

पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह आरोप लगाया कि इलेक्शन कमिशन दबाव में है। हम कुछ बोलते हैं तो नोटिस मिल जाता है। बीजेपी का आत्मविश्वास जो है वो जनता का नहीं, सॉफ्टवेयर का आत्मविश्वास है। मैं कुछ भी बोलता हूं तो कईयों को विश्वास नहीं होता।

Related Articles

Back to top button